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14 नवंबर को जागेंगे श्री हरि, खूब बजेंगी शहनाई
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अमरोहा। कोरोना महामारी के चलते लंबित पड़ी शादी वाले परिवारों को निराश होने की जरूरत नहीं है। 14 नवंबर को देवोत्थान एकादशी है, मान्यता के अनुसार इस दिन श्री हरि भगवान विष्णु जाग जाएंगे। इसके साथ ही मांगलिक कार्य भी शुरू हो जाएंगे। हर ओर शहनाइयों की गूंज सुनाई देगी। नवंबर से 29 फरवरी तक विवाह के लिए खूब शुभ मुहूर्त भी हैं। शुक्र और गुरु लंबे समय तक उदय रहेंगे। देवोत्थान एकादशी के दिन भी अच्छी सहालग है। नवंबर माह में आठ दिन तक शादियों के लिए शुभ-मुहूर्त है। लोग शादियों की तैयारियों में जुटे हैं। नगर के तमाम बैंक्वेट हाल में शहनाई की धूम रहेगी।
श्रीबाबा गंगानाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष पंडित आशुतोष त्रिवेदी ने बताया कि पिछले काफी समय से हिंदू समाज में विवाह आदि शुभ कार्य रुके थे। अब 14 नवंबर को देवोत्थान एकादशी है। इस दिन भगवान विष्णु चतुर्मास निद्रा से जाग जाएंगे। जिसके बाद मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे। इसी दिन से विवाह कार्य भी शुरू हो जाते हैं। देवोत्थान के दिन भी जिले में शादियों की धूम रहेगी। शुभ-मुहूर्त पर शादी करने के लिए परिजन पहले से ही शहर के बैंक्वेट हाल, गेस्ट हाउस, धर्मशाला, टेंट, लाइट, कैटरिंग, फूल माला, फोटोग्राफर को बुक कर चुके हैं। सहालग की दस्तक से बाजार में रौनक लौट आई है। लोग शादियों की तैयारियों में लगे हुए हैं। इस बार शादियों के शुभ मुहूर्त की कमी नहीं है। देवोत्थान एकादशी सहित नवंबर माह में आठ तिथियों में शादियों की धूम रहेगी। जबकि दिसंबर माह में सबसे ज्यादा नौ दिन तक शादियों का संयोग बन रहा है। शहनाईयों की यह धूम 20 फरवरी तक रहेगी।
शादियों की शुभ तिथियां
नवंबर में 14, 16, 19, 20, 21, 28, 29, 30
दिसंबर में 1, 2, 6, 7, 8, 9, 11, 12, 13
जनवरी माह में 20, 22, 23, 27, 29, 30
फरवरी माह में 4, 5, 6, 7, 10, 18, 19, 20
कार्तिक शुक्लपक्ष की देवोत्थान (देवउठनी) एकादशी 14 नवंबर को है। इसी तिथि पर चार माह से शयन कर रहे भगवान विष्णु जाग्रत हो जाएंगे। इसके ठीक बाद शुभ व मांगलिक कार्य पुन: आरंभ हो जाएंगे। घरों से लेकर शादीघरों तक शहनाई गूंजेगी। गृहप्रवेश, यज्ञोपवीत, नामकरण, नए प्रतिष्ठान का शुभारंभ जैसे कार्य होने लगेंगे। भगवान विष्णु आषाढ़ शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि से शयन पर हैं। इसी कारण शुभ और मांगलिक कार्य बंद हैं।
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देवोत्थान एकादशी पर भगवान विष्णु का करें पंचामृत से अभिषेक
पंडित आशुतोष त्रिवेदी बताते हैं कि देवोत्थान एकादशी पर भगवान विष्णु का पंचामृत से अभिषेक करके विधि-विधान से पूजन करना चाहिए। उन्हें मिष्ठान, सिंघाड़ा, गन्ने का रस अर्पित करके शंख, घंटा-घड़ियाल बजाकर खुशी मनाना चाहिए। साथ ही भगवान शालिग्राम से तुलसी विवाह कराना चाहिए। तुलसी का शालिग्राम से विवाह कराने वाले भगवान विष्णु की कृपा के पात्र बनते हैं। जिन दंपतियों के कन्या नहीं हैं वे तुलसी को कन्यादान करके पुण्य अर्पित कर सकते हैं।
देवोत्थान एकादशी पर यह न करें
देवोत्थान एकादशी पर गोभी, पालक, शलजम और चावल का सेवन न करें। बाल और नाखून नहीं कटवाने चाहिए। किसी पेड़-पौधों की पत्तियां न तोड़े, भूल से भी किसी को कड़वी बातें न बोलें। दूसरे से मिले भोजन को ग्रहण न करें।
देवोत्थान एकादशी पर ऐसा करें
देवोत्थान एकादशी के दिन भगवान विष्णु की मूर्ति के सामने दीपक अवश्य जलाना चाहिए। भगवान विष्णु के नाम का कीर्तन भी करना चाहिए। निर्जल व्रत रखें। किसी गरीब और गाय को भोजन अवश्य कराना चाहिए।
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श्रीबाबा गंगानाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष पंडित आशुतोष त्रिवेदी ने बताया कि पिछले काफी समय से हिंदू समाज में विवाह आदि शुभ कार्य रुके थे। अब 14 नवंबर को देवोत्थान एकादशी है। इस दिन भगवान विष्णु चतुर्मास निद्रा से जाग जाएंगे। जिसके बाद मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे। इसी दिन से विवाह कार्य भी शुरू हो जाते हैं। देवोत्थान के दिन भी जिले में शादियों की धूम रहेगी। शुभ-मुहूर्त पर शादी करने के लिए परिजन पहले से ही शहर के बैंक्वेट हाल, गेस्ट हाउस, धर्मशाला, टेंट, लाइट, कैटरिंग, फूल माला, फोटोग्राफर को बुक कर चुके हैं। सहालग की दस्तक से बाजार में रौनक लौट आई है। लोग शादियों की तैयारियों में लगे हुए हैं। इस बार शादियों के शुभ मुहूर्त की कमी नहीं है। देवोत्थान एकादशी सहित नवंबर माह में आठ तिथियों में शादियों की धूम रहेगी। जबकि दिसंबर माह में सबसे ज्यादा नौ दिन तक शादियों का संयोग बन रहा है। शहनाईयों की यह धूम 20 फरवरी तक रहेगी।
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शादियों की शुभ तिथियां
नवंबर में 14, 16, 19, 20, 21, 28, 29, 30
दिसंबर में 1, 2, 6, 7, 8, 9, 11, 12, 13
जनवरी माह में 20, 22, 23, 27, 29, 30
फरवरी माह में 4, 5, 6, 7, 10, 18, 19, 20
कार्तिक शुक्लपक्ष की देवोत्थान (देवउठनी) एकादशी 14 नवंबर को है। इसी तिथि पर चार माह से शयन कर रहे भगवान विष्णु जाग्रत हो जाएंगे। इसके ठीक बाद शुभ व मांगलिक कार्य पुन: आरंभ हो जाएंगे। घरों से लेकर शादीघरों तक शहनाई गूंजेगी। गृहप्रवेश, यज्ञोपवीत, नामकरण, नए प्रतिष्ठान का शुभारंभ जैसे कार्य होने लगेंगे। भगवान विष्णु आषाढ़ शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि से शयन पर हैं। इसी कारण शुभ और मांगलिक कार्य बंद हैं।
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देवोत्थान एकादशी पर भगवान विष्णु का करें पंचामृत से अभिषेक
पंडित आशुतोष त्रिवेदी बताते हैं कि देवोत्थान एकादशी पर भगवान विष्णु का पंचामृत से अभिषेक करके विधि-विधान से पूजन करना चाहिए। उन्हें मिष्ठान, सिंघाड़ा, गन्ने का रस अर्पित करके शंख, घंटा-घड़ियाल बजाकर खुशी मनाना चाहिए। साथ ही भगवान शालिग्राम से तुलसी विवाह कराना चाहिए। तुलसी का शालिग्राम से विवाह कराने वाले भगवान विष्णु की कृपा के पात्र बनते हैं। जिन दंपतियों के कन्या नहीं हैं वे तुलसी को कन्यादान करके पुण्य अर्पित कर सकते हैं।
देवोत्थान एकादशी पर यह न करें
देवोत्थान एकादशी पर गोभी, पालक, शलजम और चावल का सेवन न करें। बाल और नाखून नहीं कटवाने चाहिए। किसी पेड़-पौधों की पत्तियां न तोड़े, भूल से भी किसी को कड़वी बातें न बोलें। दूसरे से मिले भोजन को ग्रहण न करें।
देवोत्थान एकादशी पर ऐसा करें
देवोत्थान एकादशी के दिन भगवान विष्णु की मूर्ति के सामने दीपक अवश्य जलाना चाहिए। भगवान विष्णु के नाम का कीर्तन भी करना चाहिए। निर्जल व्रत रखें। किसी गरीब और गाय को भोजन अवश्य कराना चाहिए।