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Ambedkar Nagar News: चावल के बकाया भुगतान मामले में आरोपी को राहत
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अंबेडकरनगर। चावल की आपूर्ति के बाद 2.76 करोड़ रुपये भुगतान बकाया रहने के मामले में आरोपी गिरीश शर्मा को अग्रिम जमानत मिल गई है। प्रभारी सत्र न्यायाधीश पवन कुमार शुक्ला ने उनकी अर्जी स्वीकार करते हुए गिरफ्तारी की स्थिति में 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और समान धनराशि के दो जमानतदारों पर रिहा करने का आदेश दिया।
मामला टांडा कोतवाली में वर्ष 2016 में दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है। इस्माइलपुर बेल्दहा स्थित चौहान राइस मिल के प्रोपराइटर जवाहर लाल चौहान ने आरोप लगाया था कि पटियाला स्थित गौरी राइस इंडस्ट्रीज को जुगुल किशोर शर्मा और गिरीश शर्मा के माध्यम से 15 ट्रक चावल भेजा गया था। इसके एवज में 27 जनवरी 2015 तक 2,76,64,200 रुपये बकाया थे। बार-बार आश्वासन के बावजूद भुगतान न होने पर उन्होंने मुकदमा दर्ज कराया था। विवेचना के बाद पुलिस ने धोखाधड़ी और अमानत में खयानत की धाराओं में आरोपपत्र दाखिल किया।
गिरीश शर्मा ने जमानत अर्जी में खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि उन्हें अनावश्यक वसूली के लिए झूठा फंसाया गया है। उनका दावा था कि शिकायतकर्ता ने न तो उन्हें माल बेचा और न ही कोई रकम दी। अभियोजन ने जमानत का विरोध किया।
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न्यायालय ने पाया कि विवेचना के दौरान आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई और असहयोग की रिपोर्ट भी नहीं थी। हालांकि, अभियोजन ने एक अन्य आपराधिक मामले का इतिहास पेश किया। न्यायालय ने गुण-दोष पर टिप्पणी किए बिना अग्रिम जमानत मंजूर कर ली।
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मामला टांडा कोतवाली में वर्ष 2016 में दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है। इस्माइलपुर बेल्दहा स्थित चौहान राइस मिल के प्रोपराइटर जवाहर लाल चौहान ने आरोप लगाया था कि पटियाला स्थित गौरी राइस इंडस्ट्रीज को जुगुल किशोर शर्मा और गिरीश शर्मा के माध्यम से 15 ट्रक चावल भेजा गया था। इसके एवज में 27 जनवरी 2015 तक 2,76,64,200 रुपये बकाया थे। बार-बार आश्वासन के बावजूद भुगतान न होने पर उन्होंने मुकदमा दर्ज कराया था। विवेचना के बाद पुलिस ने धोखाधड़ी और अमानत में खयानत की धाराओं में आरोपपत्र दाखिल किया।
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गिरीश शर्मा ने जमानत अर्जी में खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि उन्हें अनावश्यक वसूली के लिए झूठा फंसाया गया है। उनका दावा था कि शिकायतकर्ता ने न तो उन्हें माल बेचा और न ही कोई रकम दी। अभियोजन ने जमानत का विरोध किया।
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न्यायालय ने पाया कि विवेचना के दौरान आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई और असहयोग की रिपोर्ट भी नहीं थी। हालांकि, अभियोजन ने एक अन्य आपराधिक मामले का इतिहास पेश किया। न्यायालय ने गुण-दोष पर टिप्पणी किए बिना अग्रिम जमानत मंजूर कर ली।