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मोह माया के चक्कर में प्रभु को भूल रहा मनुष्य : कविचंद्र
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मंडी धनौरा (अमरोहा)।
कथाव्यास कविचंद्र दास ने कहा है कि मनुष्य मोह माया के चक्कर में प्रभु का स्मरण करना भूल गया है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में मोह-माया के भ्रम को ही दूर किया है। वह आनंद धाम आश्रम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन प्रवचन कर रहे थे।
कथाव्यास ने कहा, भगवान अपने भक्तों की संकट के समय तत्काल रक्षा करते हैं। गजेंद्र मोक्ष का वर्णन करते हुए कथाव्यास ने कहा कि भगवान के भक्त गजेंद्र नामक हाथी का पांव मगरमच्छ ने पकड़ लिया और काफी प्रयास के बाद भी उसके चंगुल से मुक्त नहीं होने पर गजेंद्र ने भगवान नारायण को पुकारा। उसी समय भगवान नारायण भक्त की रक्षा करने वहां पहुंचे और चक्र से मगरमच्छ का वध किया। कथा में इंद्र के अभिमान के मर्दन का भी वर्णन किया गया। कथा में गोवर्धन पूजा की गई। इस अवसर पर सुजीत गर्ग, हरिओम, गीता अग्रवाल, रोेहित, राकेश अग्रवाल, रेनू अग्रवाल आदि मौजूद थे।
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कथाव्यास कविचंद्र दास ने कहा है कि मनुष्य मोह माया के चक्कर में प्रभु का स्मरण करना भूल गया है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में मोह-माया के भ्रम को ही दूर किया है। वह आनंद धाम आश्रम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन प्रवचन कर रहे थे।
कथाव्यास ने कहा, भगवान अपने भक्तों की संकट के समय तत्काल रक्षा करते हैं। गजेंद्र मोक्ष का वर्णन करते हुए कथाव्यास ने कहा कि भगवान के भक्त गजेंद्र नामक हाथी का पांव मगरमच्छ ने पकड़ लिया और काफी प्रयास के बाद भी उसके चंगुल से मुक्त नहीं होने पर गजेंद्र ने भगवान नारायण को पुकारा। उसी समय भगवान नारायण भक्त की रक्षा करने वहां पहुंचे और चक्र से मगरमच्छ का वध किया। कथा में इंद्र के अभिमान के मर्दन का भी वर्णन किया गया। कथा में गोवर्धन पूजा की गई। इस अवसर पर सुजीत गर्ग, हरिओम, गीता अग्रवाल, रोेहित, राकेश अग्रवाल, रेनू अग्रवाल आदि मौजूद थे।
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