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मोहर्रम : अजाखानों में लगाए काले अलम
Fri, 27 Jun 2025 01:52 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Fri, 27 Jun 2025 01:52 AM IST
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अमरोहा। बृहस्पतिवार को माहे मोहर्रम का चांद दिखते ही शिया समुदाय गम में डूब गया। अजाखानों में शोक के प्रतीक काले अलम लगा दिए गए। अजादारी का सिलसिला शुरू होते ही फिजा में या हुसैन-या-हुसैन की सदाएं गूंजने लगीं।
लगभग 1400 साल पूर्व इराक के शहर कर्बला में यजीद की फौज ने इस्लामिक कैलेंडर के इसी महीने की एक से दस तारीख तक नवासा-ए-रसूल इमाम हुसैन समेत उनके काफिले में शामिल 72 लोगों को भूख-प्यास की शिद्दत के बीच शहीद किया था। तभी से हर साल मोहर्रम के महीने में इमाम हुसैन की शहादत का गम मनाया जाता है।
बृहस्पतिवार को माहे मोहर्रम का चांद दिखते ही शिया समुदाय में शोक शुरू हो गया। अजाखानों में काले अलम लगाने के बाद कहीं ढोल-ताशों तो कहीं नौबत बजने से फिजा गमगीन हो गई। इसके साथ ही देर रात तक विभिन्न अजाखानों में मजलिस और मातम का सिलसिला शुरू हो गया। सोज-ओ-सलाम पेश किए गए। वहीं, घरों में महिलाओं ने भी मातम किया।
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अंजुमन रजाकराने हुसैनी के काईद गुलाम सज्जाद ने तीन मोहर्रम रविवार को निकलने वाले पहले मातमी जुलूस की तैयारियां पूरी होने की बात कही।
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लगभग 1400 साल पूर्व इराक के शहर कर्बला में यजीद की फौज ने इस्लामिक कैलेंडर के इसी महीने की एक से दस तारीख तक नवासा-ए-रसूल इमाम हुसैन समेत उनके काफिले में शामिल 72 लोगों को भूख-प्यास की शिद्दत के बीच शहीद किया था। तभी से हर साल मोहर्रम के महीने में इमाम हुसैन की शहादत का गम मनाया जाता है।
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बृहस्पतिवार को माहे मोहर्रम का चांद दिखते ही शिया समुदाय में शोक शुरू हो गया। अजाखानों में काले अलम लगाने के बाद कहीं ढोल-ताशों तो कहीं नौबत बजने से फिजा गमगीन हो गई। इसके साथ ही देर रात तक विभिन्न अजाखानों में मजलिस और मातम का सिलसिला शुरू हो गया। सोज-ओ-सलाम पेश किए गए। वहीं, घरों में महिलाओं ने भी मातम किया।
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अंजुमन रजाकराने हुसैनी के काईद गुलाम सज्जाद ने तीन मोहर्रम रविवार को निकलने वाले पहले मातमी जुलूस की तैयारियां पूरी होने की बात कही।