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स्वतंत्रता मिली पर सुरक्षा नहीं
अमर उजाला ब्यूरो/ अंबेडकरनगर
Updated Mon, 10 Aug 2015 11:44 PM IST
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भ्रष्टाचार व अन्याय को लेकर भी वे चिंतित दिखे। बोले की इससे आम लोगों का हक मारा जाता है। इस सामाजिक समस्या को दूर किए गए बगैर जरूरतमंदों को उनका हक नहीं दिया जा सकेगा।
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अवध की धरती ने आजादी के आन्दोलन में अपनी अग्रणी भूमिका निभाई थी। अलग अलग क्षेत्रों में जाकर जिले के तमाम आजादी के दीवानों ने इतिहास रचने का काम किया। इन्हीं में से एक नाम शुमार है शेखूपुर गांव निवासी श्रीराम वर्मा का। लगभग 12 वर्ष की उम्र से ही उन्होंने आजादी के आंदोलन में अपना सहयोग देना शुरू कर दिया था।
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वे जलालपुर तहसील क्षेत्र के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी राजबली यादव के साथ ही अक्सर रहा करतेे थे। वर्ष 1942 में उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत का विरोध करने के लिए जाफरगंज रेलवे स्टेशन के निकट रेलवे का तार काट दिया था। इस मामले में उन्हें छह माह के कारावास की सजा सुनाई गई।
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यह सजा उन्होंने फैजाबाद जेल में भुगती थी। श्री वर्मा यहां गांव में अपने भाई व भतीजों के साथ रह रहे हैं। उन्होंने विवाह नहीं किया था।
सोमवार को अमर उजाला से बात करते हुए उन्होंने देश के मौजूदा हालात पर चिंता जतायी। बोले कि देश को स्वतंत्रता ही मिली है। आमलोगों को जो सुरक्षा मिलनी चाहिए थी, वह कहां मिल पायी। अंग्रेजी हुकूमत के दौरान अपराध करने से पहले लोग 100 बार सोचते थे।
ऐसी व्यवस्था अब भी बननी चाहिए कि अपराध से पहले लोगों को उसका परिणाम सामने दिखने लगे। कहा कि अब तो अपराध करने के बाद दोषी व्यक्ति भी कई बार इस लिए भयमुक्त रहता है, क्योंकि उसे ही बचाने वालों की यहां कोई कमी नहीं रहती। समाज को इससे बचना होगा।
आम लोगों को न्याय व हक मिल सके, इसकी जिम्मेदारी सभी को मिलकर निभानी होगी। प्रशासन व जनप्रतिनिधि के अलावा समाज के गणमान्य नागरिकों को इसमें अहम भूमिका निभाने की जरूरत है। श्री वर्मा ने बताया कि उन्हें पेंशन मिल रही है।
राष्ट्रीय पर्वों के दौरान प्रशासन की तरफ से बुलाया भी जाता है, लेकिन सेनानियों को जो सम्मान मिलना चाहिए अब भी वह नहीं मिल पा रहा है। सेनानियों के किस्से बच्चों तक और ज्यादा गहराई से पहुंचाए जाने की जरूरत है। रटी रटाई चीजों की जगह बच्चों को आजादी के बारे में नए नए तथ्यों से अवगत कराए जाएं तो उसके ज्यादा बेहतर परिणाम सामने आएंगे।