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Amroha News: कनेक्शन काटने के बाद भी बिजली विभाग ने भेजा 1.32 लाख का बिल, निरस्त
Sun, 22 Jun 2025 02:41 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Sun, 22 Jun 2025 02:41 AM IST
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अमरोहा।
घरेलू विद्युत का कनेक्शन काटने के बाद भी बिजली विभाग ने 1.32 लाख रुपये का बिजली का बिल भेज दिया, जबकि किसान पहले ही पूरा भुगतान करके कनेक्शन कटवा चुका था। बिजली अफसरों ने सुनवाई नहीं की तो किसान ने उपभोक्ता फोरम की शरण ली। मामले को गंभीरता से लेकर उपभोक्ता फोरम ने कनेक्शन कटने से बाद के बिल को निरस्त कर दिया है। साथ ही बिजली विभाग को परिवाद व्यय के रूप में तीन हजार रुपये किसान को देने होंगे।
देहात थानाक्षेत्र के मउमय चक गांव निवासी किसान मोहनलाल ने बिजली विभाग से दो किलो वाट का घरेलू कनेक्शन 20 मई 2016 को लिया था। इसके बाद मोहनलाल हर महीने बिजली का बिल का भुगतान करते रहे, लेकिन कोरोना काल में आर्थिक तंगी के चलते वह बिजली का बिल जमा नहीं कर सके। लिहाजा, उन्होंने बिजली विभाग से कनेक्शन को स्थायी रूप से विच्छेदन करने के लिए कहा।
दो जनवरी 2021 को मोहनलाल ने बिजली बिल का बकाया भुगतान कार्यालय में जमा कर दिया। इसके बाद 18 जनवरी 2021 को बिजली विभाग ने कनेक्शन को स्थायी रूप से विच्छेदन कर दिया और मोहनलाल को इसकी रसीद भी दी गई थी। साथ ही बिजली विभाग के अधिकारी मीटर को उतार कर ले गए। लेकिन, बाद में बिजली विभाग के अधिकारियों ने खेल कर दिया।
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आरोप है कि अवैध वसूली के इरादे से 24 सितंबर 2022 को 1,32,512 रुपये का बिल भुगतान करने के लिए नोटिस जारी कर दिया। जिसमें विद्युत कनेक्शन विच्छेदन की तिथि 30 दिसंबर 2021 दर्शाई गई थी। जबकि बिजली विभाग ने विद्युत कनेक्शन 18 जनवरी 2021 को स्थाई रूप से बंद कर दिया था। उन्होंने मामले की शिकायत बिजली अधिकारियों से की तो कोई सुनवाई नहीं हुई। लिहाजा उन्होंने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की शरण ली। उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष रमाशंकर सिंह और महिला सदस्य अंजू रानी दीक्षित ने बिजली विभाग को तलब कर लिया।
किसान को तीन हजार रुपये भी देगा बिजली विभाग
बिजली विभाग ने मीटर में यूनिट स्टोर होने की बात कही। लेकिन, उपभोक्ता फोरम में पेश किए गए कागजों में पुराने मीटर की जांच रिपोर्ट के कॉलम में विद्युत की मात्रा किलोवाट में अंकित नहीं पाई गई और न पुराने मीटर में यूनिट एकत्र होना दर्शाया गया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद उपभोक्ता फोरम ने माना कि बिजली विभाग ने मीटर की जांच रिपोर्ट या स्टोर यूनिट से जुड़ा कोई दस्तावेज दाखिल नहीं किया है। इसलिए 18 जनवरी 2021 के बाद का कोई बकाया किसान से नहीं वसूला जा सकता। लिहाजा, उपभोक्ता फोरम ने विद्युत कनेक्शन विच्छेदन के बाद जारी किया 1.3 लाख रुपये के बिल को निरस्त कर दिया। साथ ही बिजली विभाग को मोहनलाल को वाद व्यय के रूप में तीन हजार रुपये एक महीने के भीतर अदा करने के निर्देश दिए हैं।
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घरेलू विद्युत का कनेक्शन काटने के बाद भी बिजली विभाग ने 1.32 लाख रुपये का बिजली का बिल भेज दिया, जबकि किसान पहले ही पूरा भुगतान करके कनेक्शन कटवा चुका था। बिजली अफसरों ने सुनवाई नहीं की तो किसान ने उपभोक्ता फोरम की शरण ली। मामले को गंभीरता से लेकर उपभोक्ता फोरम ने कनेक्शन कटने से बाद के बिल को निरस्त कर दिया है। साथ ही बिजली विभाग को परिवाद व्यय के रूप में तीन हजार रुपये किसान को देने होंगे।
देहात थानाक्षेत्र के मउमय चक गांव निवासी किसान मोहनलाल ने बिजली विभाग से दो किलो वाट का घरेलू कनेक्शन 20 मई 2016 को लिया था। इसके बाद मोहनलाल हर महीने बिजली का बिल का भुगतान करते रहे, लेकिन कोरोना काल में आर्थिक तंगी के चलते वह बिजली का बिल जमा नहीं कर सके। लिहाजा, उन्होंने बिजली विभाग से कनेक्शन को स्थायी रूप से विच्छेदन करने के लिए कहा।
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दो जनवरी 2021 को मोहनलाल ने बिजली बिल का बकाया भुगतान कार्यालय में जमा कर दिया। इसके बाद 18 जनवरी 2021 को बिजली विभाग ने कनेक्शन को स्थायी रूप से विच्छेदन कर दिया और मोहनलाल को इसकी रसीद भी दी गई थी। साथ ही बिजली विभाग के अधिकारी मीटर को उतार कर ले गए। लेकिन, बाद में बिजली विभाग के अधिकारियों ने खेल कर दिया।
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आरोप है कि अवैध वसूली के इरादे से 24 सितंबर 2022 को 1,32,512 रुपये का बिल भुगतान करने के लिए नोटिस जारी कर दिया। जिसमें विद्युत कनेक्शन विच्छेदन की तिथि 30 दिसंबर 2021 दर्शाई गई थी। जबकि बिजली विभाग ने विद्युत कनेक्शन 18 जनवरी 2021 को स्थाई रूप से बंद कर दिया था। उन्होंने मामले की शिकायत बिजली अधिकारियों से की तो कोई सुनवाई नहीं हुई। लिहाजा उन्होंने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की शरण ली। उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष रमाशंकर सिंह और महिला सदस्य अंजू रानी दीक्षित ने बिजली विभाग को तलब कर लिया।
किसान को तीन हजार रुपये भी देगा बिजली विभाग
बिजली विभाग ने मीटर में यूनिट स्टोर होने की बात कही। लेकिन, उपभोक्ता फोरम में पेश किए गए कागजों में पुराने मीटर की जांच रिपोर्ट के कॉलम में विद्युत की मात्रा किलोवाट में अंकित नहीं पाई गई और न पुराने मीटर में यूनिट एकत्र होना दर्शाया गया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद उपभोक्ता फोरम ने माना कि बिजली विभाग ने मीटर की जांच रिपोर्ट या स्टोर यूनिट से जुड़ा कोई दस्तावेज दाखिल नहीं किया है। इसलिए 18 जनवरी 2021 के बाद का कोई बकाया किसान से नहीं वसूला जा सकता। लिहाजा, उपभोक्ता फोरम ने विद्युत कनेक्शन विच्छेदन के बाद जारी किया 1.3 लाख रुपये के बिल को निरस्त कर दिया। साथ ही बिजली विभाग को मोहनलाल को वाद व्यय के रूप में तीन हजार रुपये एक महीने के भीतर अदा करने के निर्देश दिए हैं।