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Amroha News: धरने के 365 दिन..चार गांव के किसान परेशान, नहीं निकला समाधान
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रजबपुर(अमरोहा)। मध्य गंगा नहर के लिए अधिग्रहित की गई जमीन का चार गुना मुआवजे की मांग को लेकर चार गांव के किसानों के आंदोलन को एक साल हो गया है। किसानों ने एक साल में गर्मी, सर्दी और बरसात का मौसम झेला। यहां तक कि किसानों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच कई बार टकराव की स्थिति बनी। लेकिन, किसान अभी भी खाली हाथ हैं।
सालभर में आए सभी त्योहारों को आंदोलनरत किसानों ने धरनास्थल पर ही मनाया। अब 365 दिन के बाद भी किसान अनिश्चितकालीन धरने पर डटे हैं। किसानों की मांग शासन तक गूंजी, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका। पूरे जिले में मध्य गंगा नहर का काम पूरा हो चुका है लेकिन चार गांव कूबी, रामपुर घनां व मोहनपुर और घंसूरपुर के जंगल में अभी तक लटका है। प्रयासों के बाद भी अधिकारी किसानों को मनाने में कामयाब नहीं हो पा रहे है। किसानों का कहना है कि जमीन प्रशासन ने वर्ष 2011 में अधिग्रहण कर ली थी लेकिन, उस समय किसी को मुआवजा नहीं दिया था।
अब जमीन की कीमत काफी अधिक हो गई है। प्रशासन उनको पुराने सर्किल रेट से ही जमीन के दाम दे रहा है। किसान उस पर बिल्कुल सहमत नहीं हैं और वह मौजूदा सर्किल रेट के हिसाब से चार गुना मुआवजा दिया जाए। नहर किनारे तंबू लगाकर किसान बैठे हुए हैं। किसानों ने उचित मुआवजा नहीं मिलने तक धरने पर रहने की चेतावनी दी है। किसी भी तरह का निर्माण नहीं होने देंगे चाहे अंजाम कुछ भी हो। किसानों के बीच पहुंचकर, एसडीएम, तहसीलदार व तमाम अधिकारियों ने किसानों को समझाने की कोशिश की थी।
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महिलाओं और किसानों ने धरनास्थल पर मनाएं सभी त्योहार
रजबपुर। एक साल के आंदोलन के बीच किसानों को कई उतराव-चढ़ाव देखने को मिले। कड़ाके की ठंड में भी किसान धरने पर डटे रहे। झमाझम बारिश के दौरान भी किसान पीछे नहीं हटे। आंदोलन में शामिल महिलाओं ने धरनास्थल पर ही करवाचौथ का पर्व मनाया। दिन भर कथा का पाठ कर शाम को व्रत खोला और पति की लंबी उम्र की कामना की थी। नौ दिन तक चलने वाले नवरात्र भी महिलाओं ने धरनास्थल पर पूरे किए। यहीं पर माता की चौकी तैयार कर पूजा अर्चना की थी। नवरात्र पूजन ही नहीं दशहरा, धनतेरस और दिवाली भी धरना स्थल पर मनाई गई।
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...जब किसान और प्रशासन के बीच हुआ टकराव
रजबपुर। विरोध के बाद भी 30 अक्तूबर 2023 को मध्य गंगा नहर की खोदाई शुरू होने से ग्रामीणों और किसानों का गुस्सा फूट पड़ा था। खोदाई करवाने के लिए पहुंचे अधिकारियों से किसान भिड़ गए थे। किसान और अधिकारियों के बीच खींचतान हुई। महिलाएं खोदाई के लिए मंगाई गई जेसीबी के आगे लेट गई थीं। एक महिला व किशोरी चोटिल हो गईं। आक्रोशित किसानों ने प्रशासनिक अधिकारियों के सामने ही डीजल उडे़लकर आग लगाकर जान देने की कोशिश की थी। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारी बैक फुट पर आ गए और तुरंत जेसीबी को वहां से हटा लिया गया था।
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कई बार विफल रही वार्ता
रजबपुर। नहर की खुदाई को लेकर किसान और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच कई बार वार्ता हुई। किसानों ने विधायक, प्रभारी मंत्री, सांसद और राहुल गांधी को भी अपना समस्या से संबंधित ज्ञापन सौंपा। लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ।
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बोले किसान:-
हमारे आंदोलन को एक साल पूरा हो गया है। सभी किसान अपना काम-काज छोड़कर धरने पर बैठे हुए हैं। लेकिन सरकार और प्रशासन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। जनप्रतिनिधि केवल लोग वोट मांगते हैं, उसके बाद किसानों के बीच आना छोड़ देते हैं।- जयपाल सिंह, किसान
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एक साल में किसानों को कितनी कठिनाइयां झेलनी पड़ीं, ये आंदोलन पर बैठे किसान समझ सकते हैं। चाहे सर्दी हो गर्मी हो या बरसात, लेकिन हमारी कोई सुनने को तैयार नहीं है। लेकिन हम अपना हक लेकर रहेंगे।- राजवीर सिंह, किसान
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एक साल में सारे त्योहार यहीं निकल गए हैं। लेकिन जिम्मेदारों के कान पर जूं नहीं चली है। हमारी मांगें जायज हैं। सरकार को मान लेनी चाहिए थीं। सरकार और प्रशासनिक अधिकारी चाहते हैं कि हम अपनी जमीन फ्री में छोड़ दें। लेकिन ऐसा नहीं होगा, इसके लिए अंजाम कुछ हो।- भरतो देवी, किसान
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सरकार ने किसानों को आंदोलन करने के लिए मजबूर किया है। हमारे सभी त्योहार धरना स्थल पर मने। वरना कौन नहीं चाहता कि त्योहार घर पर मनाएं। जब तक हमारी मांग पूरी नहीं होती तब तक आंदोलन जारी रहेगी। चाहे एक वर्ष हो या दो वर्ष हम लगातार धरने पर रहेंगे।- किशन देवी, किसान
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किसानों से लगातार इस संबंध में वार्ता चल रही है। मामला शासन स्तर तक पहुंचा हुआ है। नियमानुसार ही किसानों को मुआवजा दिलाया जा रहा है। उम्मीद है कि अब जल्द ही इस मामले में समझौता हो जाएगा। प्रशासन पूरी तरह किसानों के साथ है। किसानों की पीड़ा को प्रशासन अच्छे से समझता है। सुरेंद्र सिंह, एडीएम वित्त एवं राजस्व।
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सालभर में आए सभी त्योहारों को आंदोलनरत किसानों ने धरनास्थल पर ही मनाया। अब 365 दिन के बाद भी किसान अनिश्चितकालीन धरने पर डटे हैं। किसानों की मांग शासन तक गूंजी, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका। पूरे जिले में मध्य गंगा नहर का काम पूरा हो चुका है लेकिन चार गांव कूबी, रामपुर घनां व मोहनपुर और घंसूरपुर के जंगल में अभी तक लटका है। प्रयासों के बाद भी अधिकारी किसानों को मनाने में कामयाब नहीं हो पा रहे है। किसानों का कहना है कि जमीन प्रशासन ने वर्ष 2011 में अधिग्रहण कर ली थी लेकिन, उस समय किसी को मुआवजा नहीं दिया था।
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अब जमीन की कीमत काफी अधिक हो गई है। प्रशासन उनको पुराने सर्किल रेट से ही जमीन के दाम दे रहा है। किसान उस पर बिल्कुल सहमत नहीं हैं और वह मौजूदा सर्किल रेट के हिसाब से चार गुना मुआवजा दिया जाए। नहर किनारे तंबू लगाकर किसान बैठे हुए हैं। किसानों ने उचित मुआवजा नहीं मिलने तक धरने पर रहने की चेतावनी दी है। किसी भी तरह का निर्माण नहीं होने देंगे चाहे अंजाम कुछ भी हो। किसानों के बीच पहुंचकर, एसडीएम, तहसीलदार व तमाम अधिकारियों ने किसानों को समझाने की कोशिश की थी।
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महिलाओं और किसानों ने धरनास्थल पर मनाएं सभी त्योहार
रजबपुर। एक साल के आंदोलन के बीच किसानों को कई उतराव-चढ़ाव देखने को मिले। कड़ाके की ठंड में भी किसान धरने पर डटे रहे। झमाझम बारिश के दौरान भी किसान पीछे नहीं हटे। आंदोलन में शामिल महिलाओं ने धरनास्थल पर ही करवाचौथ का पर्व मनाया। दिन भर कथा का पाठ कर शाम को व्रत खोला और पति की लंबी उम्र की कामना की थी। नौ दिन तक चलने वाले नवरात्र भी महिलाओं ने धरनास्थल पर पूरे किए। यहीं पर माता की चौकी तैयार कर पूजा अर्चना की थी। नवरात्र पूजन ही नहीं दशहरा, धनतेरस और दिवाली भी धरना स्थल पर मनाई गई।
...जब किसान और प्रशासन के बीच हुआ टकराव
रजबपुर। विरोध के बाद भी 30 अक्तूबर 2023 को मध्य गंगा नहर की खोदाई शुरू होने से ग्रामीणों और किसानों का गुस्सा फूट पड़ा था। खोदाई करवाने के लिए पहुंचे अधिकारियों से किसान भिड़ गए थे। किसान और अधिकारियों के बीच खींचतान हुई। महिलाएं खोदाई के लिए मंगाई गई जेसीबी के आगे लेट गई थीं। एक महिला व किशोरी चोटिल हो गईं। आक्रोशित किसानों ने प्रशासनिक अधिकारियों के सामने ही डीजल उडे़लकर आग लगाकर जान देने की कोशिश की थी। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारी बैक फुट पर आ गए और तुरंत जेसीबी को वहां से हटा लिया गया था।
कई बार विफल रही वार्ता
रजबपुर। नहर की खुदाई को लेकर किसान और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच कई बार वार्ता हुई। किसानों ने विधायक, प्रभारी मंत्री, सांसद और राहुल गांधी को भी अपना समस्या से संबंधित ज्ञापन सौंपा। लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ।
बोले किसान:-
हमारे आंदोलन को एक साल पूरा हो गया है। सभी किसान अपना काम-काज छोड़कर धरने पर बैठे हुए हैं। लेकिन सरकार और प्रशासन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। जनप्रतिनिधि केवल लोग वोट मांगते हैं, उसके बाद किसानों के बीच आना छोड़ देते हैं।- जयपाल सिंह, किसान
एक साल में किसानों को कितनी कठिनाइयां झेलनी पड़ीं, ये आंदोलन पर बैठे किसान समझ सकते हैं। चाहे सर्दी हो गर्मी हो या बरसात, लेकिन हमारी कोई सुनने को तैयार नहीं है। लेकिन हम अपना हक लेकर रहेंगे।- राजवीर सिंह, किसान
एक साल में सारे त्योहार यहीं निकल गए हैं। लेकिन जिम्मेदारों के कान पर जूं नहीं चली है। हमारी मांगें जायज हैं। सरकार को मान लेनी चाहिए थीं। सरकार और प्रशासनिक अधिकारी चाहते हैं कि हम अपनी जमीन फ्री में छोड़ दें। लेकिन ऐसा नहीं होगा, इसके लिए अंजाम कुछ हो।- भरतो देवी, किसान
सरकार ने किसानों को आंदोलन करने के लिए मजबूर किया है। हमारे सभी त्योहार धरना स्थल पर मने। वरना कौन नहीं चाहता कि त्योहार घर पर मनाएं। जब तक हमारी मांग पूरी नहीं होती तब तक आंदोलन जारी रहेगी। चाहे एक वर्ष हो या दो वर्ष हम लगातार धरने पर रहेंगे।- किशन देवी, किसान
किसानों से लगातार इस संबंध में वार्ता चल रही है। मामला शासन स्तर तक पहुंचा हुआ है। नियमानुसार ही किसानों को मुआवजा दिलाया जा रहा है। उम्मीद है कि अब जल्द ही इस मामले में समझौता हो जाएगा। प्रशासन पूरी तरह किसानों के साथ है। किसानों की पीड़ा को प्रशासन अच्छे से समझता है। सुरेंद्र सिंह, एडीएम वित्त एवं राजस्व।