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कारोबारियों ने वर्कर्स के खाते में डाल दी साल भर की सैलरी
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Fri, 25 Nov 2016 12:21 AM IST
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- फोटो : सोशल मीडिया
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नोटबंदी के बाद कारोबारियों ने करोड़ों की रकम खपाने के लिए मजदूरों की सैलरियां खातों में भेज दी हैं। यह एक माह की नहीं बल्कि साल भर तक की है। अचानक खातों में आई बड़ी धनराशि देखकर मजदूर भी सन्न हैं। अब कारोबारी उनको बता रहे हैं कि आपकी पूरे वर्ष की तनख्वाह दे दी है। सूत्रों की मानें तो अधिकांश खाते जनधन योजना के तहत खुले हैं। सैलरी की रकम उनमें ही डाली गई है। बहरहाल खातों में आई लाखों की धनराशि की सच्चाई क्या है, ये तो जांच के बाद ही साफ होगी।
केंद्र सरकार द्वारा 500 व 1000 के नोट बंद किए जाने के बाद कारोबारियों के पास मौजूद लाखों व करोड़ों की धनराशि शक के दायरे में आ रही थी, लेकिन उन्होंने अपने इस काले धन को ठिकाने लगाने का फार्मूला भी खोज निकाला। जिन मजदूरों की महीने भर की तनख्वाह देने में उनको दिक्कत होती थी, अब उनके ही खातों में साल भर तक की सैलरी भेज दी है। सूत्रों की बात पर भरोसा करें तो जनपद के कई कारोबारियों ने मजदूरों के खातों में महीना निपटने से पहले ही इस बार सैलरी भिजवा दी। 500 व 1000 के नोट खातों में डलवा दिए।
इतना ही नहीं कुछ फैक्ट्री के मालिकों ने साल भर तक की सैलरी का पेमेंट मजदूरों को कर अपने काले धन को सफेद कर दिया है। जिन मजदूरों को तनख्वाह का भुगतान हुआ है, उन्होंने अपने खाते जनधन योजना के तहत खुलवा रखे थे। सूत्रों के मुताबिक प्रथमा बैंक में खुले जनधन के खातों में आए एक से दो लाख रुपये पहुंचे हैं, यह मजदूरों की सैलरी हो सकती है। इस बिंदु पर बैंक अधिकारियों ने विचार चालू कर दिया है। उच्चाधिकारियों के आदेश मिलते ही तेजी के साथ खातों की जांच पड़ताल का कार्य शुरू किया जाएगा।
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जनधन खातों में जो रुपये आए हैं, उनकी जांच कराई जाएगी। बिना जांच किए अभी कुछ भी कहना मुश्किल है। प्रत्येक बिंदु को ध्यान में रखकर पड़ताल हो रही है।
एसके अग्रवाल, क्षेत्रीय प्रबंधक प्रथमा बैंक
प्रथमा बैंक की 109 शाखाओं के 559 खातों में लाखों की धनराशि
अमरोहा। जिले में प्रथमा बैंक की 109 शाखाएं हैं, लेकिन 559 खातों में 55.37 लाख रुपए की धनराशि आई है, जिसकी वजह से यह खाते शक के दायरे में आ गए हैं। अधिकारिक सूत्रों की बात पर यकीन करें तो खातों की जांच पड़ताल पर उच्चाधिकारियों की नजर है। कहां से ट्रांजेक्शन हुई और किन-किन लोगों के खाते हैं। पूरा ब्यौरा एकत्र कर लिया गया है।
संबंधित खाताधारक को भी मसले में तलब कर पूछताछ की जाएगी। इस संबंध में क्षेत्रीय प्रबंधक से बातचीत का प्रयास किया गया, मगर बात नहीं हो पाई।इतना ही नहीं जिले की अन्य बैंक शाखाओं पर भी अधिकारियों ने नजर गढ़ा दी है।
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केंद्र सरकार द्वारा 500 व 1000 के नोट बंद किए जाने के बाद कारोबारियों के पास मौजूद लाखों व करोड़ों की धनराशि शक के दायरे में आ रही थी, लेकिन उन्होंने अपने इस काले धन को ठिकाने लगाने का फार्मूला भी खोज निकाला। जिन मजदूरों की महीने भर की तनख्वाह देने में उनको दिक्कत होती थी, अब उनके ही खातों में साल भर तक की सैलरी भेज दी है। सूत्रों की बात पर भरोसा करें तो जनपद के कई कारोबारियों ने मजदूरों के खातों में महीना निपटने से पहले ही इस बार सैलरी भिजवा दी। 500 व 1000 के नोट खातों में डलवा दिए।
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इतना ही नहीं कुछ फैक्ट्री के मालिकों ने साल भर तक की सैलरी का पेमेंट मजदूरों को कर अपने काले धन को सफेद कर दिया है। जिन मजदूरों को तनख्वाह का भुगतान हुआ है, उन्होंने अपने खाते जनधन योजना के तहत खुलवा रखे थे। सूत्रों के मुताबिक प्रथमा बैंक में खुले जनधन के खातों में आए एक से दो लाख रुपये पहुंचे हैं, यह मजदूरों की सैलरी हो सकती है। इस बिंदु पर बैंक अधिकारियों ने विचार चालू कर दिया है। उच्चाधिकारियों के आदेश मिलते ही तेजी के साथ खातों की जांच पड़ताल का कार्य शुरू किया जाएगा।
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जनधन खातों में जो रुपये आए हैं, उनकी जांच कराई जाएगी। बिना जांच किए अभी कुछ भी कहना मुश्किल है। प्रत्येक बिंदु को ध्यान में रखकर पड़ताल हो रही है।
एसके अग्रवाल, क्षेत्रीय प्रबंधक प्रथमा बैंक
प्रथमा बैंक की 109 शाखाओं के 559 खातों में लाखों की धनराशि
अमरोहा। जिले में प्रथमा बैंक की 109 शाखाएं हैं, लेकिन 559 खातों में 55.37 लाख रुपए की धनराशि आई है, जिसकी वजह से यह खाते शक के दायरे में आ गए हैं। अधिकारिक सूत्रों की बात पर यकीन करें तो खातों की जांच पड़ताल पर उच्चाधिकारियों की नजर है। कहां से ट्रांजेक्शन हुई और किन-किन लोगों के खाते हैं। पूरा ब्यौरा एकत्र कर लिया गया है।
संबंधित खाताधारक को भी मसले में तलब कर पूछताछ की जाएगी। इस संबंध में क्षेत्रीय प्रबंधक से बातचीत का प्रयास किया गया, मगर बात नहीं हो पाई।इतना ही नहीं जिले की अन्य बैंक शाखाओं पर भी अधिकारियों ने नजर गढ़ा दी है।