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Amethi News: धैर्य व त्याग से कठिन राह भी हो जाती है आसान
Sun, 20 Sep 2026 12:47 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sun, 20 Sep 2026 12:47 AM IST
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राजाफत्तेपुर में कथा सुनते श्रद्धालु। स्रोत: आयोजक
राजाफत्तेपुर। बाबा परमहंस मैदान में चल रही श्रीराम कथा के पांचवें दिन प्रवाचक आनंद कृष्ण ने भगवान श्रीराम के वनगमन प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जीवन में परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, धैर्य और त्याग के साथ उनका सामना किया जाए तो कठिन राह भी आसान हो जाती है। श्रीराम ने पिता के वचन की मर्यादा रखने के लिए राजपाट और सुख-सुविधाओं का त्याग कर वन जाना स्वीकार किया।
प्रवाचक ने कहा कि श्रीराम के सामने राजसुख का अवसर था, लेकिन उन्होंने अपने कर्तव्य को प्राथमिकता दी। माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ वन की ओर प्रस्थान कर उन्होंने त्याग और मर्यादा का उदाहरण प्रस्तुत किया। वनगमन प्रसंग से सीख मिलती है कि विपरीत परिस्थितियों में घबराने के बजाय संयम बनाए रखना चाहिए और अपने दायित्वों से पीछे नहीं हटना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जीवन की राह में आने वाली कठिनाइयां व्यक्ति के धैर्य की परीक्षा लेती हैं। ऐसे समय में स्वार्थ से ऊपर उठकर सही निर्णय लेने और अपने वचन पर कायम रहने से मुश्किलें आसान हो सकती हैं। इस दौरान यजमान धर्मेंद्र त्रिवेदी, सचिन मिश्र, आलोक त्रिवेदी, अमन मिश्र, रिक्की तिवारी और अनुराग मिश्र आदि मौजूद रहे।
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प्रवाचक ने कहा कि श्रीराम के सामने राजसुख का अवसर था, लेकिन उन्होंने अपने कर्तव्य को प्राथमिकता दी। माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ वन की ओर प्रस्थान कर उन्होंने त्याग और मर्यादा का उदाहरण प्रस्तुत किया। वनगमन प्रसंग से सीख मिलती है कि विपरीत परिस्थितियों में घबराने के बजाय संयम बनाए रखना चाहिए और अपने दायित्वों से पीछे नहीं हटना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि जीवन की राह में आने वाली कठिनाइयां व्यक्ति के धैर्य की परीक्षा लेती हैं। ऐसे समय में स्वार्थ से ऊपर उठकर सही निर्णय लेने और अपने वचन पर कायम रहने से मुश्किलें आसान हो सकती हैं। इस दौरान यजमान धर्मेंद्र त्रिवेदी, सचिन मिश्र, आलोक त्रिवेदी, अमन मिश्र, रिक्की तिवारी और अनुराग मिश्र आदि मौजूद रहे।
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