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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ambedkar Nagar News ›   Farmers sparked the imagination of freedom

किसानों ने जगाई थी आजादी की अलख

Thu, 13 Aug 2015 09:52 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ अंबेडकरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ अंबेडकरनगर Updated Thu, 13 Aug 2015 09:52 PM IST
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यहां के देशभक्तों ने सैनिकों का अपमान करने पर एक अंग्रेज अधिकारी की हत्या तक कर दी थी। आजादी के लिए एक लाख से अधिक किसानों ने पदमार्च कर यहीं से स्वतंत्रता की अलख जगाई थी। यह बात अलग है कि नई पीढ़ी तक इसका संदेश पहुंचाने को लेकर जिले में किसी भी स्तर पर कोई सार्थक प्रयास होता नजर नहीं आता।
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देश को आजाद हुए 68 वर्ष बीत चुके हैं। समय के साथ लोग उन रणबांकुरों को भुलाते जा रहे हैं, जिन्होंने आजादी के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया था। इस जिले के  अधिकांश लोग महात्मा गांधी से प्रेरित होकर आजादी की लड़ाई में कूदे, तो कुछ लोग नेताजी सुभाषचंद्र बोस से प्रेरित होकर आजाद हिंद फौज के सदस्य बने।
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भीटी तहसील क्षेत्र के प्रताबीपुर गांव निवासी लालता प्रसाद त्रिपाठी नेता जी सुभाषचंद्र बोस से प्रेरित होकर आजादी की लड़ाई में कूदने का निर्णय लिया।  वे आजाद हिंद फौज में शामिल हुए। काबलियत के बल पर वह लेफ्टीनेंट बने। कई मौकों पर अंग्रेजों के छक्के छुड़ाए।
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वाराणसी स्थित एक अस्पताल में अछूतों की भर्ती करने से मना करने पर  जिले के अकबरपुर निवासी डा. गणेशकृष्ण जेतली ने नौकरी से त्यागपत्र दे दिया था। इसके बाद महात्मा गांधी से प्रेरित होकर आजादी की लड़ाई में कूद पड़े।

जलालपुर नगर के अरई निवासी राजबली, निजामपुर निवासी चितबहाल, कन्नूपुर निवासी वंशराज उपाध्याय व चंद्रभूषणलाल व अहिरौली थाना क्षेत्र के मदनगढ़ निवासी भगवती प्रसाद वर्मा ने मिलकर आजादी की लड़ाई को आगे बढ़ाया। इनके सामूहिक प्रयास से जिले से एक लाख से अधिक किसानों ने अंग्रेजों की नीतियों के विरोध में पदमार्च करते हुए फैजाबाद की तरफ कूच किया था।

राजेसुल्तानपुर थाना क्षेत्र के वसुधा सिंह ने नेताजी सुभाषचंद्र बोस से प्रेरित होकर एक अंग्रेज अधिकारी को मारकर उसका शव नदी में डाल दिया था। इनके अलावा भी कटेहरी, टांडा, आलापुर, भीटी आदि क्षेत्र के भी तमाम सेनानियों ने आजादी की लड़ाई में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आजादी की लड़ाई में बढ़ चढ़कर भाग लेने वाले ऐसे सेनानियों के गौरव को सदैव सुनहरे अक्षरों में याद किया जाएगा।

समय बीतने के साथ ही आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका को मौजूदा समय के युवा भुलाते जा रहे हैं। इसका प्रमुख कारण ऐसे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के गौरवशाली इतिहास को युवाओं तक पहुंचाने के लिए कोई सार्थक कदम न उठाया जाना है।

छात्रा श्रुति व छात्र अभिषेक ने आजादी की लड़ाई में महात्मा गांधी, सुभाषचंद्र बोस, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह जैसे सेनानियों के योगदान के बारे में तो बताया, लेकिन अंबेडकरनगर जनपद के किन सेनानियों ने लड़ाई में भाग, लिया, इसकी कोई जानकारी उसे नहीं थी।

छात्र विनय यादव व मोहम्मद सैफ को भी आजादी की लड़ाई में जनपद से संबंधित लोगों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। वे सिर्फ उन्हीं का नाम जानते हैं, जिन्हें या तो किताबों में पढ़ा है या फिर स्वतंत्रता दिवस व गणतंत्र दिवस पर आयोजित कार्यक्रमों में जिनका नाम प्रमुखता से लिया जाता है।

सामाजिक कार्यकर्ता डा. रमाकांत मिश्र कहते हैं कि हाइटेक माहौल में युवा आजादी के रणबांकुरों को भुलाते जा रहे हैं। यह अत्यंत चिंताजनक है। कहा कि युवाओं को सिर्फ उन्हीं के नाम याद हैं, जिनका नाम आमतौर पर कार्यक्रमों के दौरान लिया जाता है।

उन्हें ऐसे लोगों के नाम व उनके योगदान के बारे में भी जानकारी दी जानी चाहिए, जिसे लोग भुला चुके हैं। साहित्यकार जियाराम शुक्ल कहते हैं कि इसे विडंबना ही कहा जाएगा कि आजादी की लड़ाई में अंबेडकरनगर जिले से भी बड़ी संख्या में लोगों ने भागीदारी की, लेकिन उनकी जानकारी अधिकांश युवाओं को नहीं है।


इसके लिए सभी को सार्थक पहल करनी होगी। टीएन डिग्री कालेज के प्राचार्य डा. रमेशचंद्र पाठक ने कहा कि सेनानियों के योगदान की जानकारी देकर युवाओं को न सिर्फ जागरुक करना होगा, वरन उन्हें यह भी बताना होगा कि कितने कड़े संघर्ष के बाद देश को आजादी मिली है।
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