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12 साल बाद भी नहीं बंट पाए कांशीराम कॉलोनी के 240 आवास
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बसपा शासन काल में करीब बारह वर्ष पूर्व आवास विकास परिषद की ओर से अलग-अलग दो स्थानों पर छह करोड़ की धनराशि से 240 आवासों का निर्माण कराया गया था। जिन पर करोड़ों की लागत खर्च हुई थी लेकिन सरकार और विभागीय अधिकारियों की लापरवाही की वजह से आजतक आवासों का आवंटन नहीं हो सका है। आवासीय कालोनी में बिजली और पानी की आपूर्ति का काम अभी अधूरा है। गरीब लोग आवास के लिए भटक रहे हैं। लेकिन कांशीराम कालोनी के आवासों का दरवाजा अभी उनके लिए नहीं खोला गया है।
बहुजन समाज पार्टी की सरकार में हसनपुर में वर्ष 2010-11 में दो स्थानों पर गरीबों के लिए आवास मुहैया कराने के उद्देश्य से कांशीराम आवासीय कालोनी का निर्माण कराया गया था। इसमें एक स्थान एसडीएम कार्यालय से चंद कदम की दूरी पर कांशीराम आवासीय कॉलोनी बनाई थी। कालोनी में 84 प्लेट बने हुए हैं। जबकि रामपुर भूड़ गांव के नजदीक भी कांशीराम कॉलोनी में आवास बनाए गए थे। इसमें 156 प्लेट बने हुए हैं। दोनों स्थानों पर कुल 240 फ्लेट तैयार किए गए थे। इन फ्लेटों में दरवाजे एवं खिड़कियां पर शीशे भी चढ़ाए गए थे। रंगाई पुताई का कार्य भी पूरा किया गया लेकिन 2012 में प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार आई तो इन आवासों को आवंटित नहीं कराया जा सका।
आवास आवंटन की प्रक्रिया शुरू जरूर हुई थी, लेकिन उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इसके बाद वर्ष 2017 में प्रदेश के अंदर भाजपा की सरकार बनी। लोगों को उम्मीद थी कि इस सरकार में आवासों का आवंटन हो जाएगा। लेकिन इस सरकार में भी आवासों के आवंटन के संबंध में कोई प्रक्रिया शुरू नहीं की जा सकी। वर्ष 2022 में प्रदेश के अंदर फिर से भाजपा की सरकार बनी। लेकिन सरकार बनने के कई माह बीत जाने के बाद भी आवासों का आवंटन नहीं हो सका है। जिससे जरूरतमंद लोगों को पक्के घरों के लिए भटकना पड़ रहा है।
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बहुजन समाज पार्टी की सरकार में हसनपुर में वर्ष 2010-11 में दो स्थानों पर गरीबों के लिए आवास मुहैया कराने के उद्देश्य से कांशीराम आवासीय कालोनी का निर्माण कराया गया था। इसमें एक स्थान एसडीएम कार्यालय से चंद कदम की दूरी पर कांशीराम आवासीय कॉलोनी बनाई थी। कालोनी में 84 प्लेट बने हुए हैं। जबकि रामपुर भूड़ गांव के नजदीक भी कांशीराम कॉलोनी में आवास बनाए गए थे। इसमें 156 प्लेट बने हुए हैं। दोनों स्थानों पर कुल 240 फ्लेट तैयार किए गए थे। इन फ्लेटों में दरवाजे एवं खिड़कियां पर शीशे भी चढ़ाए गए थे। रंगाई पुताई का कार्य भी पूरा किया गया लेकिन 2012 में प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार आई तो इन आवासों को आवंटित नहीं कराया जा सका।
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आवास आवंटन की प्रक्रिया शुरू जरूर हुई थी, लेकिन उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इसके बाद वर्ष 2017 में प्रदेश के अंदर भाजपा की सरकार बनी। लोगों को उम्मीद थी कि इस सरकार में आवासों का आवंटन हो जाएगा। लेकिन इस सरकार में भी आवासों के आवंटन के संबंध में कोई प्रक्रिया शुरू नहीं की जा सकी। वर्ष 2022 में प्रदेश के अंदर फिर से भाजपा की सरकार बनी। लेकिन सरकार बनने के कई माह बीत जाने के बाद भी आवासों का आवंटन नहीं हो सका है। जिससे जरूरतमंद लोगों को पक्के घरों के लिए भटकना पड़ रहा है।
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