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Ambedkar Nagar News: आभा आईडी के फेर में घंटों लाइन में लगे मरीज
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मेडिकल कॉलेज में बुधवार को परचा काउंटर पर लगी कतार। संवाद
सद्दरपुर। महामाया राजकीय मेडिकल कॉलेज में मरीजों के पंजीकरण के लिए आभा आईडी अनिवार्य किए जाने से ओपीडी में परचा बनवाने की प्रक्रिया धीमी हो गई है। बुधवार को नए मरीजों का आभा आईडी के माध्यम से पंजीकरण किया गया। इसके चलते परचा काउंटरों पर सुबह से ही लंबी कतार लग गई। मरीजों और तीमारदारों को घंटों इंतजार करना पड़ा। कई मरीज समय से चिकित्सक तक नहीं पहुंच सके।
मेडिकल कॉलेज में रोजाना करीब 1500 से 2000 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। बुधवार को सुबह नौ बजे से ही ओपीडी में मरीजों की भीड़ जुटने लगी। परचा काउंटर पर पहुंचने के बाद पहले आभा आईडी बनाई जा रही थी। इसके बाद ही पंजीकरण कर परचा जारी किया जा रहा था। एक मरीज की प्रक्रिया पूरी करने में करीब 10 से 15 मिनट लग रहे थे। इससे काउंटरों पर लगातार भीड़ बढ़ती गई।
कतार में बुजुर्गों के अलावा महिलाएं और छोटे बच्चों के साथ आए तीमारदार भी शामिल रहे। दोपहर करीब दो बजे तक मरीज परचा बनवाने के लिए लाइन में खड़े रहे। कई लोगों का कहना था कि पहले कुछ ही समय में ओपीडी का परचा बन जाता था, लेकिन आभा आईडी बनाने की प्रक्रिया में अधिक समय लग रहा है। इससे डॉक्टर को दिखाने के साथ ही जांच और दवा लेने में भी देरी हुई।
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दो घंटे से अधिक इंतजार के बाद बना परचा
ब्राहिमपुर चुरावन निवासी अनिल कुमार पेट में संक्रमण की समस्या का उपचार कराने पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि सुबह करीब 10 बजे लाइन में लगे थे। दोपहर 1:45 बजे तक परचा काउंटर तक पहुंच सके, लेकिन प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई। उन्होंने कहा कि अब डॉक्टर को कब दिखा पाएंगे और दवा कब मिलेगी, यह समझ नहीं आ रहा। बेलहरी गांव निवासी अंकुर वर्मा वायरल बुखार की दवा लेने पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि सुबह से ही मेडिकल कॉलेज में भीड़ थी। परचा काउंटर पर धीमी प्रक्रिया के कारण दो घंटे से अधिक समय लगने के बाद उनका परचा बन सका।
आभा आईडी पर ही होगा उपचार
मेडिकल कॉलेज के मीडिया प्रभारी डॉ. विवेक श्रीवास्तव ने बताया कि आभा आईडी के माध्यम से ही मरीजों का उपचार किया जाना है। इसके लिए मरीजों और तीमारदारों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। आभा आईडी बनाने में समय लगने के कारण शुरुआत में प्रक्रिया में कुछ अधिक समय लग रहा है। बुधवार को पूरी तरह आभा आईडी के आधार पर उपचार किया गया। जिन लोगों के पास मोबाइल नहीं था, उन्हें थोड़ी सहूलियत दी गई।
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मेडिकल कॉलेज में रोजाना करीब 1500 से 2000 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। बुधवार को सुबह नौ बजे से ही ओपीडी में मरीजों की भीड़ जुटने लगी। परचा काउंटर पर पहुंचने के बाद पहले आभा आईडी बनाई जा रही थी। इसके बाद ही पंजीकरण कर परचा जारी किया जा रहा था। एक मरीज की प्रक्रिया पूरी करने में करीब 10 से 15 मिनट लग रहे थे। इससे काउंटरों पर लगातार भीड़ बढ़ती गई।
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कतार में बुजुर्गों के अलावा महिलाएं और छोटे बच्चों के साथ आए तीमारदार भी शामिल रहे। दोपहर करीब दो बजे तक मरीज परचा बनवाने के लिए लाइन में खड़े रहे। कई लोगों का कहना था कि पहले कुछ ही समय में ओपीडी का परचा बन जाता था, लेकिन आभा आईडी बनाने की प्रक्रिया में अधिक समय लग रहा है। इससे डॉक्टर को दिखाने के साथ ही जांच और दवा लेने में भी देरी हुई।
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दो घंटे से अधिक इंतजार के बाद बना परचा
ब्राहिमपुर चुरावन निवासी अनिल कुमार पेट में संक्रमण की समस्या का उपचार कराने पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि सुबह करीब 10 बजे लाइन में लगे थे। दोपहर 1:45 बजे तक परचा काउंटर तक पहुंच सके, लेकिन प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई। उन्होंने कहा कि अब डॉक्टर को कब दिखा पाएंगे और दवा कब मिलेगी, यह समझ नहीं आ रहा। बेलहरी गांव निवासी अंकुर वर्मा वायरल बुखार की दवा लेने पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि सुबह से ही मेडिकल कॉलेज में भीड़ थी। परचा काउंटर पर धीमी प्रक्रिया के कारण दो घंटे से अधिक समय लगने के बाद उनका परचा बन सका।
आभा आईडी पर ही होगा उपचार
मेडिकल कॉलेज के मीडिया प्रभारी डॉ. विवेक श्रीवास्तव ने बताया कि आभा आईडी के माध्यम से ही मरीजों का उपचार किया जाना है। इसके लिए मरीजों और तीमारदारों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। आभा आईडी बनाने में समय लगने के कारण शुरुआत में प्रक्रिया में कुछ अधिक समय लग रहा है। बुधवार को पूरी तरह आभा आईडी के आधार पर उपचार किया गया। जिन लोगों के पास मोबाइल नहीं था, उन्हें थोड़ी सहूलियत दी गई।