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Amroha News: मौलाना नकवी के इंतकाल से अमरोहा की गंगा-जमुनी तहजीब को क्षति
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अमरोहा। शिया धर्मगुरु और शहर इमाम मौलाना डॉ. सैय्यद मोहम्मद सियादत नकवी के इंतकाल पर मुस्लिम कमेटी अमरोहा की ओर से मोहल्ला कोट स्थित कमेटी के सरपरस्त हाजी मंसूर अहमद एडवोकेट के आवास पर शोकसभा हुई। हाजी सैय्यद खुर्शीद अनवर की अध्यक्षता में हुई सभा में मौलाना की दीनी, इल्मी और सामाजिक सेवाओं को याद कर दुख जताया गया।
हाजी मंसूर अहमद एडवोकेट ने बताया कि इमाम पिछले कुछ दिनों से बीमार थे और दिल्ली के एस्कॉर्ट अस्पताल में उपचाराधीन थे। कमेटी पदाधिकारियों ने उनके बेटे मौलाना डॉ. सैय्यद एहसन अख्तर सरोश से मुलाकात कर ताजियत की और मरहूम के लिए मगफिरत की दुआ की।
वक्ताओं ने कहा कि मौलाना सियादत नकवी अमन पसंद इंसान और अमरोहा की गंगा-जमुनी तहजीब के अलमबरदार थे। उनकी कमी हमेशा महसूस की जाएगी। छह नवंबर 1942 को अमरोहा में जन्मे मौलाना ने जीवनभर इल्म, अमन और भाईचारे को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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अंत में मरहूम इमाम साहब की मगफिरत और शोक संतप्त परिवार को गम सहने की ताकत देने की दुआ की गई। इस दौरान हाजी सैय्यद खुर्शीद अनवर, हाजी मंसूर अहमद एडवोकेट, सरताज आलम मंसूरी, सैय्यद उवैस रिजवी अमरोहवी, फैज आलम राईनी, सैय्यद अली इमाम रिजवी एडवोकेट मौजूद रहे। संवाद
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हाजी मंसूर अहमद एडवोकेट ने बताया कि इमाम पिछले कुछ दिनों से बीमार थे और दिल्ली के एस्कॉर्ट अस्पताल में उपचाराधीन थे। कमेटी पदाधिकारियों ने उनके बेटे मौलाना डॉ. सैय्यद एहसन अख्तर सरोश से मुलाकात कर ताजियत की और मरहूम के लिए मगफिरत की दुआ की।
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वक्ताओं ने कहा कि मौलाना सियादत नकवी अमन पसंद इंसान और अमरोहा की गंगा-जमुनी तहजीब के अलमबरदार थे। उनकी कमी हमेशा महसूस की जाएगी। छह नवंबर 1942 को अमरोहा में जन्मे मौलाना ने जीवनभर इल्म, अमन और भाईचारे को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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अंत में मरहूम इमाम साहब की मगफिरत और शोक संतप्त परिवार को गम सहने की ताकत देने की दुआ की गई। इस दौरान हाजी सैय्यद खुर्शीद अनवर, हाजी मंसूर अहमद एडवोकेट, सरताज आलम मंसूरी, सैय्यद उवैस रिजवी अमरोहवी, फैज आलम राईनी, सैय्यद अली इमाम रिजवी एडवोकेट मौजूद रहे। संवाद