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Ambedkar Nagar News: शहीदों को समर्पित मुशायरे में गूंजे देशभक्ति के तराने
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टांडा के अलीगंज स्थित सालारगढ़ मैदान में रविवार रात आयोजित एक शाम शहीदों के नाम मुशायरा व कवि स
विद्युतनगर। टांडा के अलीगंज स्थित सालारगढ़ मैदान में रविवार रात ‘एक शाम शहीदों के नाम’ मुशायरा एवं कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें शायरों और कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से देश के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। साथ ही देशभक्ति, आपसी भाईचारे, एकता और सामाजिक सौहार्द का संदेश दिया। कार्यक्रम में टांडा विधायक राममूर्ति वर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
मुशायरे में चांदनी शबनम ने अपने शेरों से श्रोताओं का ध्यान खींचा। अली बाराबंकवी ने अपनी शायरी में भाई के सहारे और रिश्तों की अहमियत बयां की। इंसाफ टांडवी ने वतन के प्रति समर्पण व्यक्त करते हुए कहा, ‘ऐ वतन तू ही हमारी शान है, तुझ पर यह दिल और जान कुर्बान है।’ वहीं, कुमैल सिद्दीकी ने सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक हकदारों तक पहुंचाने का मुद्दा उठाया। हकीम इरफान आजमी ने रिश्तों की जटिलताओं को अपनी रचना में पिरोया।
कार्यक्रम में हनीफ कुरैशी, अबुशाद आजमी, सोनू हिंदुस्तानी, रिजवान टांडवी, मोहम्मद मजाहिर टांडवी, शगुफ्ता लखनवी, शाद अकबरपुरी, उजमा सिद्दीकी, ताहिर अब्बास लखनवी, अहमद परवाज आजमी और नाजो नाज इलाहाबादी समेत अन्य शायरों व कवियों ने कलाम पेश किया। देर रात तक शेरो-शायरी और कविताओं का दौर चलता रहा। रचनाओं पर श्रोताओं ने तालियां बजाकर रचनाकारों का उत्साह बढ़ाया। अंत में जफर इकबाल ने सभी आगंतुकों के प्रति आभार जताया। इस दौरान मोहम्मद असलम खान, जफर हयात, कुमैल टांडवी समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
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मुशायरे में चांदनी शबनम ने अपने शेरों से श्रोताओं का ध्यान खींचा। अली बाराबंकवी ने अपनी शायरी में भाई के सहारे और रिश्तों की अहमियत बयां की। इंसाफ टांडवी ने वतन के प्रति समर्पण व्यक्त करते हुए कहा, ‘ऐ वतन तू ही हमारी शान है, तुझ पर यह दिल और जान कुर्बान है।’ वहीं, कुमैल सिद्दीकी ने सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक हकदारों तक पहुंचाने का मुद्दा उठाया। हकीम इरफान आजमी ने रिश्तों की जटिलताओं को अपनी रचना में पिरोया।
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कार्यक्रम में हनीफ कुरैशी, अबुशाद आजमी, सोनू हिंदुस्तानी, रिजवान टांडवी, मोहम्मद मजाहिर टांडवी, शगुफ्ता लखनवी, शाद अकबरपुरी, उजमा सिद्दीकी, ताहिर अब्बास लखनवी, अहमद परवाज आजमी और नाजो नाज इलाहाबादी समेत अन्य शायरों व कवियों ने कलाम पेश किया। देर रात तक शेरो-शायरी और कविताओं का दौर चलता रहा। रचनाओं पर श्रोताओं ने तालियां बजाकर रचनाकारों का उत्साह बढ़ाया। अंत में जफर इकबाल ने सभी आगंतुकों के प्रति आभार जताया। इस दौरान मोहम्मद असलम खान, जफर हयात, कुमैल टांडवी समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
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