{"_id":"5a1489994f1c1bca678bcd78","slug":"increment-the-number-of-patients-due-to-pollution","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रदूषण से बढ़े श्वास के मरीज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रदूषण से बढ़े श्वास के मरीज
ब्यूरो अमर उजाला /गजरौला।
Updated Wed, 22 Nov 2017 01:46 AM IST
विज्ञापन
गजरौला की औद्योगिक इकाइयों से निकलता धुंआ।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
बदलते मौसम से वातावरण में धुएं और प्रदूषण की मात्रा बढ़ी है। ऐसे में लोगों को दिक्कत हो रही है। नगर क्षेत्र में रोजाना करीब 10 से 15 फीसद श्वास रोगी क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिसीस (सीओपीडी) का शिकार हो रहे हैं। गजरौला क्षेत्र के नौजवानों को समय से पहले ही यह बीमारी अपनी चपेट में ले रही है।
अधिक धूम्रपान व वायु प्रदूषण से यह रोग होता है। मौजूदा समय में सीओपीडी का कोई स्थाई उपचार नहीं है। नियमित दवाओं के सेवन या जीवन शैली में बदलाव कर इस बीमारी को नियंत्रण में किया जा सकता है। एनसीआर व गजरौला क्षेत्र में आजकल पर्यावरण में फैली धुंध भी लोगों के लिए घातक साबित हो रही है। जानकारों का मानना है कि स्मॉग से ज्यादातर लोग सीओपीडी की चपेट में पहुंच रहे हैं। यह स्थिति बहुत ही घातक होती जा रही है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में करीब तीन करोड़ लोग इस बीमारी की चपेट में हैं। हर साल करीब पांच लाख लोगों की मौत इसी बीमारी के कारण हो जाती है। गजरौला सीएचसी में रोजाना दस से पंद्रह मरीज सीओपीडी के पहुंच रहे हैं। जिसका मुख्य कारण बढ़ता हुआ प्रदूषण व धूम्रपान है। नगर में स्थित सामूदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रोजाना दस से पंद्रह मरीज सीओपीडी का शिकार पहुंच रहे हैं। खास बात यह है कि इस बीमारी का पता ज्यादातर मामलों में 40 वर्ष की उम्र के बाद चलता है। अधिक धूम्रपान व महिलाओं का चूल्हे पर खाना बनाने की वजह से भी सीओपीडी की चपेट में लोग पहुंच रहे हैं। गंभीर स्थिति में ऑक्सीजन एवं वेंटीलेटर की जरूरत भी पड़ सकती है।
अधिक धूम्रपान व वायु प्रदूषण से यह रोग होता है। मौजूदा समय में सीओपीडी का कोई स्थाई उपचार नहीं है। नियमित दवाओं के सेवन या जीवन शैली में बदलाव कर इस बीमारी को नियंत्रण में किया जा सकता है। एनसीआर व गजरौला क्षेत्र में आजकल पर्यावरण में फैली धुंध भी लोगों के लिए घातक साबित हो रही है। जानकारों का मानना है कि स्मॉग से ज्यादातर लोग सीओपीडी की चपेट में पहुंच रहे हैं। यह स्थिति बहुत ही घातक होती जा रही है।
विज्ञापन
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में करीब तीन करोड़ लोग इस बीमारी की चपेट में हैं। हर साल करीब पांच लाख लोगों की मौत इसी बीमारी के कारण हो जाती है। गजरौला सीएचसी में रोजाना दस से पंद्रह मरीज सीओपीडी के पहुंच रहे हैं। जिसका मुख्य कारण बढ़ता हुआ प्रदूषण व धूम्रपान है। नगर में स्थित सामूदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रोजाना दस से पंद्रह मरीज सीओपीडी का शिकार पहुंच रहे हैं। खास बात यह है कि इस बीमारी का पता ज्यादातर मामलों में 40 वर्ष की उम्र के बाद चलता है। अधिक धूम्रपान व महिलाओं का चूल्हे पर खाना बनाने की वजह से भी सीओपीडी की चपेट में लोग पहुंच रहे हैं। गंभीर स्थिति में ऑक्सीजन एवं वेंटीलेटर की जरूरत भी पड़ सकती है।
विज्ञापन