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कोरोना के डर से टीबी पीड़ित को अस्पताल में छोड़ भाग गए परिजन
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मंडी धनौरा(अमरोहा)। थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी ग्रामीण में कोरोना जैसे लक्षण दिखाई देने पर उसके परिजन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के एक कोने में छोड़ कर भाग गए। काफी देर बाद स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की नजर उस पर गई। उसकी जांच की गई तो वह मर चुका था। शव पड़ा होने की जानकारी होने पर स्वास्थ्यकर्मियों में हड़कंप मच गया। अधीक्षक की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेजा। बाद में पता लगा कि मृतक तपेदिक (टीबी) का रोगी था।
बुधवार की देर शाम दो व्यक्ति अपने साथ लगभग 35 वर्षीय एक ग्रामीण को साथ लेकर आए और उसको अस्पताल के एक कोने में छोड़ कर चले गए। काफी देर तक वह ऐसे ही पड़ा रहा। एक कर्मचारी की नजर उस ओर गई तो उसने अधीक्षक डा. अमोल सिंह को सूचना दी। उसका चेकअप किया गया तो उसकी सांसें थम चुकी थीं। अस्पताल में शव होने की जानकारी मिलते ही हड़कंप मच गया। उसके बारे में जानकार की गई लेकिन किसी के पास इस संबंध में जानकारी नहीं थी। अधीक्षक ने पुलिस को सूचना दी। इसी दौरान एक अस्पतालकर्मी ने मृतक की पहचान की। उसने बताया कि मृतक तपेदिक का रोगी था और उसका अस्पताल में उपचार हो चुका है। पुलिस ने सूचना कर उसके परिजनों को बुलाया और बिना सूचना के शव को छोड़ कर भागने पर जमकर हड़काया। पुलिस की सख्ती पर परिजनों ने बताया कि मृतक को बुखार व खांसी थी और सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। कोरोना लक्षण के डर से वे उसे छोड़कर भाग खड़े हुए थे। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
मृतक अस्पताल के रिकार्ड के अनुसार 2017 से टीबी का रोगी था। उसका धनौरा के ही अस्पताल में उपचार कराया गया था। लेकिन उसने टीबी का उपचार सही तरीके व लगातार नहीं कराया था। टीबी का रोगी होने व उसकी शारीरिक हालत को देखते हुए कोरोना की जांच नहीं कराई गई।
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डा. अमोल सिंह, अधीक्षक, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र
उसके परिजनों को सिर्फ कानूनी कार्रवाई पूरी करने के लिए बुलाया था। कोरोना आदि के संबंध में उनसे कोई बात नहीं हुई है। अस्पताल में आए दो लोग उसके परिवार से संबंधित थे।
विपिन कुमार, इंचार्ज, शेरपुर पुलिस चौकी
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बुधवार की देर शाम दो व्यक्ति अपने साथ लगभग 35 वर्षीय एक ग्रामीण को साथ लेकर आए और उसको अस्पताल के एक कोने में छोड़ कर चले गए। काफी देर तक वह ऐसे ही पड़ा रहा। एक कर्मचारी की नजर उस ओर गई तो उसने अधीक्षक डा. अमोल सिंह को सूचना दी। उसका चेकअप किया गया तो उसकी सांसें थम चुकी थीं। अस्पताल में शव होने की जानकारी मिलते ही हड़कंप मच गया। उसके बारे में जानकार की गई लेकिन किसी के पास इस संबंध में जानकारी नहीं थी। अधीक्षक ने पुलिस को सूचना दी। इसी दौरान एक अस्पतालकर्मी ने मृतक की पहचान की। उसने बताया कि मृतक तपेदिक का रोगी था और उसका अस्पताल में उपचार हो चुका है। पुलिस ने सूचना कर उसके परिजनों को बुलाया और बिना सूचना के शव को छोड़ कर भागने पर जमकर हड़काया। पुलिस की सख्ती पर परिजनों ने बताया कि मृतक को बुखार व खांसी थी और सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। कोरोना लक्षण के डर से वे उसे छोड़कर भाग खड़े हुए थे। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
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मृतक अस्पताल के रिकार्ड के अनुसार 2017 से टीबी का रोगी था। उसका धनौरा के ही अस्पताल में उपचार कराया गया था। लेकिन उसने टीबी का उपचार सही तरीके व लगातार नहीं कराया था। टीबी का रोगी होने व उसकी शारीरिक हालत को देखते हुए कोरोना की जांच नहीं कराई गई।
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डा. अमोल सिंह, अधीक्षक, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र
उसके परिजनों को सिर्फ कानूनी कार्रवाई पूरी करने के लिए बुलाया था। कोरोना आदि के संबंध में उनसे कोई बात नहीं हुई है। अस्पताल में आए दो लोग उसके परिवार से संबंधित थे।
विपिन कुमार, इंचार्ज, शेरपुर पुलिस चौकी