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रमजान अल्लाह की इबादत करने का खास महीना: मौलाना कौसर
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अमरोहा। आमदे माहे रमजान के सिलसिले में महफिल-ए-नात का आयोजन किया गया। जिसमें शायरों ने अपने-अपने कलाम पेश कर खूब वाह-वाही लूटी।
शहर के मोहल्ला दानिशमंदान स्थित डा. शहजाद रजा के आवास पर महफिल की शुरुआत तिलावते कुरआने पाक से मोहम्मद अब्बाज रजा व नात शरीफ से नाजिम हुसैन आरिफ ने की। शिया धर्मगुरु मौलाना कौसर मुज्तबा ने कहा कि रमजान अल्लाह की इबादत करने का खास महीना है। इसके बाद शायरों ने अपने-अपने कलाम पेश किए। डाॅ. नासिर अमरोहवी ने पढ़ा...हाय वो गर्मी महशर के कयामत टूटे, हाय वो जन्नत के सीने से लगाए आका। डाॅ. शहजाद रजा ने कहा...कहने को कोई कुछ भी कहे सच तो यही है, इस्लाम बच गया है बदौलत हुसैन की। नौशा अमरोहवी ने कहा...कर्बला के मैदान से मुंह छुपाकर भागी है, अब तलाश करने पर बैयते नहीं मिलती। पंडित भुवन अमरोहवी ने यूं कहा...मेरी आंखें उन्हीं को ढूंढती हैं, सहारा बनके जो आते है सभी का।
इनके अलावा शानदार अमरोहवी, अनीस अमरोहवी आदि ने भी अपने-अपने कलाम पेश किए। मौलाना सफदर रजा ने दुआ कराई। अध्यक्षता मौलाना सफदर रजा व संचालन सामी अमरोहवी ने किया। इस दौरान डॉ.लाडले रहबर, शाने रजा, शाने मेहंदी, मुख्तार नकवी, इरफान कैफी, जाहिर हुसैन, सिकंदर, माहिर हुसैन, रजा हैदर आदि मौजूद रहे।
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शहर के मोहल्ला दानिशमंदान स्थित डा. शहजाद रजा के आवास पर महफिल की शुरुआत तिलावते कुरआने पाक से मोहम्मद अब्बाज रजा व नात शरीफ से नाजिम हुसैन आरिफ ने की। शिया धर्मगुरु मौलाना कौसर मुज्तबा ने कहा कि रमजान अल्लाह की इबादत करने का खास महीना है। इसके बाद शायरों ने अपने-अपने कलाम पेश किए। डाॅ. नासिर अमरोहवी ने पढ़ा...हाय वो गर्मी महशर के कयामत टूटे, हाय वो जन्नत के सीने से लगाए आका। डाॅ. शहजाद रजा ने कहा...कहने को कोई कुछ भी कहे सच तो यही है, इस्लाम बच गया है बदौलत हुसैन की। नौशा अमरोहवी ने कहा...कर्बला के मैदान से मुंह छुपाकर भागी है, अब तलाश करने पर बैयते नहीं मिलती। पंडित भुवन अमरोहवी ने यूं कहा...मेरी आंखें उन्हीं को ढूंढती हैं, सहारा बनके जो आते है सभी का।
इनके अलावा शानदार अमरोहवी, अनीस अमरोहवी आदि ने भी अपने-अपने कलाम पेश किए। मौलाना सफदर रजा ने दुआ कराई। अध्यक्षता मौलाना सफदर रजा व संचालन सामी अमरोहवी ने किया। इस दौरान डॉ.लाडले रहबर, शाने रजा, शाने मेहंदी, मुख्तार नकवी, इरफान कैफी, जाहिर हुसैन, सिकंदर, माहिर हुसैन, रजा हैदर आदि मौजूद रहे।
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