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Amroha News: हाईकोर्ट ने धनौरा के एसडीएम को चेताया कहा-बिना अधिकार के आदेश की समीक्षा नहीं
Sat, 16 May 2026 12:59 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Sat, 16 May 2026 12:59 AM IST
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अमरोहा। मुस्लिम कमेटी की नुमाइंदगी को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर आदेश पारित करने के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए धनौरा के एसडीएम को कड़ी चेतावनी दी है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि यदि किसी निर्धारित प्राधिकारी को किसी मामले में पुनर्विलोकन (रिव्यू) का अधिकार नहीं है, तो वह अपने ही आदेश की समीक्षा नहीं कर सकता।
यह टिप्पणी न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकल पीठ ने द मैनेजिंग कमेटी ऑफ मुस्लिम कमेटी सोसाइटी द्वारा दाखिल रिट याचिका की सुनवाई के दौरान की। मामले में याचियों ने एसडीएम शैलेश कुमार दुबे द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि एसडीएम शैलेश कुमार दुबे के पास पुनर्विलोकन की वैधानिक शक्ति नहीं थी, इसके बावजूद उन्होंने पूर्व आदेश की समीक्षा करते हुए नया आदेश पारित कर दिया।
कोर्ट ने इसे गंभीर विषय मानते हुए एसडीएम को व्यक्तिगत रूप से तलब किया था। बृहस्पतिवार को हुई सुनवाई में एसडीएम शैलेश कुमार दुबे अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए और हलफनामा दाखिल कर अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि आदेश अनजाने में पारित हो गया था और इसके पीछे कोई दुर्भावना या गलत मंशा नहीं थी। अदालत ने उनके स्पष्टीकरण को रिकॉर्ड पर लेते हुए फिलहाल व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दे दी, लेकिन साथ ही कड़ी चेतावनी भी जारी की।
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कोर्ट ने कहा कि भविष्य में यदि इस प्रकार की पुनरावृत्ति हुई तो उसे गंभीरता से लिया जाएगा और संबंधित अधिकारी के खिलाफ कठोर कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है। अब हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए जुलाई माह में निर्धारित की है। साथ ही याचियों को प्रत्युत्तर हलफनामा दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है। अदालत ने पूर्व में जारी अंतरिम आदेश को भी अगले आदेश तक प्रभावी बनाए रखा है।
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यह टिप्पणी न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकल पीठ ने द मैनेजिंग कमेटी ऑफ मुस्लिम कमेटी सोसाइटी द्वारा दाखिल रिट याचिका की सुनवाई के दौरान की। मामले में याचियों ने एसडीएम शैलेश कुमार दुबे द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि एसडीएम शैलेश कुमार दुबे के पास पुनर्विलोकन की वैधानिक शक्ति नहीं थी, इसके बावजूद उन्होंने पूर्व आदेश की समीक्षा करते हुए नया आदेश पारित कर दिया।
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कोर्ट ने इसे गंभीर विषय मानते हुए एसडीएम को व्यक्तिगत रूप से तलब किया था। बृहस्पतिवार को हुई सुनवाई में एसडीएम शैलेश कुमार दुबे अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए और हलफनामा दाखिल कर अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि आदेश अनजाने में पारित हो गया था और इसके पीछे कोई दुर्भावना या गलत मंशा नहीं थी। अदालत ने उनके स्पष्टीकरण को रिकॉर्ड पर लेते हुए फिलहाल व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दे दी, लेकिन साथ ही कड़ी चेतावनी भी जारी की।
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कोर्ट ने कहा कि भविष्य में यदि इस प्रकार की पुनरावृत्ति हुई तो उसे गंभीरता से लिया जाएगा और संबंधित अधिकारी के खिलाफ कठोर कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है। अब हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए जुलाई माह में निर्धारित की है। साथ ही याचियों को प्रत्युत्तर हलफनामा दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है। अदालत ने पूर्व में जारी अंतरिम आदेश को भी अगले आदेश तक प्रभावी बनाए रखा है।