{"_id":"699e1344aebc8b68d201b418","slug":"the-insurance-company-will-have-to-pay-rs-20000-along-with-interest-and-a-penalty-of-rs-15000-jpnagar-news-c-284-1-smbd1013-158094-2026-02-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Amroha News: बीमा कंपनी को ब्याज समेत देने होंगे क्लेम के 20 हजार रुपये, 15 हजार जुर्माना भी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Amroha News: बीमा कंपनी को ब्याज समेत देने होंगे क्लेम के 20 हजार रुपये, 15 हजार जुर्माना भी
विज्ञापन
अमरोहा। जिला उपभोक्ता आयोग ने स्वास्थ्य बीमा क्लेम खारिज किए जाने के मामले में पीड़ित पक्ष को राहत दी है। आयोग ने बीमा कंपनी के जारी अस्वीकृति पत्र को निरस्त करते हुए 20 हजार रुपये की क्लेम धनराशि नौ प्रतिशत सहित अदा करने का आदेश दिया है। साथ ही मानसिक व आर्थिक क्षति और वाद व्यय के रूप में 15 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। बीमा कंपनी को यह धनराशि एक महीने के भीतर सौंपनी होगी।
रजाकपुर गांव में जयवीर सिंह का परिवार रहता है। उनकी पत्नी विवेचना ने 7 सितंबर 2022 को हेल्थ बीमा पॉलिसी ली थी। पॉलिसी की बीमित राशि 20 हजार रुपये थी और प्रीमियम का भुगतान समय से किया गया। विवेचना को ठंड, बुखार, उल्टी, कमजोरी और सिरदर्द की शिकायत पर 11 अगस्त 2023 को श्री सूर्या हॉस्पिटल बुलंदशहर में भर्ती कराया गया। इलाज में 22,250 रुपये खर्च हुए, जिसका भुगतान उन्होंने नकद किया था। बाद में समस्त दस्तावेजों के साथ बीमा कंपनी से क्लेम के लिए आवेदन किया लेकिन कंपनी ने 28 दिसंबर 2023 को यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि टाइफाइड का इलाज ओपीडी के रूप में संभव था और अस्पताल में भर्ती की आवश्यकता नहीं थी।
विवेचना ने मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की शरण ली। मामले को गंभीरता से लेकर आयोग के अध्यक्ष रमा शंकर सिंह और महिला सदस्य अंजू रानी दीक्षित ने बीमा कंपनी के अधिकारियों को तलब कर लिया। दोनों पक्षों के सुनने के बाद आयोग ने पाया कि पीड़िता को डॉक्टर की सलाह पर भर्ती किया गया था। अस्पताल के दस्तावेजों में कहीं भी यह उल्लेख नहीं था कि इलाज ओपीडी के रूप में संभव था। आयोग ने यह भी कहा कि बीमा कंपनी ने किसी विशेषज्ञ चिकित्सक की स्वतंत्र रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की और स्वयं ही दस्तावेजों की व्याख्या कर दावा खारिज कर दिया जो सेवा में कमी दर्शाता है। सभी साक्ष्यों और दलीलों पर विचार करते हुए आयोग ने बीमा कंपनी की कार्रवाई को अनुचित ठहराया और एक माह के भीतर निर्धारित धनराशि का भुगतान करने का आदेश दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
रजाकपुर गांव में जयवीर सिंह का परिवार रहता है। उनकी पत्नी विवेचना ने 7 सितंबर 2022 को हेल्थ बीमा पॉलिसी ली थी। पॉलिसी की बीमित राशि 20 हजार रुपये थी और प्रीमियम का भुगतान समय से किया गया। विवेचना को ठंड, बुखार, उल्टी, कमजोरी और सिरदर्द की शिकायत पर 11 अगस्त 2023 को श्री सूर्या हॉस्पिटल बुलंदशहर में भर्ती कराया गया। इलाज में 22,250 रुपये खर्च हुए, जिसका भुगतान उन्होंने नकद किया था। बाद में समस्त दस्तावेजों के साथ बीमा कंपनी से क्लेम के लिए आवेदन किया लेकिन कंपनी ने 28 दिसंबर 2023 को यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि टाइफाइड का इलाज ओपीडी के रूप में संभव था और अस्पताल में भर्ती की आवश्यकता नहीं थी।
विज्ञापन
विवेचना ने मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की शरण ली। मामले को गंभीरता से लेकर आयोग के अध्यक्ष रमा शंकर सिंह और महिला सदस्य अंजू रानी दीक्षित ने बीमा कंपनी के अधिकारियों को तलब कर लिया। दोनों पक्षों के सुनने के बाद आयोग ने पाया कि पीड़िता को डॉक्टर की सलाह पर भर्ती किया गया था। अस्पताल के दस्तावेजों में कहीं भी यह उल्लेख नहीं था कि इलाज ओपीडी के रूप में संभव था। आयोग ने यह भी कहा कि बीमा कंपनी ने किसी विशेषज्ञ चिकित्सक की स्वतंत्र रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की और स्वयं ही दस्तावेजों की व्याख्या कर दावा खारिज कर दिया जो सेवा में कमी दर्शाता है। सभी साक्ष्यों और दलीलों पर विचार करते हुए आयोग ने बीमा कंपनी की कार्रवाई को अनुचित ठहराया और एक माह के भीतर निर्धारित धनराशि का भुगतान करने का आदेश दिया है।
विज्ञापन