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अमरोहा के युवक की मेरठ में करंट से मौत
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क्षेत्र के गांव निवासी युवक की मेरठ में करंट लगने से मौत हो गई। मौत की सूचना से परिजनों में कोहराम मचा गया। इसके बाद गांव में दफीने के दौरान गांव में विवाद हो गया। जमकर हंगामा हुआ।
थाना क्षेत्र के गांव चांदनगर निवासी शरीफ अहमद का 22 वर्षीय बेटा कासिम मेरठ में रहकर वेल्डिंग का काम करता था। रविवार सुबह छत पर सोते समय उसकी शर्ट हवा से उड़कर पास से गुजर रही विद्युत लाइन पर लटक गई। आंख खुलने पर वह वाइपर से शर्ट को उतारने की कोशिश करने लगा। इसी दौरान करंट की चपेट में आकर उसकी मौत हो गई। मौत की खबर से परिवार में कोहराम मच गया। बिना कानूनी कार्रवाई के परिजन युवक के शव को घर ले आए लेकिन गांव में दफन की तैयारियों के बीच कब्रिस्तान का रास्ता नहीं होने पर विवाद की स्थिति बन गई। सूचना मिलते ही तहसीलदार अमरोहा व सीओ मंडी धनौरा गांव पहुंच गए। ग्रामीणों से बातचीत कर रास्ते का हल निकाला गया। पूर्व प्रधान विरेश ने खेत में हुई तारबंदी हटाकर कब्रिस्तान तक जाने के लिए रास्ता दिया। तहसीलदार भूपेंद्र सिंह का कहना है कि 1963 में हुई चकबंदी के बाद से कब्रिस्तान का रास्ता नहीं है। समस्या का जल्द समाधान करा दिया जाएगा। बाद में शव का दफीना कर दिया गया।
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थाना क्षेत्र के गांव चांदनगर निवासी शरीफ अहमद का 22 वर्षीय बेटा कासिम मेरठ में रहकर वेल्डिंग का काम करता था। रविवार सुबह छत पर सोते समय उसकी शर्ट हवा से उड़कर पास से गुजर रही विद्युत लाइन पर लटक गई। आंख खुलने पर वह वाइपर से शर्ट को उतारने की कोशिश करने लगा। इसी दौरान करंट की चपेट में आकर उसकी मौत हो गई। मौत की खबर से परिवार में कोहराम मच गया। बिना कानूनी कार्रवाई के परिजन युवक के शव को घर ले आए लेकिन गांव में दफन की तैयारियों के बीच कब्रिस्तान का रास्ता नहीं होने पर विवाद की स्थिति बन गई। सूचना मिलते ही तहसीलदार अमरोहा व सीओ मंडी धनौरा गांव पहुंच गए। ग्रामीणों से बातचीत कर रास्ते का हल निकाला गया। पूर्व प्रधान विरेश ने खेत में हुई तारबंदी हटाकर कब्रिस्तान तक जाने के लिए रास्ता दिया। तहसीलदार भूपेंद्र सिंह का कहना है कि 1963 में हुई चकबंदी के बाद से कब्रिस्तान का रास्ता नहीं है। समस्या का जल्द समाधान करा दिया जाएगा। बाद में शव का दफीना कर दिया गया।
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