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मारपीट के दोषी को दस माह की परिवीक्षा पर किया रिहा
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तीस साल तक चले मारपीट के मुकदमे में न्यायालय ने दोषी को दस माह के परिवीक्षा पर रिहा किया है। साथ ही 25 हजार रुपये के बंधपत्र और उतनी ही धनराशि के दो जमानतियों के प्रपत्र दाखिल कराए गए हैं। अदालत ने यह भी आदेश किया कि यदि दोषी के गलत आचरण की शिकायत मिली तो उसे तलब कर कारावास से दंडित किया जाएगा।
यह घटना 17 अगस्त 1992 को हसनपुर कोतवाली क्षेत्र के दीपपुर गांव में हुई थी। यहां पर बीरवल और अतर सिंह के परिवार रहते हैं। घटना वाले दिन कहासुनी के बाद बीरवल ने अतर सिंह की पत्नी जगवती के साथ मारपीट कर दी थी। इस दौरान पथराव भी हुआ था। पत्थर लगने से जगवती की नाक की हड्डी टूट गई थी। इस मामले में अतर सिंह की तहरीर पर पुलिस ने बीरवल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जेल भेज दिया था। जिसके बाद बीरवल जमानत पर बाहर आ गया था। यह मुकदमा हसनपुर की सिविल जज जूनियर डिविजन विभव चंद्रा की अदालत में विचाराधीन था। घटना के 30 साल बाद मंगलवार को न्यायालय ने मुकदमे में सुनवाई की। अभियोजन पक्ष की तरफ से सहायक अभियोजन अधिकारी कौशल किशोर सिंह ने पैरवी की। साक्ष्य के आधार पर न्यायालय ने बीरवल को दोषी करार दिया। इस समय दोषी बीरवल की उम्र 60 वर्ष से अधिक हो चुकी है, बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने अपना तर्क रखा। दोनों पक्षों की दलीलों को ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने परिवीक्षा अधिनियम 1958 की धारा 4 के आधार पर दोषी बीरवल को 25 हजार रुपये के बंधक पत्र और इतनी ही धनराशि के दो जमानतियों के प्रपत्र के आधार पर रिहा कर दिया है। दस माह की परिवीक्षा के दौरान गलत आचरण की शिकायत मिलने पर कारावास से दंडित करने की चेतावनी दी है। साथ ही पीड़िता को तीन हजार रुपये की क्षतिपूर्ति देने के आदेश दिए। अभियोजन अधिकारी ने बताया कि दोषी बीरबल को परिवीक्षा अवधि में जिला प्रोबेशन अधिकारी के यहां नियम अनुसार उपस्थित होना होगा।
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यह घटना 17 अगस्त 1992 को हसनपुर कोतवाली क्षेत्र के दीपपुर गांव में हुई थी। यहां पर बीरवल और अतर सिंह के परिवार रहते हैं। घटना वाले दिन कहासुनी के बाद बीरवल ने अतर सिंह की पत्नी जगवती के साथ मारपीट कर दी थी। इस दौरान पथराव भी हुआ था। पत्थर लगने से जगवती की नाक की हड्डी टूट गई थी। इस मामले में अतर सिंह की तहरीर पर पुलिस ने बीरवल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जेल भेज दिया था। जिसके बाद बीरवल जमानत पर बाहर आ गया था। यह मुकदमा हसनपुर की सिविल जज जूनियर डिविजन विभव चंद्रा की अदालत में विचाराधीन था। घटना के 30 साल बाद मंगलवार को न्यायालय ने मुकदमे में सुनवाई की। अभियोजन पक्ष की तरफ से सहायक अभियोजन अधिकारी कौशल किशोर सिंह ने पैरवी की। साक्ष्य के आधार पर न्यायालय ने बीरवल को दोषी करार दिया। इस समय दोषी बीरवल की उम्र 60 वर्ष से अधिक हो चुकी है, बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने अपना तर्क रखा। दोनों पक्षों की दलीलों को ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने परिवीक्षा अधिनियम 1958 की धारा 4 के आधार पर दोषी बीरवल को 25 हजार रुपये के बंधक पत्र और इतनी ही धनराशि के दो जमानतियों के प्रपत्र के आधार पर रिहा कर दिया है। दस माह की परिवीक्षा के दौरान गलत आचरण की शिकायत मिलने पर कारावास से दंडित करने की चेतावनी दी है। साथ ही पीड़िता को तीन हजार रुपये की क्षतिपूर्ति देने के आदेश दिए। अभियोजन अधिकारी ने बताया कि दोषी बीरबल को परिवीक्षा अवधि में जिला प्रोबेशन अधिकारी के यहां नियम अनुसार उपस्थित होना होगा।
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