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अमरोहा : जहरीली शराब बनाने वाले दो दोषियों को उम्रकैद
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अमरोहा। एडीजे तृतीय की अदालत ने करीब 14 साल पुराने जहरीली शराब प्रकरण में बड़ा फैसला सुनाते हुए मेरठ और मंडी धनौरा के दो दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही 500 रुपये का जुर्माना लगाया है।वहीं साक्ष्यों के अभाव में दो अन्य आरोपियों को बरी कर दिया गया।
यह मामला मंडी धनौरा थानाक्षेत्र के जुड़ा है। यहां तैनात दरोगा सुरेश पाल सिंह ने आबकारी अधिकारी अश्वनी कुमार के साथ संयुक्त टीम बनाकर 23 दिसंबर 2012 को मुकारमपुर गांव के पास गंगा किनारे जहरीली शराब तैयार करने वालाें के ठिकानों पर छापा मारा था। यहां से मेरठ जनपद के थाना परीक्षतगढ़ के गांव मिर्जापुर निवासी परमजीत सिंह और मंडी धनौरा के गांव चांद्रा फार्म निवासी मक्खन चोपड़ा को गिरफ्तार किया था जबकि दो आरोपी परमजीत के गांव के रहने वाले विंदर सिंह और काके अंधेरे व जंगल का फायदा उठाकर भाग गए थे। मौके पर तलाशी के दौरान पुलिस को भारी मात्रा में अवैध कच्ची शराब से भरे कैन और ट्यूब मिले। करीब 11 कैन में अवैध शराब के अलावा 3 किलोग्राम यूरिया और एक किलोग्राम नौशादर भी बरामद हुआ था। यूरिया और नौशादर को शराब में मिलाकर उसे जहरीला बनाया जा रहा था।
पूछताछ के दौरान परमजीत सिंह और मक्खन चोपड़ा ने लंबे समय से कच्ची शराब में यूरिया और नौशादर मिलाकर उसे अधिक नशीला बनाकर क्षेत्र में बेचने की बात कबूल की थी। बाद में पुलिस ने विंदर और काके को भी गिरफ्तार कर लिया था। इस मामले में पुलिस ने परमजीत सिंह, मक्खन चोपड़ा, विंदर और काके के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया था। फिलहाल चारों जमानत पर जेल से बाहर थे। इस मामले की सुनवाई एडीजे तृतीय की अदालत में चल रही थी। अभियोजन पक्ष की तरफ से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता संजीव चौधरी पैरवी कर रहे थे। सोमवार को न्यायालय ने मुकदमे में आखिरी सुनवाई की और साक्ष्यों के आधार पर परमजीत सिंह व मक्खन चोपड़ा को दोषी करार दिया और दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई जबकि आरोपी विंदर और काके को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया है।
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मजबूत विवेचना से दोषियों को उम्रकैद
अमरोहा। जहरीली शराब कांड के दोषियों को उम्रकैद की सजा दिलाने में पुलिस की मजबूत विवेचना निर्णायक साबित हुई। खास बात यह रही कि पुलिस ने केवल एक पेज का आरोप पत्र दाखिल किया था लेकिन साक्ष्यों की मजबूती और गवाहों के बयान ने केस को मजबूत आधार दिया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान पुलिस और आबकारी विभाग की ओर से कुल पांच गवाह न्यायालय में पेश किए गए। लंबी न्यायिक प्रक्रिया के चलते करीब 14 वर्षों में डेढ़ सौ से अधिक तारीखें पड़ीं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने सोमवार को करीब 20 पृष्ठों में विस्तृत फैसला सुनाया। इस निर्णय को न्याय की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है, जिसमें साक्ष्यों और सटीक जांच ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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यह मामला मंडी धनौरा थानाक्षेत्र के जुड़ा है। यहां तैनात दरोगा सुरेश पाल सिंह ने आबकारी अधिकारी अश्वनी कुमार के साथ संयुक्त टीम बनाकर 23 दिसंबर 2012 को मुकारमपुर गांव के पास गंगा किनारे जहरीली शराब तैयार करने वालाें के ठिकानों पर छापा मारा था। यहां से मेरठ जनपद के थाना परीक्षतगढ़ के गांव मिर्जापुर निवासी परमजीत सिंह और मंडी धनौरा के गांव चांद्रा फार्म निवासी मक्खन चोपड़ा को गिरफ्तार किया था जबकि दो आरोपी परमजीत के गांव के रहने वाले विंदर सिंह और काके अंधेरे व जंगल का फायदा उठाकर भाग गए थे। मौके पर तलाशी के दौरान पुलिस को भारी मात्रा में अवैध कच्ची शराब से भरे कैन और ट्यूब मिले। करीब 11 कैन में अवैध शराब के अलावा 3 किलोग्राम यूरिया और एक किलोग्राम नौशादर भी बरामद हुआ था। यूरिया और नौशादर को शराब में मिलाकर उसे जहरीला बनाया जा रहा था।
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पूछताछ के दौरान परमजीत सिंह और मक्खन चोपड़ा ने लंबे समय से कच्ची शराब में यूरिया और नौशादर मिलाकर उसे अधिक नशीला बनाकर क्षेत्र में बेचने की बात कबूल की थी। बाद में पुलिस ने विंदर और काके को भी गिरफ्तार कर लिया था। इस मामले में पुलिस ने परमजीत सिंह, मक्खन चोपड़ा, विंदर और काके के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया था। फिलहाल चारों जमानत पर जेल से बाहर थे। इस मामले की सुनवाई एडीजे तृतीय की अदालत में चल रही थी। अभियोजन पक्ष की तरफ से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता संजीव चौधरी पैरवी कर रहे थे। सोमवार को न्यायालय ने मुकदमे में आखिरी सुनवाई की और साक्ष्यों के आधार पर परमजीत सिंह व मक्खन चोपड़ा को दोषी करार दिया और दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई जबकि आरोपी विंदर और काके को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया है।
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मजबूत विवेचना से दोषियों को उम्रकैद
अमरोहा। जहरीली शराब कांड के दोषियों को उम्रकैद की सजा दिलाने में पुलिस की मजबूत विवेचना निर्णायक साबित हुई। खास बात यह रही कि पुलिस ने केवल एक पेज का आरोप पत्र दाखिल किया था लेकिन साक्ष्यों की मजबूती और गवाहों के बयान ने केस को मजबूत आधार दिया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान पुलिस और आबकारी विभाग की ओर से कुल पांच गवाह न्यायालय में पेश किए गए। लंबी न्यायिक प्रक्रिया के चलते करीब 14 वर्षों में डेढ़ सौ से अधिक तारीखें पड़ीं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने सोमवार को करीब 20 पृष्ठों में विस्तृत फैसला सुनाया। इस निर्णय को न्याय की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है, जिसमें साक्ष्यों और सटीक जांच ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।