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Amroha News: व्यवस्था की नाकामी...मिठाई खपने के बाद पता चलती है असली-नकली की कहानी

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 26 Aug 2026 02:40 AM IST
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Systemic failure... the truth about genuine versus fake sweets comes to light only after they have been consumed.
अमरोहा। रक्षाबंधन का पर्व करीब आते ही मिठाइयों की मांग बढ़ने लगी है, इसी के साथ मिलावटखोर सक्रिय हो गए हैं। विडंबना यह है कि त्योहार पर खरीदी और खाई जाने वाली मिठाई मिलावटी है या नहीं, इसका पता लोगों को समय रहते नहीं चल पाता। खाद्य सुरक्षा विभाग त्योहार से पहले छापामार कार्रवाई कर मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर प्रयोगशाला भेजता है, लेकिन जांच रिपोर्ट आने में करीब एक से दो महीने का समय लग जाता है।
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जांच रिपोर्ट आने तक त्योहार बीत चुका होता है। कार्रवाई की रिपोर्ट आती है, मगर मिलावट पहले ही अपना असर छोड़ चुकी होती है। ऐसा हम नहीं विभागीय आंकड़े बोल रहे हैं, होली और दिवाली पर लिए गए सैंपलों की रिपोर्ट भी करीब डेढ़ से दो महीने बाद आई थी। इस दौरान लिए गए दूध, पनीर, मावा, खोया समेत अन्य खाद्य पदार्थों के अधिकांश सैंपल जांच में फैल आए थे। देसी घी से लेकर सरसों के तेल में मिलावट मिल रही है। प्रयोगशाला की रिपोर्ट में मिश्रित दूध, बफीर्, चौलाई लड्डू,रसगुल्ला और पनीर के नमूने फेल मिले। पनीर निर्माण इकाई में रिफाइंड पॉमोलीन तेल पाया गया। जो दूध में मिलावट कर पनीर बनाने में प्रयोग किया जाता है।
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जनपद में एक अप्रैल से 31 जुलाई तक 84 नमूने लिए गए। जिसमें से 35 जांच रिपोर्ट में फेल आए। इसमें दूध के 9, पनीर के 13 और अन्य मिल्क उत्पाद के तीन नमूने अधोमानक मिले। एडीएम वित्त एवं राजस्व की कोर्ट में 31 मुकदमे और सीजेएम कोर्ट में 5 मुकदमे दर्ज कराए गए। एडीएम कोर्ट ने चार माह में 34,95,000 का जुर्माना लगाया गया और एक लाख रुपये जमा किए गए।
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जांच रिपोर्ट आने पर कई नमूनों में गुणवत्ता संबंधी खामियां

जांच रिपोर्ट आने पर कई नमूनों में गुणवत्ता संबंधी खामियां और मिलावट पाई गई। इनमें मिश्रित दूध, घी, छैना रसगुल्ला, सरसों का तेल, पनीर, समोसा जैसे खाद्य पदार्थ शामिल हैं। पनीर निर्माण इकाई में रिफाइंड पॉमोलीन तेल पाया गया, जो दूध में मिलावट कर पनीर बनाने में प्रयोग किया जाता था। लैब रिपोर्ट में दूध से लेकर मिठाई, पनीर और आटे तक में मिलावट की पुष्टि हो रही है।

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ऐसे करें पहचान::
सरसों के तेल की ऐसे करें पहचान
सरसों के तेल में हाइड्रोक्लोरिक एसिड नीचे साफ दिखता है और इसमें किसी भी तरह का रंग बदलता नहीं होता है तो ये शुद्ध तेल है, जबकि अगर मिलावटी तेल होगा तो इससे हाइड्रोक्लोरिक एसिड के रंग में परिवर्तन दिखाई देगा।

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मिलावटी घी की ऐसे करें पहचान

एक कटोरी में एक चम्मच घी लें। उसमें थोड़ा सा नमक और हाइड्रोक्लोरिक एसिड मिलाकर उसे 20 मिनट तक छोड़ दें। अगर आपको घी में कोई कलर नहीं दिखता है, तो समझो वह शुद्ध है।
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मिलावटी दूध की ऐसे करें पहचान
दूध में मिलावट का पता लगाने के लिए गरम दूध में नींबू का रस डाल दें। अगर शुद्ध दूध होगा तो उसका पनीर बन जाएगा। नकली होने पर दूध का पनीर नहीं बनेगा। खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार मिश्रित दूध में वसा (फैट) का निर्धारित मानक 4.5 प्रतिशत होना चाहिए। इससे कम या अधिक होने पर दूध अधोमानक की श्रेणी में आता है।

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कितने समय में खराब हो सकती हैं मिठाइयां

विशेषज्ञों के अनुसार यदि मिठाइयां फ्रिज में नहीं रखी गई है, तो चौबीस घंटे में खराब हो सकती है। फ्रिज में रखी हुई मिठाइयां एक सप्ताह तक चल सकती हैं। यदि जिस स्थानों पर मिठाइयों को रखा गया है, वहा नमी व गंदगी है तो जल्द मिठाइयां खराब हो सकती है।
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एक्सपायरी मिठाई, नमकीन और नूडल्स बेचने पर बड़ी कार्रवाई
अमरोहा। एडीएम (वित्त एवं राजस्व) की कोर्ट ने एक्सपायरी खाद्य सामग्री बेचने के मामले में आठ लाख रुपये तथा अधोमानक क्रीम बेचने के मामले में दो लाख रुपये का अर्थदंड लगाया है। डिडौली कोतवाली क्षेत्र के गांव ढकिया चमन में छापा मारा था। कार्रवाई के दौरान एक गोदाम से करीब 7.86 लाख रुपये मूल्य की बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री बरामद की गई। इनमें काजू बर्फी, नमकीन, चिप्स, नूडल्स, मूंगफली नमकीन और रस्क सहित कई उत्पाद शामिल थे। जांच में सामने आया कि एक्सपायरी हो चुके खाद्य उत्पादों को खोलकर नए पैकेटों में भरकर गांवों में लगने वाले साप्ताहिक बाजारों में बेचा जा रहा था।


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खाद्य पदार्थ असली हैं या नकली, इसकी जांच प्रयोगशाला द्वारा की जाती है। सैंपल की जांच रिपोर्ट 14 दिन में आने का प्रावधान है, लेकिन जांच रिपोर्ट आने में एक से दो माह का समय लग जाता है। रक्षाबंधन को लेकर जिले में छापामार कार्रवाई शुरू कर दी गई है। किसी प्रकार की खामी मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
-विनय कुमार, सहायक आयुक्त,खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन
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