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Amethi News: उद्योग स्थापित कर आत्मनिर्भर बनीं महिलाएं
Wed, 03 Sep 2025 01:01 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Wed, 03 Sep 2025 01:01 AM IST
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शाहगढ़। दृढ़ इच्छाशक्ति, कार्य करने की ललक से महिलाओं ने समूह गठित कर छोटी बचत से उद्योग स्थापित कर दिया और कमाई की एक नई इबारत लिखते हुए परिवार के आमदनी का प्रमुख स्रोत बन चुकी हैं। विकास खंड के कसरावां निवासी सुमित्रा ने राष्ट्रीय आजीविका मिशन से प्रेरित होकर गांव की 11 अन्य महिलाओं के संग मिलकर ममता सहायता स्वयं समूह का गठन किया।
समूह की अध्यक्ष सुमित्रा तो कोषाध्यक्ष रजिया बानो और सचिव उर्मिला ने शाहगढ़ कस्बा स्थित यूको बैंक में समूह का खाता खुलवाया। निर्धारित बचत राशि का 100 रुपये प्रत्येक माह एकत्र होकर बैंक खाता में जमा होने लगा। एनआरएलएम के कर्मी सुशील कुमार के सहयोग से समूह को स्टार्टअप मनी 2500 रुपये, रिवॉल्विंग फंड 15 हजार और सीआईएफ फंड एक लाख 10 हजार रुपये की राशि मिली। बैंकिंग लेनदेन ठीक होने से दो लाख रुपये का सीसीएल भी समूह का बना। आर्थिक समस्या दूर होने पर समूह की महिलाओं ने चप्पल बनाने की मशीन और कच्चा सामान खरीदकर घर के एक कमरे में उद्योग स्थापित कर लिया।
जीरो से लेकर नौ नंबर साइज के चप्पल बनाने में समूह की महिलाएं जुट गईं। गांववासी रज्जब नूरानी से महिलाओं ने तीन दिन तक चप्पल बनाने का प्रशिक्षण लिया। सुमित्रा, रजिया बानो और उर्मिला साथ में प्रतिदिन सौ जोड़ी विभिन्न साइज के चप्पल बनाने लगीं। इस तरह प्रति माह तीन हजार जोड़ी चप्पल बनने लगीं। क्षेत्र की कुछ दुकानों पर सप्लाई देने के साथ उसमापुर के पास दुकान खोल इसकी बिक्री करने लगीं।
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इस व्यवसाय से समूह का सालाना कारोबार लगभग पांच लाख रुपये तक पहुंचा जिसमें से दो लाख रुपये की बचत होने लगी। अब समूह की महिलाओं की आर्थिक स्थित सुदृढ़ हो रही है। खुद की मेहनत से समूह की महिलाएं न सिर्फ आर्थिक आजादी की राह पर आगे बढ़ी हैं बल्कि अन्य महिलाओं की प्रेरणास्रोत हैं। इनकी कामयाबी के चर्चे अब इलाके में होने लगे हैं।
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समूह की अध्यक्ष सुमित्रा तो कोषाध्यक्ष रजिया बानो और सचिव उर्मिला ने शाहगढ़ कस्बा स्थित यूको बैंक में समूह का खाता खुलवाया। निर्धारित बचत राशि का 100 रुपये प्रत्येक माह एकत्र होकर बैंक खाता में जमा होने लगा। एनआरएलएम के कर्मी सुशील कुमार के सहयोग से समूह को स्टार्टअप मनी 2500 रुपये, रिवॉल्विंग फंड 15 हजार और सीआईएफ फंड एक लाख 10 हजार रुपये की राशि मिली। बैंकिंग लेनदेन ठीक होने से दो लाख रुपये का सीसीएल भी समूह का बना। आर्थिक समस्या दूर होने पर समूह की महिलाओं ने चप्पल बनाने की मशीन और कच्चा सामान खरीदकर घर के एक कमरे में उद्योग स्थापित कर लिया।
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जीरो से लेकर नौ नंबर साइज के चप्पल बनाने में समूह की महिलाएं जुट गईं। गांववासी रज्जब नूरानी से महिलाओं ने तीन दिन तक चप्पल बनाने का प्रशिक्षण लिया। सुमित्रा, रजिया बानो और उर्मिला साथ में प्रतिदिन सौ जोड़ी विभिन्न साइज के चप्पल बनाने लगीं। इस तरह प्रति माह तीन हजार जोड़ी चप्पल बनने लगीं। क्षेत्र की कुछ दुकानों पर सप्लाई देने के साथ उसमापुर के पास दुकान खोल इसकी बिक्री करने लगीं।
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इस व्यवसाय से समूह का सालाना कारोबार लगभग पांच लाख रुपये तक पहुंचा जिसमें से दो लाख रुपये की बचत होने लगी। अब समूह की महिलाओं की आर्थिक स्थित सुदृढ़ हो रही है। खुद की मेहनत से समूह की महिलाएं न सिर्फ आर्थिक आजादी की राह पर आगे बढ़ी हैं बल्कि अन्य महिलाओं की प्रेरणास्रोत हैं। इनकी कामयाबी के चर्चे अब इलाके में होने लगे हैं।