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Amroha News: किस तरह उजड़ा था ख्वाबों का सफर याद नहीं...
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अमरोहा। अंजुमन याद गारे बका की ओर से एक गजल की महफिल नगर के मोहल्ला सरायं कोहना पर आयोजित हुई। जिसमें शायरों ने अपने-अपने कलाम पेश करके खूब दाद हासिल की।
मरहूम मोहम्मद अहमद बका के मकान पर आयोजित गजल महफिल की शुरुआत नाते पाक से हुई। अध्यक्षता अहमद रजा फराज ने और संचालन युवा शायर सैयद शिबान कादरी ने किया। शायरों ने अपने-अपने कलाम पेश किए। अहमद रजा फराज ने कहा...किस तरह उजड़ा था ख्वाबों का सफर याद नहीं, मैं तो कहता हूं के अच्छा है अगर याद नहीं। शहाब अनवर ने यू कहा...तलवार से क्या होगा शमशीर से क्या होगा, दीवाना है दीवाना जंजीर से क्या होगा। सैयद शिबान कादरी ने ऐसे कहा...मुद्दतों बाद पुकारा मेरी वहशत ने मुझे, मुद्दतों बाद मैं सहरा में नजर आया हूँ। नासिर अमरोहवी कुछ इस तरह से कहा...दुनिया की मोहब्बत में गिरफ्तार हैं हम लोग, दुनिया किसी दुरवेश के पैरों में पड़ी है। अशरफ फराज ने पढ़ा...सरे सेहरा किसी मजनू ने कहा था मुझसे, खाक उड़ाना नहीं आता है तो आते क्यों हो।
इनके अलावा नाजिम हुसैन आरिफ, शानदार अमरोहवी, सामी अमरोहवी आदि ने भी अपने-अपने कलाम पेश किए। आखिर में गुलरेज आरिफ ने सभी का शुक्रिया अदा किया। महफिल में इकराम हुसैन जैदी, तोहीद अख्तर आदि मौजूद रहे।
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मरहूम मोहम्मद अहमद बका के मकान पर आयोजित गजल महफिल की शुरुआत नाते पाक से हुई। अध्यक्षता अहमद रजा फराज ने और संचालन युवा शायर सैयद शिबान कादरी ने किया। शायरों ने अपने-अपने कलाम पेश किए। अहमद रजा फराज ने कहा...किस तरह उजड़ा था ख्वाबों का सफर याद नहीं, मैं तो कहता हूं के अच्छा है अगर याद नहीं। शहाब अनवर ने यू कहा...तलवार से क्या होगा शमशीर से क्या होगा, दीवाना है दीवाना जंजीर से क्या होगा। सैयद शिबान कादरी ने ऐसे कहा...मुद्दतों बाद पुकारा मेरी वहशत ने मुझे, मुद्दतों बाद मैं सहरा में नजर आया हूँ। नासिर अमरोहवी कुछ इस तरह से कहा...दुनिया की मोहब्बत में गिरफ्तार हैं हम लोग, दुनिया किसी दुरवेश के पैरों में पड़ी है। अशरफ फराज ने पढ़ा...सरे सेहरा किसी मजनू ने कहा था मुझसे, खाक उड़ाना नहीं आता है तो आते क्यों हो।
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इनके अलावा नाजिम हुसैन आरिफ, शानदार अमरोहवी, सामी अमरोहवी आदि ने भी अपने-अपने कलाम पेश किए। आखिर में गुलरेज आरिफ ने सभी का शुक्रिया अदा किया। महफिल में इकराम हुसैन जैदी, तोहीद अख्तर आदि मौजूद रहे।
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