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‘चकबंदी में भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों के हों तबादले’
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अमरोहा। किसान समस्याओं को लेकर भाकियू भानु के पदाधिकारियों ने कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। प्रशासनिक अफसरों के खिलाफ नारेबाजी की। मनमानी का आरोप लगाया। चकबंदी में भ्रष्टाचार से लिप्त अधिकारियों के तबादले की मांग की। जल्द ही समस्याओं का समाधान नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी।
मंगलवार को भाकियू भानु के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चौधारी दिवाकर सिंह के नेतृत्व में तमाम किसान कलक्ट्रेट पहुंचे। यहां डीएम बीके त्रिपाठी को ज्ञापन सौंपकर बताया कि कोविड-19 महामारी के चलते किसान अपनी व अपने बच्चों की जान की परवाह किए बगैर देश का पेट भरने के लिए फसलें पैदा कर रहा है। बावजूद इसके केंद्र और प्रदेश सरकार जारी सुविधाएं अन्नदाता को नहीं मिल पा रही हैं। जिले में 2,76,287 किसान हैं। इसमें 2,38,479 किसान सम्मान निधि योजना में पात्र हैं लेकिन आज तक केवल 2,13,000 किसानों को सम्मान निधि मिली है। करीब 38,000 किसान आज तक वंचित हैं। पात्र होते हुए भी जनपद के किसानों को करीब 67 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। प्रदेश सरकार ने निजी नलकूप संयोजन ऊपर मीटर लगाने के आदेश दिए है। जिससे किसानों में भारी रोष है। किसानों के निजी नलकूप संयोजन पर पहले की तरह फ्लैट रेट से ही बिल बनाए जाएं। जनपद की चीनी मिलें बंद हुए करीब दो महीने बीत चुके हैं। किसान एक-एक पैसे के लिए मोहताज है। इसके लिए समस्त गन्ना मूल्य भुगतान तत्काल कराया जाए। जनपद में चल रही चकबंदी प्रक्रिया में घोर भ्रष्टाचार व्याप्त है। चकबंदी क्षेत्र अधिकारियों द्वारा किसानों से खुलेआम लूट की जा रही है। उड़ान चक, जमीन की पैमाइश और जमीन की कीमत आदि पर किसानों को घूस देने के लिए मजबूर और विवश किया जाता है। तत्काल ऐसे क्षेत्राधिकारियों का जिले से स्थानांतरण किए जाएं। बैंकों द्वारा किसान क्रेडिट कार्ड बनवाने पर परेशान किया जाता है। इसके अलावा जो किसान के क्रेडिट कार्ड बने हुए हैं, उन पर सरकार की गाइडलाइन को धता बताते हुए अनाप-शनाप चार्ज लगाए जा रहे हैं। इन्हें तत्काल रोका जाए। साथ ही अब तक जो अवैध वसूली हुई है उसे किसानों के खातों में वापस कराया जाए। इस दौरान चौधरी बिरेंदर सिंह, समर पाल सैनी, पप्पू पाल, जयपाल सिंह, महिपाल सैनी, हरिओम पाल, सतवीर पाल आदि मौजूद रहे।
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मंगलवार को भाकियू भानु के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चौधारी दिवाकर सिंह के नेतृत्व में तमाम किसान कलक्ट्रेट पहुंचे। यहां डीएम बीके त्रिपाठी को ज्ञापन सौंपकर बताया कि कोविड-19 महामारी के चलते किसान अपनी व अपने बच्चों की जान की परवाह किए बगैर देश का पेट भरने के लिए फसलें पैदा कर रहा है। बावजूद इसके केंद्र और प्रदेश सरकार जारी सुविधाएं अन्नदाता को नहीं मिल पा रही हैं। जिले में 2,76,287 किसान हैं। इसमें 2,38,479 किसान सम्मान निधि योजना में पात्र हैं लेकिन आज तक केवल 2,13,000 किसानों को सम्मान निधि मिली है। करीब 38,000 किसान आज तक वंचित हैं। पात्र होते हुए भी जनपद के किसानों को करीब 67 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। प्रदेश सरकार ने निजी नलकूप संयोजन ऊपर मीटर लगाने के आदेश दिए है। जिससे किसानों में भारी रोष है। किसानों के निजी नलकूप संयोजन पर पहले की तरह फ्लैट रेट से ही बिल बनाए जाएं। जनपद की चीनी मिलें बंद हुए करीब दो महीने बीत चुके हैं। किसान एक-एक पैसे के लिए मोहताज है। इसके लिए समस्त गन्ना मूल्य भुगतान तत्काल कराया जाए। जनपद में चल रही चकबंदी प्रक्रिया में घोर भ्रष्टाचार व्याप्त है। चकबंदी क्षेत्र अधिकारियों द्वारा किसानों से खुलेआम लूट की जा रही है। उड़ान चक, जमीन की पैमाइश और जमीन की कीमत आदि पर किसानों को घूस देने के लिए मजबूर और विवश किया जाता है। तत्काल ऐसे क्षेत्राधिकारियों का जिले से स्थानांतरण किए जाएं। बैंकों द्वारा किसान क्रेडिट कार्ड बनवाने पर परेशान किया जाता है। इसके अलावा जो किसान के क्रेडिट कार्ड बने हुए हैं, उन पर सरकार की गाइडलाइन को धता बताते हुए अनाप-शनाप चार्ज लगाए जा रहे हैं। इन्हें तत्काल रोका जाए। साथ ही अब तक जो अवैध वसूली हुई है उसे किसानों के खातों में वापस कराया जाए। इस दौरान चौधरी बिरेंदर सिंह, समर पाल सैनी, पप्पू पाल, जयपाल सिंह, महिपाल सैनी, हरिओम पाल, सतवीर पाल आदि मौजूद रहे।
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