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अफसर बदले, मगर समस्याएं जस की तस
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अंबेडकरनगर। राज्य सरकार की तमाम कोशिशों के बाद भी जिले में समाधान दिवसों पर आने वाली शिकायतों का निस्तारण सिर्फ फर्ज अदायगी बनकर रह गया है। कोई तीन-चार वर्षों से तो कोई एक दशक से अपनी समस्या के निस्तारण को लेकर सिर्फ चक्कर काटने को ही विवश है। कई सरकारें आईं गईं और कई अधिकारियों की कुर्सी भी बदली, लेकिन तमाम पीड़ितों की समस्या जस की तस बनी रही।
नतीजा यह कि ऐसे पीड़ितों की तमाम उम्मीदें सरकारों व अफसरों के लाख दावों के बावजूद सिर्फ चकनाचूर ही होती रहती हैं। अमर उजाला टीम ने मंगलवार को तहसील मुख्यालयों पर होने वाले संपूर्ण समाधान दिवसों का जायजा लिया, तो ऐसे कई फरियादी निराश व परेशान दिखाई दिए, जो अपनी समस्या के निस्तारण की उम्मीद लगाकर तहसीलों में पहुंचे थे। ऐसे पीड़ितों ने एक बार फिर से अपनी समस्या का प्रार्थनापत्र अफसरों को सौंपा, लेकिन पिछले इस बार भी सिर्फ आश्वासन ही मिला। अमर उजाला ने ऐसे कई फरियादियों से बातचीत की।
14 बार प्रार्थनापत्र दिया, नहीं मिला न्याय
पुश्तैनी रास्ते पर विपक्षियों की ओर से कब्जा कर लिए जाने की शिकायत लेकर तहसील मुख्यालय पहुंचे भीटी थाना अंतर्गत रानीपुर मोहन गांव निवासी धर्मेंद्र पांडेय ने कहा कि वह 14वीं बार शिकायतीपत्र सौंप रहा है। आठ बार थाना समाधान दिवस में, तो बीते दिनों एसडीएम से लेकर डीएम तक से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका है। नतीजा यह है कि विपक्षियों का कब्जा बरकरार है और अब तो उस पर निर्माण कार्य भी प्रारंभ कर दिया गया है। इसकी भी शिकायत जिम्मेदारों से की गई, लेकिन न्याय नहीं मिल सका।
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दो वर्ष से नहीं हो सकी भूमि पैमाइश
दो वर्ष से पुश्तैनी भूमि की पैमाइश के लिए जिम्मेदारों के कार्यालय का चक्कर लगाने वाली जैतपुर थाना अंतर्गत सोहगूपुर गांव निवासी साजिदा खातून ने कहा कि वह न्याय के लिए भटक रही हैं, लेकिन कोई सुध लेने वाला नहीं है। 11 बार संपूर्ण समाधान दिवस, तो छह बार थाना समाधान दिवस में प्रार्थनापत्र दे चुकी हैं। इसके बावजूद न तो पैमाइश कराई जा रही है और न ही अवैध कब्जा करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई ही की जा रही है।
छह बार की शिकायत, आश्वासन ही मिला
कटका थाना क्षेत्र के लवइया गांव निवासी रामविलास ने कहा कि उसकी भूमि पर गांव के ही विपक्षियों ने कब्जा कर रखा है। इसकी शिकायत कई बार जिम्मेदारों से की भी गई, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। चार बार संपूर्ण समाधान दिवस तो दो बार थाना समाधान दिवस पर शिकायतीपत्र जिम्मेदारों को सौंप चुके हैं, लेकिन सिर्फ आश्वासन ही दिया जाता है। इसे लेकर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका है।
चकमार्ग पर विपक्षियों ने किया कब्जा
अकबरपुर में संपूर्ण समाधान दिवस में शिकायती पत्र सौंपकर बाहर निकले मालीपुर थाना अंतर्गत सैदपुर भितरी गांव निवासी कुंजबिहारी ने कहा कि उसके चक मार्ग पर विपक्षियों ने कब्जा वर्ष 2016 में कर लिया था। इसकी शिकायत कई बार जिम्मेदारों से की गई, लेकिन कोई कार्रवाई अब तक नहीं की जा सकी है। नतीजा यह है कि विपक्षी अब चकमार्ग पर निर्माण कराने लगे हैं। ऐसे में एक बार फिर से उसने शिकायतीपत्र सौंपा है। कार्रवाई का आश्वासन मिला है।
चार वर्ष में नहीं हो सकी कार्रवाई
महरुआ थाना अंतर्गत पतौना निवासी हरीलाल ने कहा कि वर्ष 2017 में प्रधानमंत्री ग्रामीण आवासीय योजना का लाभ मिला था। 16 जून 2017 को प्रथम किस्त के रूप में 40 हजार, एक नवंबर 2017 को दूसरी किस्त के रूप में 70 हजार, जबकि दो मई 2018 को तीसरी किस्त के रूप में 10 हजार रुपये की राशि खाते में आई। तत्कालीन जनप्रतिनिधि व अधिकारी ने मिलीभगत कर उसकी दूसरी किस्त हड़प ली। इससे आवास का निर्माण अधर में लटका है। मामले में कार्रवाई के लिए तब से संपूर्ण समाधान दिवस से लेकर संबंधित अधिकारियों का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन कोई कार्रवाई अब तक नहीं की जा सकी है।
प्राथमिकता से कराया जाता है निस्तारण
समाधान दिवस हों या फिर कार्यालयों में आने वाले प्रार्थनापत्र। ऐसे सभी प्रार्थनापत्रों का निस्तारण प्राथमिकता के तौर पर कराया जा रहा है। कई बार कानूनी प्रक्रिया व अन्य कठिनाइयों के चलते कुछ मामलों के निस्तारण में विलंब होता है, लेकिन ज्यादातर मामलों का निस्तारण तत्परतापूर्वक कराया जा रहा है।
- डॉ. पंकज कुमार वर्मा, एडीएम
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नतीजा यह कि ऐसे पीड़ितों की तमाम उम्मीदें सरकारों व अफसरों के लाख दावों के बावजूद सिर्फ चकनाचूर ही होती रहती हैं। अमर उजाला टीम ने मंगलवार को तहसील मुख्यालयों पर होने वाले संपूर्ण समाधान दिवसों का जायजा लिया, तो ऐसे कई फरियादी निराश व परेशान दिखाई दिए, जो अपनी समस्या के निस्तारण की उम्मीद लगाकर तहसीलों में पहुंचे थे। ऐसे पीड़ितों ने एक बार फिर से अपनी समस्या का प्रार्थनापत्र अफसरों को सौंपा, लेकिन पिछले इस बार भी सिर्फ आश्वासन ही मिला। अमर उजाला ने ऐसे कई फरियादियों से बातचीत की।
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14 बार प्रार्थनापत्र दिया, नहीं मिला न्याय
पुश्तैनी रास्ते पर विपक्षियों की ओर से कब्जा कर लिए जाने की शिकायत लेकर तहसील मुख्यालय पहुंचे भीटी थाना अंतर्गत रानीपुर मोहन गांव निवासी धर्मेंद्र पांडेय ने कहा कि वह 14वीं बार शिकायतीपत्र सौंप रहा है। आठ बार थाना समाधान दिवस में, तो बीते दिनों एसडीएम से लेकर डीएम तक से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका है। नतीजा यह है कि विपक्षियों का कब्जा बरकरार है और अब तो उस पर निर्माण कार्य भी प्रारंभ कर दिया गया है। इसकी भी शिकायत जिम्मेदारों से की गई, लेकिन न्याय नहीं मिल सका।
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दो वर्ष से नहीं हो सकी भूमि पैमाइश
दो वर्ष से पुश्तैनी भूमि की पैमाइश के लिए जिम्मेदारों के कार्यालय का चक्कर लगाने वाली जैतपुर थाना अंतर्गत सोहगूपुर गांव निवासी साजिदा खातून ने कहा कि वह न्याय के लिए भटक रही हैं, लेकिन कोई सुध लेने वाला नहीं है। 11 बार संपूर्ण समाधान दिवस, तो छह बार थाना समाधान दिवस में प्रार्थनापत्र दे चुकी हैं। इसके बावजूद न तो पैमाइश कराई जा रही है और न ही अवैध कब्जा करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई ही की जा रही है।
छह बार की शिकायत, आश्वासन ही मिला
कटका थाना क्षेत्र के लवइया गांव निवासी रामविलास ने कहा कि उसकी भूमि पर गांव के ही विपक्षियों ने कब्जा कर रखा है। इसकी शिकायत कई बार जिम्मेदारों से की भी गई, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। चार बार संपूर्ण समाधान दिवस तो दो बार थाना समाधान दिवस पर शिकायतीपत्र जिम्मेदारों को सौंप चुके हैं, लेकिन सिर्फ आश्वासन ही दिया जाता है। इसे लेकर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका है।
चकमार्ग पर विपक्षियों ने किया कब्जा
अकबरपुर में संपूर्ण समाधान दिवस में शिकायती पत्र सौंपकर बाहर निकले मालीपुर थाना अंतर्गत सैदपुर भितरी गांव निवासी कुंजबिहारी ने कहा कि उसके चक मार्ग पर विपक्षियों ने कब्जा वर्ष 2016 में कर लिया था। इसकी शिकायत कई बार जिम्मेदारों से की गई, लेकिन कोई कार्रवाई अब तक नहीं की जा सकी है। नतीजा यह है कि विपक्षी अब चकमार्ग पर निर्माण कराने लगे हैं। ऐसे में एक बार फिर से उसने शिकायतीपत्र सौंपा है। कार्रवाई का आश्वासन मिला है।
चार वर्ष में नहीं हो सकी कार्रवाई
महरुआ थाना अंतर्गत पतौना निवासी हरीलाल ने कहा कि वर्ष 2017 में प्रधानमंत्री ग्रामीण आवासीय योजना का लाभ मिला था। 16 जून 2017 को प्रथम किस्त के रूप में 40 हजार, एक नवंबर 2017 को दूसरी किस्त के रूप में 70 हजार, जबकि दो मई 2018 को तीसरी किस्त के रूप में 10 हजार रुपये की राशि खाते में आई। तत्कालीन जनप्रतिनिधि व अधिकारी ने मिलीभगत कर उसकी दूसरी किस्त हड़प ली। इससे आवास का निर्माण अधर में लटका है। मामले में कार्रवाई के लिए तब से संपूर्ण समाधान दिवस से लेकर संबंधित अधिकारियों का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन कोई कार्रवाई अब तक नहीं की जा सकी है।
प्राथमिकता से कराया जाता है निस्तारण
समाधान दिवस हों या फिर कार्यालयों में आने वाले प्रार्थनापत्र। ऐसे सभी प्रार्थनापत्रों का निस्तारण प्राथमिकता के तौर पर कराया जा रहा है। कई बार कानूनी प्रक्रिया व अन्य कठिनाइयों के चलते कुछ मामलों के निस्तारण में विलंब होता है, लेकिन ज्यादातर मामलों का निस्तारण तत्परतापूर्वक कराया जा रहा है।
- डॉ. पंकज कुमार वर्मा, एडीएम