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Amethi News: जहां पर धर्म होता है वहीं पर धाम होते हैं...
Mon, 17 Mar 2025 12:54 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Mon, 17 Mar 2025 12:54 AM IST
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इन्हौना (अमेठी)। सिंहपुर क्षेत्र के पेंडारा गांव में पूर्व प्रधान वासुदेव सिंह के आवास पर रविवार को होली मिलन समारोह एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह के बेटे मृगांकेश्वर शरण सिंह रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में ब्लॉक प्रमुख अंकित पासी व जिला पंचायत सदस्य कौशलेन्द्र सिंह मौजूद रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर की। अध्यक्षता वरिष्ठ कवि आचार्य सूर्य प्रसाद शर्मा निशिहर ने की। रायबरेली से आईं कवयित्री गीता त्रिपाठी ने वाणी वंदना प्रस्तुत की। कवि दुर्गा शंकर वर्मा दुर्गेश ने अम्मा हम हन बिटिया तुम्हारी कोख में मत मारो, तुमसे मिलत सुरतिया हमारी कोख में मत मारो... रचना सुनाई। आचार्य सूर्य प्रसाद शर्मा निशिहर ने पढ़ा, भाईचारा न भुला पाए, भेद आंधी न डोला पाए, मिले सब लोग बिहस कर निशिहर प्यार बिरवा का न सुखाने पाए। हास्य कवि जमुना प्रसाद पांडेय अबोध ने सुनाया, जहां पर धर्म होता है वहीं पर धाम होते हैं, जो मरते दूसरों पर हैं, उन्हीं के नाम होते हैं। किसी सीता के क्रंदन पर जटायु जान देता है, उसे गोदी में लेकर तभी श्रीराम रोते हैं।
बाराबंकी से पधारे कवि शिव किशोर तिवारी खंजन ने पढ़ा, मिले यदि प्रेम का प्याला, जहर भी जाम होता है, हृदय जो प्रेम में डूबा प्रभु का धाम होता है। जिनका कार्य उत्तम और उत्तम घराना है, वही दशरथ का बेटा बनके पैदा राम होता है। रायबरेली से आईं कवयित्री रीता त्रिपाठी ने सुनाया कि कोई गुजरी कहानी बुलाने लगी, मेरे उसे गांव की याद आने लगी। कवि कुमार मयंक मिश्र लालगंज व शिव बहादुर सिंह दिलबर ने भी रचना पढ़ी। संयोजक डॉ. प्रताप नारायण मिश्र ने संचालन किया। आयोजक पूर्व प्रधान वासुदेव सिंह ने सभी का आभार जताया। इस मौके पर सुरेश सिंह, डॉ. सत्य प्रकाश साहू, वरदान अवस्थी, अश्विनी सिंह, रिंकू, चंदू सिंह, लल्लन सिंह, शिव वरदान सिंह, तेज नारायण मिश्रा आदि मौजूद रहे।
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कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर की। अध्यक्षता वरिष्ठ कवि आचार्य सूर्य प्रसाद शर्मा निशिहर ने की। रायबरेली से आईं कवयित्री गीता त्रिपाठी ने वाणी वंदना प्रस्तुत की। कवि दुर्गा शंकर वर्मा दुर्गेश ने अम्मा हम हन बिटिया तुम्हारी कोख में मत मारो, तुमसे मिलत सुरतिया हमारी कोख में मत मारो... रचना सुनाई। आचार्य सूर्य प्रसाद शर्मा निशिहर ने पढ़ा, भाईचारा न भुला पाए, भेद आंधी न डोला पाए, मिले सब लोग बिहस कर निशिहर प्यार बिरवा का न सुखाने पाए। हास्य कवि जमुना प्रसाद पांडेय अबोध ने सुनाया, जहां पर धर्म होता है वहीं पर धाम होते हैं, जो मरते दूसरों पर हैं, उन्हीं के नाम होते हैं। किसी सीता के क्रंदन पर जटायु जान देता है, उसे गोदी में लेकर तभी श्रीराम रोते हैं।
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बाराबंकी से पधारे कवि शिव किशोर तिवारी खंजन ने पढ़ा, मिले यदि प्रेम का प्याला, जहर भी जाम होता है, हृदय जो प्रेम में डूबा प्रभु का धाम होता है। जिनका कार्य उत्तम और उत्तम घराना है, वही दशरथ का बेटा बनके पैदा राम होता है। रायबरेली से आईं कवयित्री रीता त्रिपाठी ने सुनाया कि कोई गुजरी कहानी बुलाने लगी, मेरे उसे गांव की याद आने लगी। कवि कुमार मयंक मिश्र लालगंज व शिव बहादुर सिंह दिलबर ने भी रचना पढ़ी। संयोजक डॉ. प्रताप नारायण मिश्र ने संचालन किया। आयोजक पूर्व प्रधान वासुदेव सिंह ने सभी का आभार जताया। इस मौके पर सुरेश सिंह, डॉ. सत्य प्रकाश साहू, वरदान अवस्थी, अश्विनी सिंह, रिंकू, चंदू सिंह, लल्लन सिंह, शिव वरदान सिंह, तेज नारायण मिश्रा आदि मौजूद रहे।
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