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मुरादाबाद मंडल के जिले में सरकार बनाए हाईकोर्ट की बेंच: दानिश
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अमरोहा। हाईकोर्ट के मेरठ में बेंच स्थापना की बहुप्रतीक्षित मांग के बीच बसपा सांसद कुंवर दानिश अली ने मुरादाबाद मंडल में हाईकोर्ट की बेंच स्थापित करने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे लोगों को काफी राहत मिलेगी। क्योंकि यहां पर गढ़मुक्तेश्वर है ब्रजघाट पश्चिमी उत्तर प्रदेश का सर्वाधिक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। ऐसे में मंडल के जिले में स्थापना जरुरी है। गरीब को उच्च स्तर पर न्याय नहीं मिल पा रहा है। क्योंकि अधिवक्ताओं की फीस बहुत अधिक है। ऑनलाइन सुनवाई में चुनिंदा अधिवक्ता ही शामिल रहते हैं।
सांसद कुंवर दानिश अली ने शीतकालीन सत्र में हिस्सा लेते हुए कहा है कि उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों (वेतन और सेवा की शर्तें) संशोधन विधेयक के चर्चा के बीच हाईकोर्ट की बेंच की स्थापना मुरादाबाद मंडल में करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहारनपुर से 800 किलोमीटर चल कर हाई कोर्ट से न्याय लेने के लिए इलाहाबाद जाता है। देश के लोग जानते हैं कि जस्टिस कुरैशी जो हाई कोर्ट की सूची में वरिष्ठतम थे उन्हें सुप्रीम कोर्ट में आना था लेकिन कॉलेजियम के उपर सरकार का दबाव था कि उनका नाम भेजे। कहा कि देश के हाईकोर्ट में 50 लाख से ज्यादा मामले लंबित है। चार करोड़ से ज्यादा केस लोअर कोर्ट्स में लंबित है। यूएपीए में लोग बंद हैं इसके अलावा कई मामले संवैधानिक पीठ के समक्ष लंबित है। उन्होंने कहा कि न्यायालय बंद नहीं है। क्योंकि वर्चुअल सुनवाई में वरिष्ठ अधिवक्ताओं की क्लिपिंग से स्पष्ट हो जाता है। संवाद
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सांसद कुंवर दानिश अली ने शीतकालीन सत्र में हिस्सा लेते हुए कहा है कि उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों (वेतन और सेवा की शर्तें) संशोधन विधेयक के चर्चा के बीच हाईकोर्ट की बेंच की स्थापना मुरादाबाद मंडल में करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहारनपुर से 800 किलोमीटर चल कर हाई कोर्ट से न्याय लेने के लिए इलाहाबाद जाता है। देश के लोग जानते हैं कि जस्टिस कुरैशी जो हाई कोर्ट की सूची में वरिष्ठतम थे उन्हें सुप्रीम कोर्ट में आना था लेकिन कॉलेजियम के उपर सरकार का दबाव था कि उनका नाम भेजे। कहा कि देश के हाईकोर्ट में 50 लाख से ज्यादा मामले लंबित है। चार करोड़ से ज्यादा केस लोअर कोर्ट्स में लंबित है। यूएपीए में लोग बंद हैं इसके अलावा कई मामले संवैधानिक पीठ के समक्ष लंबित है। उन्होंने कहा कि न्यायालय बंद नहीं है। क्योंकि वर्चुअल सुनवाई में वरिष्ठ अधिवक्ताओं की क्लिपिंग से स्पष्ट हो जाता है। संवाद
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