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खादर के बीमार लोगों की सुध नहीं ले रहा वर भाग
Updated Tue, 28 Aug 2018 01:09 AM IST
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गजरौला। खादर जलजनित बीमारियों से पीड़ित है लेकिन, स्वास्थ्य विभाग मरीजों की सुध लेने को तैयार नहीं है। सिर्फ दवाईयां बांटकर अपना फर्ज पूरा कर लिया जबकि, गांव में निरंतर इलाज होना चाहिए था। छह गांव में दो हजार से ज्यादा लोग बीमार हैं।
बाढ़ आने के बाद खादर के ग्रामीण एकाएक बीमार पड़ने लगे। अकेले दारानगर गांव में करीब आठ सौ लोग बीमार हैं। इसके अलावा टीकोवाली, शीशोवाली, जाटोवाली, भुड्डीवाली, मंदिरवाली गांव में भी लोगों को बुखार और अन्य बीमारियों ने जकड़ रखा है। मामले को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया तो स्वास्थ्य विभाग की नींद टूटी थी। विभाग के दो कर्मचारी दारानगर गए और कुछ ग्रामीणों को दवाईयां बांट आए। इसके अलावा शीशोवाली और जाटोवाली में दवाईयां वितरित की गईं।
सिर्फ कुछ दवाईयां देकर स्वास्थ्य विभाग ने बीमार ग्रामीणों का इलाज कर दिया है। जबकि, गांव में शिविर लगाकर लोगों का निरंतर इलाज होना चाहिए था। इन दिनों जो लोग बाढ़ का पानी चीरकर शहर आ रहे हैं वो सभी केवल दवाईयां लेने ही आ रहे हैं। यूं तो खादर के हर गांव में अप्रशिक्षित चिकित्सकों ने अपनी दुकानें खोल रखी हैं लेकिन, मरीजों का इलाज करना उनके काबू से बाहर की बात हो रहा है। खादर के ग्रामीणों में कैंप नहीं लगाए जाने से खासी नाराजगी है। गांव वालों का कहना है अगर किसी की हालत बिगड़ गई तो गांव में एंबुलेंस भी नहीं आ सकती। रात में नाव भी नहीं चलती है। ऐसे में खादर के मरीज रामभरोसे ही ठीक होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
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टीकोवाली निवासी ग्राम प्रधान नानक ने बताया कि चारों गांव में ढाई हजार से ज्यादा लोग बीमार हैं। कोई भी डाक्टर गांव में नहीं आया है। शीशोवाली में कुछ दवाईयां बांटी गई थी। बीमार लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।
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बाढ़ आने के बाद खादर के ग्रामीण एकाएक बीमार पड़ने लगे। अकेले दारानगर गांव में करीब आठ सौ लोग बीमार हैं। इसके अलावा टीकोवाली, शीशोवाली, जाटोवाली, भुड्डीवाली, मंदिरवाली गांव में भी लोगों को बुखार और अन्य बीमारियों ने जकड़ रखा है। मामले को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया तो स्वास्थ्य विभाग की नींद टूटी थी। विभाग के दो कर्मचारी दारानगर गए और कुछ ग्रामीणों को दवाईयां बांट आए। इसके अलावा शीशोवाली और जाटोवाली में दवाईयां वितरित की गईं।
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सिर्फ कुछ दवाईयां देकर स्वास्थ्य विभाग ने बीमार ग्रामीणों का इलाज कर दिया है। जबकि, गांव में शिविर लगाकर लोगों का निरंतर इलाज होना चाहिए था। इन दिनों जो लोग बाढ़ का पानी चीरकर शहर आ रहे हैं वो सभी केवल दवाईयां लेने ही आ रहे हैं। यूं तो खादर के हर गांव में अप्रशिक्षित चिकित्सकों ने अपनी दुकानें खोल रखी हैं लेकिन, मरीजों का इलाज करना उनके काबू से बाहर की बात हो रहा है। खादर के ग्रामीणों में कैंप नहीं लगाए जाने से खासी नाराजगी है। गांव वालों का कहना है अगर किसी की हालत बिगड़ गई तो गांव में एंबुलेंस भी नहीं आ सकती। रात में नाव भी नहीं चलती है। ऐसे में खादर के मरीज रामभरोसे ही ठीक होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
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टीकोवाली निवासी ग्राम प्रधान नानक ने बताया कि चारों गांव में ढाई हजार से ज्यादा लोग बीमार हैं। कोई भी डाक्टर गांव में नहीं आया है। शीशोवाली में कुछ दवाईयां बांटी गई थी। बीमार लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।