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Amethi News: जनप्रतिनिधि बनने की चाह, खोज रहे सफलता की राह
Sat, 12 Jul 2025 12:10 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sat, 12 Jul 2025 12:10 AM IST
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अमेठी सिटी। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अगले साल होने हैं, लेकिन गांवों में इसकी तैयारियां अभी से शुरू हो गई हैं। नए-पुराने चेहरे जनता के बीच जाकर अपने पक्ष में जनमत संग्रह करने लगे हैं। इसके अलावा वे सोशल मीडिया पर भी सक्रिय हो गए हैं। गांवों में बैठकी का दौर भी शुरू हो गया है।
ग्राम प्रधान, बीडीसी, ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत सदस्य पद के संभावित दावेदार हो गए हैं। आरक्षण को लेकर अनुमान लगाए जा रहे हैं। कुछ गांवों में पूर्व प्रधान फिर प्रयासरत हैं, तो कई नई पीढ़ी के युवा गांव की जरूरतों को मुद्दा बनाकर आगे आ रहे हैं। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से भी तैयारियों की दिशा में हलचल तेज हुई है। जिला प्रशासन से पंचायतवार जनसंख्या, पिछले आरक्षण की स्थिति और विकास कार्यों का ब्योरा मांगा गया है। भले ही औपचारिक बैठक नहीं हुई है, लेकिन तहसील व विकास खंड स्तर पर पुराने आंकड़ों की छानबीन चल रही है।
ग्रामीणों का मानना है कि आरक्षण की अधिसूचना भले बाद में आए, लेकिन कई गांवों में रणनीति अभी से बन रही है। जिन गांवों में महिला या आरक्षित वर्ग की सदस्यता संभव मानी जा रही है, वहां यह विचार किया जा रहा है कि किसे सामने रखा जाए। पड़री के ग्राम प्रधान अश्वनी पांडेय का कहना है कि यह चुनाव पिछले के मुकाबले अधिक संघर्षपूर्ण हो सकता है। इस बार पांच वर्षों में हुए कार्यों, बदलती नीतियों और सरकारी योजनाओं से जुड़ी अपेक्षाएं मुकाबले को रोचक बनाएंगी।
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धनीजलालपुर के प्रधान रवि मिश्र कहते हैं कि प्रचार के लिए इस बार सोशल मीडिया का इस्तेमाल ज्यादा हो रहा है। खासकर फेसबुक और वाट्सएप का। ग्रुप बनाकर अपने पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास प्रत्याशी कर रहे हैं। पंचायत चुनावों को लेकर राजस्व अभिलेख, नक्शे और जनसंख्या आंकड़ों को विभागवार संकलित किया जा रहा है। माना जा रहा है कि आरक्षण सूची से पहले अंदरूनी तैयारी मुकम्मल कर ली जाएगी।
निजी कार्यक्रमों में पहुंच रहे भावी प्रत्याशी
चुनाव की सुगबुगाहट शुरू होने के बाद से ही संभावित उम्मीदवार गांव में लोगों के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज कराने लगे हैं। कोई शादी-ब्याह या समारोहों में खास रुचि दिखा रहा है तो कुछ जरूरतमंदों की मदद कर सामाजिक पहचान मजबूत करने में लगे हैं।
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ग्राम प्रधान, बीडीसी, ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत सदस्य पद के संभावित दावेदार हो गए हैं। आरक्षण को लेकर अनुमान लगाए जा रहे हैं। कुछ गांवों में पूर्व प्रधान फिर प्रयासरत हैं, तो कई नई पीढ़ी के युवा गांव की जरूरतों को मुद्दा बनाकर आगे आ रहे हैं। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से भी तैयारियों की दिशा में हलचल तेज हुई है। जिला प्रशासन से पंचायतवार जनसंख्या, पिछले आरक्षण की स्थिति और विकास कार्यों का ब्योरा मांगा गया है। भले ही औपचारिक बैठक नहीं हुई है, लेकिन तहसील व विकास खंड स्तर पर पुराने आंकड़ों की छानबीन चल रही है।
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ग्रामीणों का मानना है कि आरक्षण की अधिसूचना भले बाद में आए, लेकिन कई गांवों में रणनीति अभी से बन रही है। जिन गांवों में महिला या आरक्षित वर्ग की सदस्यता संभव मानी जा रही है, वहां यह विचार किया जा रहा है कि किसे सामने रखा जाए। पड़री के ग्राम प्रधान अश्वनी पांडेय का कहना है कि यह चुनाव पिछले के मुकाबले अधिक संघर्षपूर्ण हो सकता है। इस बार पांच वर्षों में हुए कार्यों, बदलती नीतियों और सरकारी योजनाओं से जुड़ी अपेक्षाएं मुकाबले को रोचक बनाएंगी।
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धनीजलालपुर के प्रधान रवि मिश्र कहते हैं कि प्रचार के लिए इस बार सोशल मीडिया का इस्तेमाल ज्यादा हो रहा है। खासकर फेसबुक और वाट्सएप का। ग्रुप बनाकर अपने पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास प्रत्याशी कर रहे हैं। पंचायत चुनावों को लेकर राजस्व अभिलेख, नक्शे और जनसंख्या आंकड़ों को विभागवार संकलित किया जा रहा है। माना जा रहा है कि आरक्षण सूची से पहले अंदरूनी तैयारी मुकम्मल कर ली जाएगी।
निजी कार्यक्रमों में पहुंच रहे भावी प्रत्याशी
चुनाव की सुगबुगाहट शुरू होने के बाद से ही संभावित उम्मीदवार गांव में लोगों के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज कराने लगे हैं। कोई शादी-ब्याह या समारोहों में खास रुचि दिखा रहा है तो कुछ जरूरतमंदों की मदद कर सामाजिक पहचान मजबूत करने में लगे हैं।