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Amethi News: नए रूप में दिखेगी धरमे धाम की तपोस्थली

Fri, 09 May 2025 12:18 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी Updated Fri, 09 May 2025 12:18 AM IST
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Dharme Dham's Tapasthali will be seen in a new form
इन्हौना (अमेठी)। राज्यमंत्री मंयकेश्वर शरण सिंह की पहल पर धरमे धाम के सौंदर्यीकरण प्रस्ताव को शासन से मंजूरी मिल गई है। सतयुग की साधना स्थली कहे जाने वाले धरमे धाम में अब श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी। तिलोई क्षेत्र के सैबंसी स्थित सिद्ध संत बाबा दूलनदास की तपोस्थली के सौंदर्यीकरण के लिए पर्यटन विभाग ने 72.74 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की है।
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पर्यटन विभाग की ओर से तिलोई क्षेत्र के सैबंसी स्थित बाबा दूलनदास की तपोस्थली का सौदर्यीकरण सहित लोगों की सुविधा का विकास कार्य के प्रस्ताव को पर्यटन विभाग ने मंजूरी देते हुए 72.74 लाख स्वीकृत किए है। जिला खादी एवं ग्रामोद्योग अधिकारी महेंद्र मिश्र ने बताया कि इस परियोजना से बाबा की तपोस्थली पर आने वाले श्रद्धालुओं को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
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जिला खादी ग्रामोद्योग अधिकारी महेंद्र मिश्र ने बताया कि पर्यटन विभाग की ओर से बाबा दूलनदास की तपोस्थली का सौदर्यीकरण व पर्यटकों की सुविधा से जुड़े कार्य काे पूरा करवाने का प्रस्ताव को मंजूरी दी है। स्वीकृत धनराशि से करमदही सगरा का सौंदर्यीकरण, पेयजल, प्रसाधन, प्रतीक्षालय की सुविधा, आश्रम परिसर में पार्किंग की व्यवस्था, मेले के दौरान दुकानदारों के लिए व्यवस्थाएं संग संपर्क मार्ग का पुनर्निर्माण व सुधार का काम किया जाएगा। यूपी प्रोजेक्ट्स कार्पोरेशन को कार्यदायी संस्था जो जल्द ही प्रस्तावित कार्यों को तय समय सीमा में पूरा करेगी।
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स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते
इन्हौना (अमेठी)। बाबा दूलनदास की तपोभूमि धरमे धाम तिलोई तहसील मुख्यालय से छह किलोमीटर दूर स्थित है। यह स्थान ‘सत्य नामी पंथ’ के अनुयायियों का प्रमुख गुरुद्वारा है। मान्यता है कि इसमें स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं। कार्तिक पूर्णिमा पर यहां विशाल मेला लगता है, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु व संत शामिल होते हैं। वर्तमान में महंत तेज प्रताप दास भदौरिया व अजीत प्रताप दास राठौर यहां की व्यवस्था देख रहे हैं। मेले की समुचित देखरेख श्यामू सिंह की ओर की जाती है। प्रत्येक पूर्णिमा को यहां श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है, लेकिन कार्तिक पूर्णिमा का मेला विशेष महत्व रखता है।
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