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Amethi News: बाबा मुकुटनाथ धाम में आज जुटेंगे श्रद्धालु
Mon, 14 Jul 2025 12:35 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Mon, 14 Jul 2025 12:35 AM IST
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अमेठी। ताला के महादेवन गांव स्थित बाबा मुकुटनाथ धाम शिवभक्तों की अटूट आस्था का प्रतीक है। अमेठी-गौरीगंज राजमार्ग पर स्थित यह प्राचीन शिवधाम पांडवों से जुड़ी मान्यता, दिव्य शिवलिंग और सावन में उमड़ती आस्था के कारण विशेष पहचान रखता है। सावन के पहले सोमवार को यहां श्रद्धालुओं की भीड़ जुटेगी।
पुजारी हरिहर गिरि महाराज ने बताया कि यह स्थान द्वापर युग से भी पहले का माना जाता है। महाभारत काल में वनवास के दौरान पांडवों ने यहां शिवलिंग की पूजा कर अपना मुकुट अर्पित किया था, तभी से यह स्थल बाबा मुकुटनाथ नाम से प्रसिद्ध हुआ। शिवलिंग की पुनः स्थापना के बाद 255 वर्ष पूर्व चबूतरा निर्मित किया गया। इस मंदिर की विशेषता यह भी है कि यहां का शिवलिंग जमीन से करीब बारह फीट ऊंचा है और दक्षिण भारत के रामेश्वरम शिवलिंग जैसा आकार लिए हुए है।
मान्यता है कि जब कभी क्षेत्र में सूखा पड़ता है तो शिवलिंग को पानी से पूरी तरह डुबो दिया जाता है, जिससे शीघ्र ही वर्षा होती है। शिवधाम परिसर में हनुमान मंदिर, नवनिर्मित मंदिर, नंदी महाराज समेत अन्य धार्मिक स्थल भी हैं। मलमास, महाशिवरात्रि और सावन में यहां दर्शनार्थियों की भारी भीड़ रहती है। ग्रामीणों के अनुसार कई बार इस मंदिर पर विदेशी आक्रमण भी हुए और अंग्रेजों ने इसकी खोदाई करवाई, लेकिन शिवलिंग बाहर नहीं निकला।
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मंदिर समिति ने बताया कि रविवार को सफाई, जल व्यवस्था, बैरिकेडिंग और लाउडस्पीकर व्यवस्था पूरी कर ली गई है। पुलिस प्रशासन की ओर से भी सुरक्षा बल तैनात रहेंगे। सोमवार को क्षेत्र के कई गांवों से कांवड़िए जल लेकर सुबह पांच बजे ही मंदिर पहुंच जाएंगे।
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पुजारी हरिहर गिरि महाराज ने बताया कि यह स्थान द्वापर युग से भी पहले का माना जाता है। महाभारत काल में वनवास के दौरान पांडवों ने यहां शिवलिंग की पूजा कर अपना मुकुट अर्पित किया था, तभी से यह स्थल बाबा मुकुटनाथ नाम से प्रसिद्ध हुआ। शिवलिंग की पुनः स्थापना के बाद 255 वर्ष पूर्व चबूतरा निर्मित किया गया। इस मंदिर की विशेषता यह भी है कि यहां का शिवलिंग जमीन से करीब बारह फीट ऊंचा है और दक्षिण भारत के रामेश्वरम शिवलिंग जैसा आकार लिए हुए है।
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मान्यता है कि जब कभी क्षेत्र में सूखा पड़ता है तो शिवलिंग को पानी से पूरी तरह डुबो दिया जाता है, जिससे शीघ्र ही वर्षा होती है। शिवधाम परिसर में हनुमान मंदिर, नवनिर्मित मंदिर, नंदी महाराज समेत अन्य धार्मिक स्थल भी हैं। मलमास, महाशिवरात्रि और सावन में यहां दर्शनार्थियों की भारी भीड़ रहती है। ग्रामीणों के अनुसार कई बार इस मंदिर पर विदेशी आक्रमण भी हुए और अंग्रेजों ने इसकी खोदाई करवाई, लेकिन शिवलिंग बाहर नहीं निकला।
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मंदिर समिति ने बताया कि रविवार को सफाई, जल व्यवस्था, बैरिकेडिंग और लाउडस्पीकर व्यवस्था पूरी कर ली गई है। पुलिस प्रशासन की ओर से भी सुरक्षा बल तैनात रहेंगे। सोमवार को क्षेत्र के कई गांवों से कांवड़िए जल लेकर सुबह पांच बजे ही मंदिर पहुंच जाएंगे।