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बारिश होते ही सिहर उठते हैं दारानगर-टीकोवाली के ग्रामीण

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 23 Jul 2020 12:30 AM IST
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ram ganga flood
गजरौला(अमरोहा)। पहाड़ों और मैदानी क्षेत्रों में बारिश से इन दिनों गंगा और रामगंगा उफान पर हैं। ऐसे में खादर में गंगा पार स्थित चालीस से अधिक गांवों के हजारों ग्रामीणों के होश उड़े हुए हैं। बारिश शुरू होते ही उनमें सिहरन दौड़ जाती है। उन्हें बाढ़ से घिरे होने का खतरा सताने लगता है। सबसे अधिक दहशत गंगा के पानी से घिर गांव दारानगर और टीकोवाली के ग्रामीणों में है।
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बुधवार को पूर्वान्ह 11 बजे अलीनगर में गुजर रही पोषक नहर (इन दिनों गंगा का पानी आने के कारण गंगा में तब्दील) पर लगी नाव में ट्रैक्टर-ट्राली लेकर दारानगर और टीकोवाली जा रहे नरेश, दिनेश, हरि सिंह, ओमवती और सुनीता ने बताया कि बारिश होते ही गंगा उफान पर आ जाती है। पानी का बहाव तेज होने के कारण नाव के बहने का भी खतरा रहता है। इसके बावजूद अपने वाहनों को नाव पर रखकर उस पार से इस पार और यहां से उस पार ले जाना उनकी मजबूरी है। इसी बीच अचानक से तेज बारिश शुरू हुई तो नाव में सवार इन ग्रामीणों के चेहरों की रंगत उड़ गई।
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बता दें कि मंडी धनौरा तहसील क्षेत्र में चालीस से अधिक गांव गंगा और रामगंगा पोषक नहर के पार स्थित हैं। गंगा में आई बाढ़ का पानी जब अलीनगर से पोषक नहर में बैक मारता है तो पूरा इलाका बाढ़ की चपेट में आ जाता है। वैसे भी अब इन गांवों में पहुंचने के लिए पैंटून पुल हटा लिए गए हैं। ऐसे में इन गांवों के ग्रामीणों को चारों तरफ से मुसीबतों ने घेरा हुआ है। सबसे अधिक परेशानी दारानगर और टीकोवाली के ग्रामीणों को हो रही है। बाढ़ का पानी धीरे-धीरे इनके खेतों में घुस रहा है। यही वजह है कि खेतों में जाने वाले कच्चे रास्तों पर पानी और कीचड़ भरा हुआ है। ऐसे में वहां पहुंच पाना भी काफी मुश्किल हो रहा है।
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क्या बोले ग्रामीण-
गांव दारानगर निवासी हुकुम सिंह कहते हैं कि सुबह को जब घर से निकलते हैं तो घर वालों के चेहरों पर उदासी छा जाती है। कामधंधे के सिलसिले में गजरौला और हसनपुर जाना पड़ता है। चिंता यही रहती है कि कहीं लौटने में देरी न हो जाए। यदि देरी हुई तो फिर नाव बंद हो जाएगी।
इसी गांव में रहने वाले कालू सिंह कहते हैं कि खादर के इन गांवों की स्थिति जहन्नुम के समान है। ना बिजली है और ना ही सड़क अथवा अस्पताल। ग्रामीण पशुओं की तरह अपना जीवन यापन कर रहे हैं। बचपन से लेकर आज तक सुनते आ रहे हैं कि पुल बनेगा। कब बनेगा यह सु निश्चित नहीं है।
दारानगर के ही अशोक कुमार का कहना है कि नाव में सफर करते हुए काफी डर लगता है। कहीं अधिक वजन के दबाव से नाव पलट न जाए। हर बार बाढ़ के मौसम में हादसे भी होते हैं लेकिन अभी तक किसी भी नेता, जनप्रतिनिधि अथवा अफसर ने इस पर ध्यान नहीं दिया है।
यहीं रहने वाले संदीप ने बताया कि नाव घाट पर रोशनी का प्रबंध कराया जाना चाहिए। यहां रोशनी की व्यवस्था होगी तो रात बे रात ग्रामीण दुख-परेशानी में गंगा पार कर सकते हैं। अब तो शाम ढलते ही नौका संचालन बंद हो जाता है और गांव वाले गांव में ही कैद होकर रह जाते हैं।

नाव में जुगाड़ू रखकर गांव-गांव मसाले बेचते हैं परसराम
गजरौला। अलीनगर में घाट पर नाव की प्रतीक्षा कर रहे मसाले बेचने वाले पंडित परसराम ने अधिक देरी होने पर वहीं अपनी दुकान सजा ली। जुगाड़ (गाड़ी) में अपने दो कर्मियों के साथ आए परसराम ने साथ लिया मिनी लाउडस्पीकर निकाला और वहीं खड़े होकर प्रचार शुरू कर दिया। उन्होंने बताया कि वह जुगाड़ नाव में रखकर गंगापार के गांव दारानगर, टीकोवाली, भुड्डी आदि में जाएंगे और इसी तरह वहां मसाले बेचते हैं। बताया कि लॉकडाउन की वजह से रोजगार ठप हो गए हैं। शहरों के अलावा गांवों में भी साप्ताहिक बाजार अथवा हाट नहीं लग रहे हैं। ऐसे में उन्होंने सोचा कि खादर में गंगा पार बसे गांव वाले मिर्च-मसाले कैसे खरीद पाएंगे? इसीलिए उन्होंने गाड़ी तैयार की और चलती फिरती दुकान लेकर निकल पड़ते हैं इन गांवों में। वहीं गांव वालों का कहना है कि उनके लिए चलती फिरती मसाले की यह दुकान काफी मुफीद साबित हो रही है।
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