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श्रम से तैयार कर रहे अपने भविष्य का पथ
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दौड़ लगाने को गजरौला के रमाबाई अंबेडकर राजकीय महाविद्यालय में ट्रैक को खुद समतल करते युवक ।
- फोटो : JPNAGAR
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गजरौला। आज के दौर में ज्यादातर किशोर और युवा खाली समय मिलते ही मोबाइल फोन और सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों में मशगूल हो जाते हैं लेकिन गजरौला के रमाबाई अंबेडकर महाविद्यालय के मैदान पर जुटने वाले युवाओं की सोच अलग है। पढ़ाई से बचा समय वे न सिर्फ अपनी फिटनेस को देते हैं बल्कि फिटनेस के लिए जरूरी दौड़ का ट्रैक तैयार करने के लिए भी खुद ही पसीना बहा रहे हैं।
मंडी धनौरा क्षेत्र के शाहपुर तिगरी, हसनपुर क्षेत्र के चौकूनी, रझौहा, हींसखेड़ा, सिरसा गुर्जर, ढबारसी, गजरौला, संभल के ऊधनपुर, परतापुर समेत नजदीकी गांवों के काफी युवा गजरौला में रह कर पढ़ाई के साथ खुद को नौकरी के लिए तैयार कर रहे हैं। इनमें से कई का सपना सेना, अर्द्ध सैनिक बल या पुलिस सेवा में जाने का है। इन्हें अंदाजा है कि इसके लिए पढ़ाई जितनी जरूरी है, उतनी ही फिटनेस। लेकिन फिटनेस के लिए इन्हें फिट मैदान या ट्रैक मुहैया नहीं है। लिहाजा अपने भविष्य की राह मजबूत करने के लिए इन्होंने खुद के श्रम से दौड़ का ट्रैक तैयार करने की ठानी है।
रमाबाई अंबेडकर महाविद्यालय के मैदान में ये घंटों फावड़ा चलाकर जमीन को समतल कर रहे हैं। इनमें शामिल कपिल नागर, पवन, लविश रावल, हैदर, शिवम उपाध्याय, रोहित नागर, यतिन भाटी, ताहिर आदि का कहना है कि पढ़ाई के बाद का समय खेल के मैदान को दुरुस्त करने में लगाना भी एक तरह की कसरत है। उनकी इस कोशिश का लाभ अन्य युवाओं को भी मिलेगा तो उनकी खुशी और बढ़ जाएगी।
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महाविद्यालय के क्रीड़ा अधिकारी डा.अजय कुमार भी युवाओं की इस टोली के प्रयासों से प्रभावित हैं। वह कहते हैं कि हर चीज के लिए सिस्टम पर निर्भर रहने की बजाय खुद के श्रम से स्थान को बेहतर बनाने का यह प्रयास अनुकरणीय है।
नेशनल गोल्ड मेडलिस्ट हिमांशु देते हैं दौड़ के गुर
गजरौला। रमाबाई अंबेडकर कॉलेज के मैदान को दुरुस्त करने में लगे युवाओं को दौड़ने का सही तरीका समझाने के लिए हिमांशु भड़ाना आगे आए हैं। हिमांशु आठ सौ मीटर दौड़ में राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल प्राप्त कर चुके हैं। यह प्रतियोगिता 27 फरवरी 2021 को राजस्थान में हुई थी। उन्होंने कहा कि फौज या अन्य सुरक्षा बलों की सेवा के लिए खुद को तैयार करने में लगे युवाओं के जज्बे को देखकर ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया। पूर्व में ऐसे अभ्यास से चार युवक फौज में भर्ती होने में कामयाबी हासिल कर चुके हैं। संवाद
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मंडी धनौरा क्षेत्र के शाहपुर तिगरी, हसनपुर क्षेत्र के चौकूनी, रझौहा, हींसखेड़ा, सिरसा गुर्जर, ढबारसी, गजरौला, संभल के ऊधनपुर, परतापुर समेत नजदीकी गांवों के काफी युवा गजरौला में रह कर पढ़ाई के साथ खुद को नौकरी के लिए तैयार कर रहे हैं। इनमें से कई का सपना सेना, अर्द्ध सैनिक बल या पुलिस सेवा में जाने का है। इन्हें अंदाजा है कि इसके लिए पढ़ाई जितनी जरूरी है, उतनी ही फिटनेस। लेकिन फिटनेस के लिए इन्हें फिट मैदान या ट्रैक मुहैया नहीं है। लिहाजा अपने भविष्य की राह मजबूत करने के लिए इन्होंने खुद के श्रम से दौड़ का ट्रैक तैयार करने की ठानी है।
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रमाबाई अंबेडकर महाविद्यालय के मैदान में ये घंटों फावड़ा चलाकर जमीन को समतल कर रहे हैं। इनमें शामिल कपिल नागर, पवन, लविश रावल, हैदर, शिवम उपाध्याय, रोहित नागर, यतिन भाटी, ताहिर आदि का कहना है कि पढ़ाई के बाद का समय खेल के मैदान को दुरुस्त करने में लगाना भी एक तरह की कसरत है। उनकी इस कोशिश का लाभ अन्य युवाओं को भी मिलेगा तो उनकी खुशी और बढ़ जाएगी।
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महाविद्यालय के क्रीड़ा अधिकारी डा.अजय कुमार भी युवाओं की इस टोली के प्रयासों से प्रभावित हैं। वह कहते हैं कि हर चीज के लिए सिस्टम पर निर्भर रहने की बजाय खुद के श्रम से स्थान को बेहतर बनाने का यह प्रयास अनुकरणीय है।
नेशनल गोल्ड मेडलिस्ट हिमांशु देते हैं दौड़ के गुर
गजरौला। रमाबाई अंबेडकर कॉलेज के मैदान को दुरुस्त करने में लगे युवाओं को दौड़ने का सही तरीका समझाने के लिए हिमांशु भड़ाना आगे आए हैं। हिमांशु आठ सौ मीटर दौड़ में राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल प्राप्त कर चुके हैं। यह प्रतियोगिता 27 फरवरी 2021 को राजस्थान में हुई थी। उन्होंने कहा कि फौज या अन्य सुरक्षा बलों की सेवा के लिए खुद को तैयार करने में लगे युवाओं के जज्बे को देखकर ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया। पूर्व में ऐसे अभ्यास से चार युवक फौज में भर्ती होने में कामयाबी हासिल कर चुके हैं। संवाद