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आसमान से गिर रही थीं मिसाइलें, सुरक्षित घर वापसी चमत्कार

Fri, 04 Mar 2022 11:38 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 04 Mar 2022 11:38 PM IST
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Missiles were falling from the sky, miracle of safe return home
अंबेडकरनगर के टांडा में यूक्रेन से वापस लौटा एमबीबीएस का छात्र हर्ष। - फोटो : AMBEDKAR NAGAR
टांडा (अंबेडकरनगर)। आसमान से गिर रही मिसाइलों के बीच सुरक्षित घर वापसी टांडा कोतवाली क्षेत्र के हयातगंज निवासी हर्ष मिश्र के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है। तीन दिन तक भूखे प्यासे रहने के बाद पोलैंड बार्डर तक पहुंचने की 23 किलोमीटर लंबी पैदल यात्रा कभी नही भुलायी जा सकती। आसपास हो रहे मिसालों के धमाकों के बीच हाड़ कंपाती ठंड ने जीने की उम्मीद को पूरी तरह धूमिल बना दिया था। युद्ध से डरे सहमे लोगों को बार्डर पार करने से रोकने के लिए यूक्रेनी सैनिक भी बर्बरता पर उतारू थे।
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ऐसे में तिरंगे की शान के सहारे भारतीय छात्रों का दल सुरक्षित बार्डर पार कर वतन वापसी के लिए सरकार द्वारा पोलैंड भेजे गए विमान पर सवार हुआ। दिल्ली से लखनऊ आने के बाद गुरुवार देर शाम टांडा पहुंचे हर्ष के परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू झलक पड़े उन्होंने अपने लाल को कसकर सीने से चिपका लिया। सुदूर देश से जान की बाजी लगाकर सुरक्षित वापस लौटे हर्ष को देखकर हर कोई खुश नजर आ रहा था। टांडा नगर के हयातगंज का निवासी हर्ष मिश्र यूक्रेन के लवीव शहर के लवीब नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में डाक्टरी की पढ़ाई कर रहा था।
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इसी दौरान 24 फरवरी को रूस के हमले के बाद शुरू हुए युद्ध में वह भी बाकी भारतीय बच्चों की तरह यूक्रेन में ही फंस गया। इस कारण हर्ष के सुरक्षित वतन वापसी को लेकर यहां रहने वाले परिजन भी परेशानहाल थे। ऐसे में तमाम आशंकाओं को निर्मूल साबित करते हुए अपने वतन अपने घर वापस लौटा हर्ष वहां के हालात का जिक्र करते हुए भावुक हो उठता है। शुक्रवार को अमर उजाला से हुई बातचीत में हर्ष ने बताया कि यूक्रेन पर हुए हमले के बाद ही ऐलान किया गया कि सायरन बजते ही सभी छात्र बंकर में चले जाएं। ऐसी हालात में दो दिन तक भूखे प्यासे ही बंकर में छिपे रहना पड़ा। तीसरे दिन भारतीय दूतावास से मिली सूचना के बाद 50 भारतीय छात्रों का ग्रुप कैब से पोलैंड बार्डर के लिए रवाना हुआ। बार्डर पहुंचने से काफी पहले ही उन सभी को कैब से उतार दिया गया।
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कड़ाके की ठंड में भूखे प्यासे चले 23 किमी
कड़ाके की ठंड में 23 किलोमीटर की दूरी हम सभी को भूखे प्यासे ही पैदल चलकर ही तय करनी पड़ी। बताया कि मिसाइल कब और कहां गिरेगी इसका कोई ठिकाना नही था। किसी तरह वह लोग बार्डर पहुंचे तो वहां का नजारा हैरान करने वाला था। बार्डर से सुरक्षित पार निकलने को लाखों की भीड़ पहले से जुटी थी। इस दौरान यूक्रेनी सैनिक बर्बरता के साथ इन सभी को बार्डर पार करने से रोक रहे थे। बार्डर पर कटीलें तार भी लगाए गए थे। बार्डर पार करने के दौरान कुछ भारतीय छात्रों को भी पुलिस की लाठियां लगी लेकिन भारतीय तिरंगे की शान को देख सीना गर्व से चौड़ा हो गया।

पोलैंड पहुंचे तो लगा सुरक्षित बच निकले
यूक्रेनी सैनिकों ने बाद में भारतीय झंडे के साथ पहुंचे छात्रों के दल को प्राथमिकता पर सुरक्षित बार्डर पार करा कर पोलैंड में प्रवेश कराया। पोलैंड बार्डर पर हमें भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने रिसीव कर पहले एक होटल में ठहराने की व्यवस्था कर भोजन इत्यादि उपलब्ध करवाया तब जाकर युद्ध क्षेत्र से सुरक्षित बच निकलने का सुखद एहसास हम सभी को हुआ। यहां पर दो दिन ठहरने के बाद हम सभी को भारतीय सेना के विशेष विमान से दिल्ली पहुंचाया गया। दिल्ली से उत्तर प्रदेश सरकार के विशेष वाहन ने हमें गुरुवार देर शाम को टांडा स्थित घर तक सुरक्षित पहुंचाया।
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