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अधूरी परियोजनाओं के लिए भी धन नहीं
अंबेडकरनगर / अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 17 Aug 2015 12:06 AM IST
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प्रदेश सरकार का अनुपूरक बजट सोमवार को आ रहा है। हालांकि इससे जनपदवासियों को बहुत अधिक उम्मीदें नहीं हैं। कारण यह कि पिछले बजट में जिले को पूरी तरह उपेक्षित किया गया था। किसी बड़ी परियोजना की बात तो दूर, वर्षों से लंबित परियोजनाओं के लिए ही सरकार के पास पैसा नहीं है। इसमें वीवीआईपी गेस्ट हाउस से लेकर लोहिया भवन तक शामिल है।
जिले की पांचों विधानसभा सीटों को सपा की झोली में डालने वाले जनपदवासियों को प्रदेश सरकार से विकास की जो उम्मीदें थीं, उसमें अधिकांशत: में मायूसी ही हाथ लगी है। अब तक किसी नई बड़ी परियोजना की सौगात जनपदवासियों को नहीं िमली। टांडा में अलग से महिला चिकित्सालय के शिलान्यास को छोड़ दिया जाए, तो कोई खास उपलब्धि नहीं मिली है। गत बजट में भी उपेक्षा ही मिल थी।
जिले को योजनाओं की सौगात देने की बात तो दूर राज्य सरकार पहले से लंबित चली आ रही परियोजनाओं को लेकर ही धन मुहैया नहीं करा पा रही है। बसपा सरकार ने जिले को वीवीआईपी गेस्ट हाउस की जो सौगात दी थी, उसके लिए मौजूदा सरकार धन मुहैया नहीं करा पा रही है।
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1 करोड़ 10 लाख रुपये निर्माण पूरा कराने के लिए कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम को चाहिए, लेकिन यह रकम नहीं मिल पा रही। अब 91 लाख रुपये लोकनिर्माण विभाग को सोफा, बेड व अन्य साजसज्जा के लिए चाहिए, जिससे वहां रुकने लायक व्यवस्था हो सके। यह मामूली रकम भी राज्य सरकार पिछले 1 वर्ष से अधिक समय से नहीं दे पा रही है।
समाजवाद के प्ररणेता रहे डा राममनोहर लोहिया की जन्मस्थली पर उनके नाम पर बन रहे लोहिया भवन के लिए भी सरकार के पास पैसा नहीं है। जिले के एकमात्र डा अंबेडकर राजकीय उद्यान की व्यवस्था को सुधारने के लिए लगभग 50 लाख का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था, उसकी भी मंजूरी अब तक शासन से नहीं मिल पाई है।
इसमें लगभग 25 लाख रुपये की लागत से पार्क में ट्वाय ट्रेन चलाने का लक्ष्य था। पार्क में नौका विहार को लेकर भी प्रस्ताव इसी परियोजना में शामिल किया गया था, लेकिन उसे मंजूरी नहीं मिल पाई है। खेल स्टेडियम सहित दर्जनों अन्य परियोजनाओं का भी है, जिसे सरकार के रहमोकरम का इंतजार है।
अकबरपुर से दोस्तपुर तक का मार्ग में अभी लगभग तीन किमी का काम ठप है। अब उसका पैसा कब और कैसे मिलेगा यह बताने वाला कोई नहीं है। स्थानाभाव का संकट झेल रहे अकबरपुर डिपो के लिए भी राज्य सरकार कोई व्यवस्था नहीं तय कर सकी है।
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जिले की पांचों विधानसभा सीटों को सपा की झोली में डालने वाले जनपदवासियों को प्रदेश सरकार से विकास की जो उम्मीदें थीं, उसमें अधिकांशत: में मायूसी ही हाथ लगी है। अब तक किसी नई बड़ी परियोजना की सौगात जनपदवासियों को नहीं िमली। टांडा में अलग से महिला चिकित्सालय के शिलान्यास को छोड़ दिया जाए, तो कोई खास उपलब्धि नहीं मिली है। गत बजट में भी उपेक्षा ही मिल थी।
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जिले को योजनाओं की सौगात देने की बात तो दूर राज्य सरकार पहले से लंबित चली आ रही परियोजनाओं को लेकर ही धन मुहैया नहीं करा पा रही है। बसपा सरकार ने जिले को वीवीआईपी गेस्ट हाउस की जो सौगात दी थी, उसके लिए मौजूदा सरकार धन मुहैया नहीं करा पा रही है।
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1 करोड़ 10 लाख रुपये निर्माण पूरा कराने के लिए कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम को चाहिए, लेकिन यह रकम नहीं मिल पा रही। अब 91 लाख रुपये लोकनिर्माण विभाग को सोफा, बेड व अन्य साजसज्जा के लिए चाहिए, जिससे वहां रुकने लायक व्यवस्था हो सके। यह मामूली रकम भी राज्य सरकार पिछले 1 वर्ष से अधिक समय से नहीं दे पा रही है।
समाजवाद के प्ररणेता रहे डा राममनोहर लोहिया की जन्मस्थली पर उनके नाम पर बन रहे लोहिया भवन के लिए भी सरकार के पास पैसा नहीं है। जिले के एकमात्र डा अंबेडकर राजकीय उद्यान की व्यवस्था को सुधारने के लिए लगभग 50 लाख का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था, उसकी भी मंजूरी अब तक शासन से नहीं मिल पाई है।
इसमें लगभग 25 लाख रुपये की लागत से पार्क में ट्वाय ट्रेन चलाने का लक्ष्य था। पार्क में नौका विहार को लेकर भी प्रस्ताव इसी परियोजना में शामिल किया गया था, लेकिन उसे मंजूरी नहीं मिल पाई है। खेल स्टेडियम सहित दर्जनों अन्य परियोजनाओं का भी है, जिसे सरकार के रहमोकरम का इंतजार है।
अकबरपुर से दोस्तपुर तक का मार्ग में अभी लगभग तीन किमी का काम ठप है। अब उसका पैसा कब और कैसे मिलेगा यह बताने वाला कोई नहीं है। स्थानाभाव का संकट झेल रहे अकबरपुर डिपो के लिए भी राज्य सरकार कोई व्यवस्था नहीं तय कर सकी है।