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Amethi News: नहर व श्मशान के बीच खिल रहे शिक्षा के फूल

Sun, 20 Jul 2025 01:05 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी Updated Sun, 20 Jul 2025 01:05 AM IST
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Flowers of education are blooming between the canal and the crematorium
अमेठी सिटी। नहर, सिवान और श्मशान के बीच बने इस विद्यालय की पहचान कभी गिने-चुने नामांकन और जर्जर भवन से होती थी। लेकिन गांव की एक शिक्षिका ने अपने जुनून, नवाचार और सेवाभाव से इस सरकारी स्कूल को न केवल पुनर्जीवित किया, बल्कि देश-विदेश के विद्वानों का केंद्र बना दिया। यह कहानी है उच्च प्राथमिक विद्यालय नरायनपुर भादर की, जहां शिक्षिका ममता सिंह ने शिक्षा को बदलाव की ताकत बना दिया।
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फैजाबाद में जन्मीं ममता सिंह 2002 में शिक्षक पद पर चयनित हुईं और 2005 में अमेठी के अग्रेसर गांव स्थानांतरित हुईं। 2010 में प्रमोशन के बाद विद्यालय का चार्ज संभालते समय यहां मात्र नौ बच्चे पंजीकृत थे। कोई सहायक शिक्षक नहीं, संसाधन शून्य और समुदाय का विश्वास टूटा हुआ। फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी। अपने निजी पुस्तकालय को माध्यम बनाकर बच्चों के सपनों को आकार देना शुरू किया।
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गांव के युवाओं को वालंटियर के रूप में जोड़ा, लैपटॉप घर से लाईं, घर-घर जाकर संवाद किया और बच्चों को जोड़ना शुरू किया। 12 वर्षों से लंबित जमीन का दाखिल-खारिज पूरा कर चारदीवारी बनवाई। विद्यालय धीरे-धीरे सजता गया। पहले साल 19 नामांकन से शुरू हुआ कारवां आज 122 बच्चों तक पहुंच चुका है। कक्षा-कक्ष अब फर्नीचर, टीएलएम, स्मार्ट टीवी, विज्ञान किट, लाइब्रेरी और स्वच्छता सुविधाओं से सुसज्जित हैं।
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यह विद्यालय अब केवल पठन-पाठन का केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों का हैप्पी प्लेस बन चुका है। यहां गर्मी, सर्दी, त्योहार की छुट्टियों में भी बच्चे स्वयं विद्यालय खोलने की मांग करते हैं। सिलेबस के साथ-साथ सिलाई, योग, साहित्य, संगीत, नृत्य और पर्यावरण जैसे विषयों पर भी गतिविधियां नियमित होती हैं।


बालसभा, बाल समितियों और बाल नेतृत्व के जरिये बच्चों को जिम्मेदारी देना यहां की विशेषता है। विद्यार्थियों की प्रतिभा ने भी पहचान बनाई। एनएमएमएस, सैनिक स्कूल, स्पेल बी, विज्ञान मॉडल और श्रेष्ठा परीक्षा जैसे आयोजनों में छात्र-छात्राओं ने जनपद और मंडल स्तर पर स्थान प्राप्त किए।



शिक्षिका ममता सिंह के घर पर बना निजी पुस्तकालय 24 घंटे खुला रहता है। यहां प्रतियोगी छात्र, बच्चे और बुजुर्ग नियमित पढ़ते हैं। यहीं से शिक्षा की नई रोशनी फैली। गृहस्थ जीवन के साथ शिक्षक धर्म का संतुलन साधते हुए ममता सिंह ने दिखाया कि संकल्प और कर्मशीलता से हर परिस्थिति बदली जा सकती है। अब वह अमेठी की बेटियों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।
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