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Amroha News: कोटेदारों को मिलने वाला राशन डकार रहे जिम्मेदार, डीएम की जांच में खुलासा
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अमरोहा।
जिले में राशन वितरण में गड़बड़ी का बड़ा खेल सामने आया है। राशन डीलरों को ही गोदाम से पूरा राशन नहीं मिल पा रहा है। राशन डीलरों को मिलने वाले कट्टों का वजन समायोजित नहीं किया जा रहा है। जिससे राशन डीलरों को हर कट्टे पर करीब 700 ग्राम वजन कम मिल रहा है। इस तरह हर माह राशन डीलरों को करीब 980 क्विंटल खाद्यान्न कम मिलता है। जिसका खामियाजा राशन कार्डधारकों को भी भुगतना पड़ता है। डीएम द्वारा कराई गई जांच में इसका खुलासा हुआ है। जिसके बाद डीएम ने मामले में डीएसओ का स्पष्टीकरण तलब किया है।
जिले में राशन वितरण प्रणाली के तहत 847 उचित दर की दुकानों का संचालन होता है। जिसमें 138 शहरी क्षेत्र व 709 ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं। जहां से राशन कार्ड धारकों को खाद्यान्न का वितरण सुनिश्चित किया जाता है। जिले में 1.34 लाख लाभार्थी राशन हर माह राशन कार्ड के जरिए अपना खाद्यान्न पाते हैं। लेकिन जिले की राशन वितरण प्रणाली में अधिकारियों व कर्मचारियों का बड़ा खेल डीएम की जांच में सामने आया है। लगातार मिल रहीं शिकायतों के बाद डीएम ने दो डिप्टी कलक्टरों पुष्कर नाथ चौधरी व भगत सिंह को मामले की जांच सौंपी थी।
डिप्टी कलक्टरों द्वारा पांच बिंदुओं पर जांच की गई थी। जिसमें वितरण प्रणाली में बड़ा घालमेल निकलकर सामने आया है। नियमानुसार राशन कोटेदारों को वन स्टेप डिलीवरी के तहत उसकी दुकान की पांच सौ मीटर की परिधी में ही उपलब्ध कराया जाना चाहिए। लेकिन कुछेक दुकानों को छोड़कर इस आदेश का भी पालन नहीं हो रहा है। अधिकांश जगहों पर राशन वितरण के समय पूर्ति निरीक्षक भी मौजूद नहीं रहते। इसके अलावा वितरण प्रणाली में सबसे बड़ा झोल कट्टों के समायोजन का सामने आया है। नियमानुसार ठेकेदार द्वारा राशन उपलब्ध कराते हुए प्रति कट्टा 700 ग्राम वजन का समायोजन कर उसके बराबर का राशन डीलरों को देना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। राशन डीलरों को हर कट्टे पर 700 ग्राम वजन कम मिल रहा है। इसका खामियाजा कार्डधारकों को कम राशन मिलने पर भुगतना पड़ता है।
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लगभग 98 हजार किलो राशन कम मिलता है कोटेदारों को
जिले में हर माह करीब 70 हजार क्विंटल राशन वितरण के लिए कोटेदारों को उपलब्ध कराया जाता है। एक कट्टे पर 700 ग्राम वजन कम दिए जाने के हिसाब से हर माह लगभग 98 हजार किलोग्राम वजन का राशन कोटेदारों को मिलता ही नही है। जिसकी बाजार में कीमत करीब 23 लाख रुपये से अधिक बैठती है। ऐसे में संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा गरीबों को मिलने वाला यह राशन डकारा जा रहा है।
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नहीं होती वन स्टेप डिलीवरी
राशन वितरण प्रणाली के तहत राशन डीलरों की दुकान तक ठेकेदारों को वन स्टेप डिलीवरी के तहत राशन पहुंचाना होता है। लेकिन इस व्यवस्था का पालन भी कहीं नहीं हो रहा है। कुछेक दुकानों को छोड़कर अधिकांश राशन डीलरों को अपने वाहन से ही राशन का उठान करना होता है। जिससे ठेकेदारों का ट्रांसपोर्ट का खर्च भी बचता है, ओर राशन डीलरों को इसका अतिरिक्त खर्च वहन करना पड़ता है। जिसका खामियाजा भी राशन कार्ड धारकों को कम राशन पाकर चुकाना पड़ता है।
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राशन वितरण प्रणाली के तहत लगातार मिल रही शिकायतों के बाद जांच कराई गई थी। जिसमें पांच बिंदुओं की जांच में कई गड़बड़ी
मिलने की बात सामने आई है। मामले में डीएसओ का स्पष्टीकरण तलब किया गया है। - निधि गुप्ता वत्स, डीएम
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जिले में राशन वितरण में गड़बड़ी का बड़ा खेल सामने आया है। राशन डीलरों को ही गोदाम से पूरा राशन नहीं मिल पा रहा है। राशन डीलरों को मिलने वाले कट्टों का वजन समायोजित नहीं किया जा रहा है। जिससे राशन डीलरों को हर कट्टे पर करीब 700 ग्राम वजन कम मिल रहा है। इस तरह हर माह राशन डीलरों को करीब 980 क्विंटल खाद्यान्न कम मिलता है। जिसका खामियाजा राशन कार्डधारकों को भी भुगतना पड़ता है। डीएम द्वारा कराई गई जांच में इसका खुलासा हुआ है। जिसके बाद डीएम ने मामले में डीएसओ का स्पष्टीकरण तलब किया है।
जिले में राशन वितरण प्रणाली के तहत 847 उचित दर की दुकानों का संचालन होता है। जिसमें 138 शहरी क्षेत्र व 709 ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं। जहां से राशन कार्ड धारकों को खाद्यान्न का वितरण सुनिश्चित किया जाता है। जिले में 1.34 लाख लाभार्थी राशन हर माह राशन कार्ड के जरिए अपना खाद्यान्न पाते हैं। लेकिन जिले की राशन वितरण प्रणाली में अधिकारियों व कर्मचारियों का बड़ा खेल डीएम की जांच में सामने आया है। लगातार मिल रहीं शिकायतों के बाद डीएम ने दो डिप्टी कलक्टरों पुष्कर नाथ चौधरी व भगत सिंह को मामले की जांच सौंपी थी।
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डिप्टी कलक्टरों द्वारा पांच बिंदुओं पर जांच की गई थी। जिसमें वितरण प्रणाली में बड़ा घालमेल निकलकर सामने आया है। नियमानुसार राशन कोटेदारों को वन स्टेप डिलीवरी के तहत उसकी दुकान की पांच सौ मीटर की परिधी में ही उपलब्ध कराया जाना चाहिए। लेकिन कुछेक दुकानों को छोड़कर इस आदेश का भी पालन नहीं हो रहा है। अधिकांश जगहों पर राशन वितरण के समय पूर्ति निरीक्षक भी मौजूद नहीं रहते। इसके अलावा वितरण प्रणाली में सबसे बड़ा झोल कट्टों के समायोजन का सामने आया है। नियमानुसार ठेकेदार द्वारा राशन उपलब्ध कराते हुए प्रति कट्टा 700 ग्राम वजन का समायोजन कर उसके बराबर का राशन डीलरों को देना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। राशन डीलरों को हर कट्टे पर 700 ग्राम वजन कम मिल रहा है। इसका खामियाजा कार्डधारकों को कम राशन मिलने पर भुगतना पड़ता है।
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लगभग 98 हजार किलो राशन कम मिलता है कोटेदारों को
जिले में हर माह करीब 70 हजार क्विंटल राशन वितरण के लिए कोटेदारों को उपलब्ध कराया जाता है। एक कट्टे पर 700 ग्राम वजन कम दिए जाने के हिसाब से हर माह लगभग 98 हजार किलोग्राम वजन का राशन कोटेदारों को मिलता ही नही है। जिसकी बाजार में कीमत करीब 23 लाख रुपये से अधिक बैठती है। ऐसे में संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा गरीबों को मिलने वाला यह राशन डकारा जा रहा है।
नहीं होती वन स्टेप डिलीवरी
राशन वितरण प्रणाली के तहत राशन डीलरों की दुकान तक ठेकेदारों को वन स्टेप डिलीवरी के तहत राशन पहुंचाना होता है। लेकिन इस व्यवस्था का पालन भी कहीं नहीं हो रहा है। कुछेक दुकानों को छोड़कर अधिकांश राशन डीलरों को अपने वाहन से ही राशन का उठान करना होता है। जिससे ठेकेदारों का ट्रांसपोर्ट का खर्च भी बचता है, ओर राशन डीलरों को इसका अतिरिक्त खर्च वहन करना पड़ता है। जिसका खामियाजा भी राशन कार्ड धारकों को कम राशन पाकर चुकाना पड़ता है।
राशन वितरण प्रणाली के तहत लगातार मिल रही शिकायतों के बाद जांच कराई गई थी। जिसमें पांच बिंदुओं की जांच में कई गड़बड़ी
मिलने की बात सामने आई है। मामले में डीएसओ का स्पष्टीकरण तलब किया गया है। - निधि गुप्ता वत्स, डीएम