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जानलेवा हमला करने वाले पिता-पुत्र को सात साल की सजा
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पांच साल पहले युवक पर जानलेवा हमला करने वाले पिता-पुत्र को न्यायालय ने सात साल की सजा सुनाई है। साथ ही दोनों पर 22 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। दोनों जमानत पर बाहर थे न्यायालय का फैसला आने के बाद कस्टडी में लेकर जेल भेज दिया गया है।
ये घटना गजरौला थानाक्षेत्र के गांव नवादा में 21 अक्तूबर 2017 को हुई थी। यहां पर किसान दरयाब का परिवार रहता है। उनकी गांव के रहने वाले हरपाल सिंह रंजिश चल रही थी। घटना वाली रात करीब साढ़े नौ बजे दरयाब सिंह का बेटा प्रह्लाद सिंह बाइक पर सवार होकर गजरौला से घर लौट रहा था। जैसे ही उसकी बाइक गांव से करीब 200 मीटर पहले शराब की दुकान के पास पहुंची तभी रास्ते में हरपाल सिंह और उसके बेटे रिंकू ने प्रह्लाद सिंह को रोककर जान से मारने की नियत से गोली मार दी थी। इस दौरान गोली प्रह्लाद कंधे में गोली लगने से घायल हो गया था। मामले में दरयाब सिंह ने पिता-पुत्र के खिलाफ हत्या की कोशिश के आरोप में केस दर्ज कराया था। बाद में पुलिस ने पिता-पुत्र को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। फिलहाल दोनों जमानत पर जेल से बाहर थे। ये मुकदमा अब एडीजे तृतीय संजय वीर सिंह की अदालत में विचाराधीन था।
मंगलवार को न्यायालय ने सुनवाई की। अभियोजन पक्ष की तरफ से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता नितिन बंसल ने पैरवी की। साक्ष्य और सबूतों के आधार पर न्यायालय ने पिता-पुत्र को दोषी करार दिया और सात साल की सजा सुनाई है। साथ ही 22 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
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ये घटना गजरौला थानाक्षेत्र के गांव नवादा में 21 अक्तूबर 2017 को हुई थी। यहां पर किसान दरयाब का परिवार रहता है। उनकी गांव के रहने वाले हरपाल सिंह रंजिश चल रही थी। घटना वाली रात करीब साढ़े नौ बजे दरयाब सिंह का बेटा प्रह्लाद सिंह बाइक पर सवार होकर गजरौला से घर लौट रहा था। जैसे ही उसकी बाइक गांव से करीब 200 मीटर पहले शराब की दुकान के पास पहुंची तभी रास्ते में हरपाल सिंह और उसके बेटे रिंकू ने प्रह्लाद सिंह को रोककर जान से मारने की नियत से गोली मार दी थी। इस दौरान गोली प्रह्लाद कंधे में गोली लगने से घायल हो गया था। मामले में दरयाब सिंह ने पिता-पुत्र के खिलाफ हत्या की कोशिश के आरोप में केस दर्ज कराया था। बाद में पुलिस ने पिता-पुत्र को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। फिलहाल दोनों जमानत पर जेल से बाहर थे। ये मुकदमा अब एडीजे तृतीय संजय वीर सिंह की अदालत में विचाराधीन था।
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मंगलवार को न्यायालय ने सुनवाई की। अभियोजन पक्ष की तरफ से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता नितिन बंसल ने पैरवी की। साक्ष्य और सबूतों के आधार पर न्यायालय ने पिता-पुत्र को दोषी करार दिया और सात साल की सजा सुनाई है। साथ ही 22 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
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