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Amroha News: गिरते तापमान से सरसों की फसल में सफेद रतुआ रोग की संभावना बढ़ी
Sat, 11 Jan 2025 04:36 PM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Sat, 11 Jan 2025 04:36 PM IST
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सफेद रतुआ रोग की चपेट में सरसों की फसल। स्रोत कृषि विभाग
अमरोहा।
खेतों में इस समय सरसों की फसल लहलहा रही है, लेकिन तापमान में दिनोंदिन हो रही गिरावट से सरसों में सफेद रतुआ रोग यानी व्हाइट रस्ट का खतरा भी मंडराने लगा है। इसकी आशंका को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है।
मौसम में बदलाव के साथ लगातार पाले और तापमान में गिरावट सरसों की फसल को नुकसान पहुंचा सकती है। कोहरे के बने रहने से सरसों की फसल में व्हाइट रस्ट यानी रतुआ रोग का खतरा भी बढ़ गया है। इस रोग में पत्तों के निचले भाग में सफेद धब्बे से दिखाई देने लगते हैं और सफेद पाउडर सा बन जाता है। इसका प्रकोप बढ़ने पर यह पत्तों के बाद तने से होती हुई फलियों तक पहुंच जाती है, जिससे फसल प्रभावित होने लगती है।
पौधे की टहनी टेढ़ी-मेढ़ी होने लगती है और बढ़वार भी रुक जाती है। जिसके बाद वह मोर के पंजे की तरह आकार लेने लगती है। इस अवस्था में आने के बाद फलियां बननी बंद हो जाती है। पत्ते और तने के प्रभावित होने के बाद पौधे में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया भी प्रभावित होने लगती है, और फसल का नुकसान भी बढ़ जाता है। रोग की बढ़ती संभावना को देखते हुए कृषि विभाग की और से भी सरसों की फसल के लिए एडवाइजरी जारी की गई है।
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क्या कहते हैं विशेषज्ञ
अपर जिला कृषि रक्षा अधिकारी सतीश कुमार ने बताया कि सरसों की फसल में रतुआ रोग लगने से इसके उत्पादन पर खासा प्रभाव पड़ता है। यह रोग एल्बुगो कैंडिडा नामक फफूंद से होता है, जो एक ऊमाइसीट है। निरंतर कोहरे के संपर्क में आने के कारण इस रोग का प्रभाव बढ़ जाता है। रोग के बचाव के लिए उन्होंने बताया कि फसलों की नियमित देखभाल करनी चाहिए। फसल में रोग का असर दिखाई देने पर मेटालैक्सिल एम चार प्रतिशत व मैन्कोजेब 64 प्रतिशत डब्ल्यूपी ढाई किलोग्राम को एक हजार लीटर पानी में घोल तैयार करके प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए।
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खेतों में इस समय सरसों की फसल लहलहा रही है, लेकिन तापमान में दिनोंदिन हो रही गिरावट से सरसों में सफेद रतुआ रोग यानी व्हाइट रस्ट का खतरा भी मंडराने लगा है। इसकी आशंका को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है।
मौसम में बदलाव के साथ लगातार पाले और तापमान में गिरावट सरसों की फसल को नुकसान पहुंचा सकती है। कोहरे के बने रहने से सरसों की फसल में व्हाइट रस्ट यानी रतुआ रोग का खतरा भी बढ़ गया है। इस रोग में पत्तों के निचले भाग में सफेद धब्बे से दिखाई देने लगते हैं और सफेद पाउडर सा बन जाता है। इसका प्रकोप बढ़ने पर यह पत्तों के बाद तने से होती हुई फलियों तक पहुंच जाती है, जिससे फसल प्रभावित होने लगती है।
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पौधे की टहनी टेढ़ी-मेढ़ी होने लगती है और बढ़वार भी रुक जाती है। जिसके बाद वह मोर के पंजे की तरह आकार लेने लगती है। इस अवस्था में आने के बाद फलियां बननी बंद हो जाती है। पत्ते और तने के प्रभावित होने के बाद पौधे में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया भी प्रभावित होने लगती है, और फसल का नुकसान भी बढ़ जाता है। रोग की बढ़ती संभावना को देखते हुए कृषि विभाग की और से भी सरसों की फसल के लिए एडवाइजरी जारी की गई है।
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क्या कहते हैं विशेषज्ञ
अपर जिला कृषि रक्षा अधिकारी सतीश कुमार ने बताया कि सरसों की फसल में रतुआ रोग लगने से इसके उत्पादन पर खासा प्रभाव पड़ता है। यह रोग एल्बुगो कैंडिडा नामक फफूंद से होता है, जो एक ऊमाइसीट है। निरंतर कोहरे के संपर्क में आने के कारण इस रोग का प्रभाव बढ़ जाता है। रोग के बचाव के लिए उन्होंने बताया कि फसलों की नियमित देखभाल करनी चाहिए। फसल में रोग का असर दिखाई देने पर मेटालैक्सिल एम चार प्रतिशत व मैन्कोजेब 64 प्रतिशत डब्ल्यूपी ढाई किलोग्राम को एक हजार लीटर पानी में घोल तैयार करके प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए।