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Amethi News: सिर्फ दो बच्चे पहुंच रहे पूरे पठान स्कूल
Fri, 25 Jul 2025 01:17 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Fri, 25 Jul 2025 01:17 AM IST
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अमेठी। परिषदीय विद्यालयों के विलय की योजना बच्चों की शिक्षा में रोड़ा बनती दिख रही है। संग्रामपुर विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय चौदहवां को इस शैक्षिक सत्र में बंद कर दिया गया और उसका विलय दो किलोमीटर दूर पूरे पठान गांव के स्कूल में कर दिया गया। यह स्कूल घने पेड़ों वाले सुनसान रास्ते के भीतर है, जो न तो सुरक्षित है और न ही बच्चों के अनुकूल। यही कारण है कि चौदहवां के 22 पंजीकृत छात्रों में से केवल दो ही अब नियमित रूप से स्कूल पहुंच रहे हैं।
विद्यालय बंद होने से ग्रामीणों में नाराजगी है। बृहस्पतिवार को चौदहवां विद्यालय पर ताला लटका मिला, जबकि पूरे पठान विद्यालय में केवल दो छात्र पढ़ाई करते मिले। शिक्षक राजमणि ने बताया कि अधिकतर बच्चों ने आना बंद कर दिया है, क्योंकि मार्ग जंगल से होकर गुजरता है। कई जगहों पर घास-झाड़ियां और कीचड़ भरे गड्ढे भी हैं। इस कारण छोटे बच्चों का वहां जाना कठिन हो गया है। छात्र अंकुर और छात्रा रिया ने बताया कि वे रोज सुबह जल्दी निकलते हैं। रास्ता खराब है। कई बार वे फिसल भी चुके हैं।
अभिभावक राकेश यादव ने बताया कि उनके तीन बच्चे चौदहवां विद्यालय में नामांकित थे, लेकिन अब वे निजी विद्यालय में भेजने की तैयारी कर रहे हैं, क्योंकि बच्चों की सुरक्षा से बढ़कर कुछ भी नहीं। गांव के अन्य अभिभावकों का भी कहना है कि जब तक विभाग स्कूल आने-जाने का सुरक्षित साधन उपलब्ध नहीं कराता, तब तक वे बच्चों को नहीं भेजेंगे। ग्रामीणों का सुझाव है कि या तो मार्ग को सुरक्षित बनाया जाए या फिर चौदहवां विद्यालय को दोबारा शुरू किया जाए।
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बीईओ शशांक मिश्र ने बताया कि विद्यालयों का विलय शासन की नीति के अनुरूप किया गया है। कुछ परेशानियां हैं, जिनका जल्द समाधान किया जाएगा। अभिभावकों से लगातार संपर्क किया जा रहा है, ताकि वे बच्चों को स्कूल भेजें।
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विद्यालय बंद होने से ग्रामीणों में नाराजगी है। बृहस्पतिवार को चौदहवां विद्यालय पर ताला लटका मिला, जबकि पूरे पठान विद्यालय में केवल दो छात्र पढ़ाई करते मिले। शिक्षक राजमणि ने बताया कि अधिकतर बच्चों ने आना बंद कर दिया है, क्योंकि मार्ग जंगल से होकर गुजरता है। कई जगहों पर घास-झाड़ियां और कीचड़ भरे गड्ढे भी हैं। इस कारण छोटे बच्चों का वहां जाना कठिन हो गया है। छात्र अंकुर और छात्रा रिया ने बताया कि वे रोज सुबह जल्दी निकलते हैं। रास्ता खराब है। कई बार वे फिसल भी चुके हैं।
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अभिभावक राकेश यादव ने बताया कि उनके तीन बच्चे चौदहवां विद्यालय में नामांकित थे, लेकिन अब वे निजी विद्यालय में भेजने की तैयारी कर रहे हैं, क्योंकि बच्चों की सुरक्षा से बढ़कर कुछ भी नहीं। गांव के अन्य अभिभावकों का भी कहना है कि जब तक विभाग स्कूल आने-जाने का सुरक्षित साधन उपलब्ध नहीं कराता, तब तक वे बच्चों को नहीं भेजेंगे। ग्रामीणों का सुझाव है कि या तो मार्ग को सुरक्षित बनाया जाए या फिर चौदहवां विद्यालय को दोबारा शुरू किया जाए।
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बीईओ शशांक मिश्र ने बताया कि विद्यालयों का विलय शासन की नीति के अनुरूप किया गया है। कुछ परेशानियां हैं, जिनका जल्द समाधान किया जाएगा। अभिभावकों से लगातार संपर्क किया जा रहा है, ताकि वे बच्चों को स्कूल भेजें।