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Amethi News: मांग से ज्यादा बिकी खाद, मगर किसान खाली हाथ
Tue, 01 Jul 2025 12:07 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Tue, 01 Jul 2025 12:07 AM IST
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अमेठी सिटी। खरीफ सीजन में धान की रोपाई शुरू हो गई है, लेकिन किसानों को डीएपी की किल्लत झेलनी पड़ रही है। कई सरकारी समितियों और इफको केंद्रों पर डीएपी का स्टॉक खत्म हो चुका है। ऐसे में किसान मजबूरी में निजी दुकानों से महंगे दाम पर खाद खरीदने को विवश हैं। वहीं, विभाग का दावा है कि जून में मांग से ज्यादा खाद बिक चुकी है।
गांवों में धान की नर्सरी तैयार है। कई किसानों ने खेतों की भराई भी पूरी कर ली है, लेकिन डीएपी की अनुपलब्धता के कारण रोपाई में देरी हो रही है। जिले की 46 साधन सहकारी समितियों और 17 इफको केंद्रों में खाद नहीं है, जिससे किसान हताश हैं। किसान नेता हरीश सिंह, दिनेश तिवारी, हौसिला प्रसाद और अजय पटेल का कहना है कि हर साल डीएपी की मांग पहले से अनुमानित होती है, फिर भी पर्याप्त स्टॉक नहीं रखा गया है। रोपाई के समय खाद न मिलने से उपज पर असर पड़ सकता है।
इफको और समितियों में खाद न मिलने से किसान निजी दुकानों पर जाने को मजबूर हैं, जहां प्रति बोरी अधिक कीमत ली जा रही है। कृषि विभाग के अनुसार जून में 1200 मीट्रिक टन डीएपी की जरूरत थी, जबकि करीब 1500 मीट्रिक टन की बिक्री हुई है। जुलाई में 2000 मीट्रिक टन की मांग बताई जा रही है। विभाग का दावा है कि जल्द स्थिति सामान्य हो जाएगी, लेकिन फिलहाल किसान खाद के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं।
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तीन तक पहुंच जाएगी इफको की रैक
जिला कृषि अधिकारी डॉ. राजेश कुमार यादव ने बताया कि कुछ किसानों ने पहले ही डीएपी खरीद कर रखी है, जिससे अचानक मांग बढ़ गई। जून में अनुमानित मांग से अधिक खाद की बिक्री हुई है। कुछ केंद्रों पर स्टॉक खत्म हुआ है, लेकिन तीन जुलाई तक इफको की रैक गौरीगंज में उतरने की संभावना है। उसके बाद सभी केंद्रों पर डीएपी उपलब्ध हो जाएगी। उन्होंने कहा कि किसानों को खाद के लिए भटकना न पड़े, इसका प्रयास किया जा रहा है। आपूर्ति की मॉनिटरिंग लगातार की जा रही है।
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गांवों में धान की नर्सरी तैयार है। कई किसानों ने खेतों की भराई भी पूरी कर ली है, लेकिन डीएपी की अनुपलब्धता के कारण रोपाई में देरी हो रही है। जिले की 46 साधन सहकारी समितियों और 17 इफको केंद्रों में खाद नहीं है, जिससे किसान हताश हैं। किसान नेता हरीश सिंह, दिनेश तिवारी, हौसिला प्रसाद और अजय पटेल का कहना है कि हर साल डीएपी की मांग पहले से अनुमानित होती है, फिर भी पर्याप्त स्टॉक नहीं रखा गया है। रोपाई के समय खाद न मिलने से उपज पर असर पड़ सकता है।
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इफको और समितियों में खाद न मिलने से किसान निजी दुकानों पर जाने को मजबूर हैं, जहां प्रति बोरी अधिक कीमत ली जा रही है। कृषि विभाग के अनुसार जून में 1200 मीट्रिक टन डीएपी की जरूरत थी, जबकि करीब 1500 मीट्रिक टन की बिक्री हुई है। जुलाई में 2000 मीट्रिक टन की मांग बताई जा रही है। विभाग का दावा है कि जल्द स्थिति सामान्य हो जाएगी, लेकिन फिलहाल किसान खाद के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं।
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तीन तक पहुंच जाएगी इफको की रैक
जिला कृषि अधिकारी डॉ. राजेश कुमार यादव ने बताया कि कुछ किसानों ने पहले ही डीएपी खरीद कर रखी है, जिससे अचानक मांग बढ़ गई। जून में अनुमानित मांग से अधिक खाद की बिक्री हुई है। कुछ केंद्रों पर स्टॉक खत्म हुआ है, लेकिन तीन जुलाई तक इफको की रैक गौरीगंज में उतरने की संभावना है। उसके बाद सभी केंद्रों पर डीएपी उपलब्ध हो जाएगी। उन्होंने कहा कि किसानों को खाद के लिए भटकना न पड़े, इसका प्रयास किया जा रहा है। आपूर्ति की मॉनिटरिंग लगातार की जा रही है।