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संतोष ही वास्तविक सुख का आधार : सौरभ जैन
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अमरोहा। जैन मंदिर कोट में चल रहे दशलक्षण पर्व के नौवें दिन बृहस्पतिवार को उत्तम आकिंचन्य धर्म श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। सुबह जिनेंद्र भगवान का अभिषेक और रिद्धि मंत्रों के साथ भव्य शांतिधारा की गई। इसके बाद दशलक्षण मंडल विधान में श्रद्धालुओं ने विधिवत पूजा-अर्चना की। शाम को आरती के बाद बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।
सांगानेर से आए शास्त्री सौरभ जैन ने उत्तम आकिंचन्य धर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि इसका मूल भाव है कि संसार में वास्तव में कुछ भी हमारा नहीं है। मनुष्य धन, मकान, पद और संबंधों को अपना मानकर उनके प्रति आसक्ति बढ़ाता रहता है, जबकि आत्मा अखंड, ज्ञानस्वरूप और अविनाशी है। संसार की अन्य सभी वस्तुएं नश्वर और परद्रव्य हैं। उन्होंने कहा कि इच्छाओं का कोई अंत नहीं है। संतोष ही वास्तविक सुख का आधार है।
उन्होंने कहा कि परिग्रह केवल धन-संपत्ति तक सीमित नहीं है। क्रोध, मान, माया, लोभ और राग-द्वेष जैसे भाव भी मनुष्य को बंधन में बांधते हैं। भगवान महावीर ने वस्तुओं के प्रति अत्यधिक आसक्ति को ही वास्तविक परिग्रह बताया है। भेद-विज्ञान जागृत होने पर व्यक्ति समझता है कि शरीर भी नश्वर है और एक दिन यहीं छूट जाना है। ऐसे में सांसारिक वस्तुओं के प्रति अत्यधिक मोह रखना उचित नहीं है।
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इस दौरान जैन समाज अध्यक्ष योगेश जैन, मंत्री शरद जैन, कोषाध्यक्ष राजेश जैन, विनय जैन, पवन जैन, संजीव रतन जैन, मनोज जैन, संजय जैन, दीपक जैन, सोनू जैन, हर्षित जैन, विभोर जैन, अमित जैन, सुधांशु शर्मा, सुनीता जैन, सुधा जैन, दीपाली जैन, सपना जैन, सोनम जैन, निरुपमा जैन, मोहिनी जैन, उषा जैन मौजूद रहे।
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सांगानेर से आए शास्त्री सौरभ जैन ने उत्तम आकिंचन्य धर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि इसका मूल भाव है कि संसार में वास्तव में कुछ भी हमारा नहीं है। मनुष्य धन, मकान, पद और संबंधों को अपना मानकर उनके प्रति आसक्ति बढ़ाता रहता है, जबकि आत्मा अखंड, ज्ञानस्वरूप और अविनाशी है। संसार की अन्य सभी वस्तुएं नश्वर और परद्रव्य हैं। उन्होंने कहा कि इच्छाओं का कोई अंत नहीं है। संतोष ही वास्तविक सुख का आधार है।
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उन्होंने कहा कि परिग्रह केवल धन-संपत्ति तक सीमित नहीं है। क्रोध, मान, माया, लोभ और राग-द्वेष जैसे भाव भी मनुष्य को बंधन में बांधते हैं। भगवान महावीर ने वस्तुओं के प्रति अत्यधिक आसक्ति को ही वास्तविक परिग्रह बताया है। भेद-विज्ञान जागृत होने पर व्यक्ति समझता है कि शरीर भी नश्वर है और एक दिन यहीं छूट जाना है। ऐसे में सांसारिक वस्तुओं के प्रति अत्यधिक मोह रखना उचित नहीं है।
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इस दौरान जैन समाज अध्यक्ष योगेश जैन, मंत्री शरद जैन, कोषाध्यक्ष राजेश जैन, विनय जैन, पवन जैन, संजीव रतन जैन, मनोज जैन, संजय जैन, दीपक जैन, सोनू जैन, हर्षित जैन, विभोर जैन, अमित जैन, सुधांशु शर्मा, सुनीता जैन, सुधा जैन, दीपाली जैन, सपना जैन, सोनम जैन, निरुपमा जैन, मोहिनी जैन, उषा जैन मौजूद रहे।