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कर्जमाफी की शिकायतें बढ़कर पहुंचीं चार हजार
ब्यूरो अमर उजाला/गजरौला।
Updated Sun, 24 Jun 2018 01:24 AM IST
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पिछले एक साल से फसल ऋण मोचन योजना के तहत किसानों की कर्जमाफी चल रही है लेकिन, अभी तक काफी पात्र किसान योजना से बाहर हैं। पोर्टल बंद होने की तारीख तक 4 हजार शिकायतें दर्ज कराई जा चुकी है। किसानों को अब भी अपने अपने कर्ज माफ होने की उम्मीद है।
लघु और सीमांत किसानों की कर्जमाफी के लिए प्रदेश सरकार ने ऋण मोचन योजना लागू की। खैर इसमें काम भी हुआ लेकिन, तमाम किसान संतुष्ट नहीं हो पाए हैं। खुद को पात्र बताते हुए किसानों ने पंद्रह जून तक चार हजार और शिकायतें दर्ज करा दी। चार शिकायतें केवल एक जून से पंद्रह जून तक ही दर्ज होने वाली है। जून से पहले की शिकायतों का निपटा लिया गया है। सूत्रों की मानें तो अगर पोर्टल फिर से खुल जाए तो आंकड़ा चार हजार से कहीं ज्यादा बढ़ जाएगा। क्योंकि किसानों को अभी अपने अपने कर्ज माफ होने की उम्मीद है। इसलिए ही पोर्टल पर खुद को पात्र बताते हुए कर्ज माफ करने की मांग उठाई।
चार शिकायतों पर जांच चल रही है। बैंक और राजस्व विभाग अपने अपने स्तर पर इनकी जांच कर रहा है। इसमें जितने भी पात्र किसान पाए जाएंगे, उनका ही कर्ज माफ हो सकेगा। सूत्रों की माने तो तीस जून तक कर्जमाफी का चैप्टर ही क्लोज कर दिया जाएगा। शासन की मंशा है कि जितना भी माफ हो चुका है, यही ठीक है। योजना को लंबा खींचने से किसानों के जेहन में कर्जमाफी बनी हुई। जिससे सरकार की किरकिरी हो जाएगी।
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लघु और सीमांत किसानों की कर्जमाफी के लिए प्रदेश सरकार ने ऋण मोचन योजना लागू की। खैर इसमें काम भी हुआ लेकिन, तमाम किसान संतुष्ट नहीं हो पाए हैं। खुद को पात्र बताते हुए किसानों ने पंद्रह जून तक चार हजार और शिकायतें दर्ज करा दी। चार शिकायतें केवल एक जून से पंद्रह जून तक ही दर्ज होने वाली है। जून से पहले की शिकायतों का निपटा लिया गया है। सूत्रों की मानें तो अगर पोर्टल फिर से खुल जाए तो आंकड़ा चार हजार से कहीं ज्यादा बढ़ जाएगा। क्योंकि किसानों को अभी अपने अपने कर्ज माफ होने की उम्मीद है। इसलिए ही पोर्टल पर खुद को पात्र बताते हुए कर्ज माफ करने की मांग उठाई।
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चार शिकायतों पर जांच चल रही है। बैंक और राजस्व विभाग अपने अपने स्तर पर इनकी जांच कर रहा है। इसमें जितने भी पात्र किसान पाए जाएंगे, उनका ही कर्ज माफ हो सकेगा। सूत्रों की माने तो तीस जून तक कर्जमाफी का चैप्टर ही क्लोज कर दिया जाएगा। शासन की मंशा है कि जितना भी माफ हो चुका है, यही ठीक है। योजना को लंबा खींचने से किसानों के जेहन में कर्जमाफी बनी हुई। जिससे सरकार की किरकिरी हो जाएगी।
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