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अलविदा डॉक्टर, आपको नहीं भूल पाएंगे हम
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डीएम ने फेसबुक पर लिखी मार्मिक पोस्ट।
- फोटो : AMBEDKAR NAGAR
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अंबेडकरनगर। ...अलविदा डॉक्टर! इस लड़ाई में यहां तक साथ देने के लिए... अंबेडकरनगर आपको भुला न सकेगा। आपने जिस जिम्मेदारी से 24 घंटे सभी तरह के मरीजों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई, उससे समूचे जिले को प्रशंसा मिली। कोरोना का शिकार हुए जिले के सीएमएस डॉ. संत प्रकाश गौतम को अंतिम विदाई देते हुए डीएम राकेश कुमार मिश्र ने अपनी फेसबुक वॉल पर कुछ ऐसी ही मार्मिक पोस्ट लिखी।
दरअसल, सीएमएस डॉ. एसपी गौतम की तबियत बिगड़ने पर उन्हें लखनऊ एसजीपीजीआई में भर्ती कराया गया था। यहां कोरोना से लड़ते-लड़ते मंगलवार को उनकी सांसें थम गईं। कोरोना से लड़ रहे अपने सिपाही को खोने के बाद डीएम राकेश भी गमगीन दिखे और सीएमएस के साथ बिताए गए पलों को उन्होंने फेसबुक पर मार्मिक पोस्ट लिखकर साझा की।
उन्होंने लिखा जाना एक बहादुर योद्धा का। ... कभी रात के दो बजे रहे हों या भोर के पांच बजे हों तो भी एक फोन पर वे तत्पर मिलते। मेरे पहुंचने से पहले ही वह हर बार उपस्थित मिलते। तीस लाख आबादी वाले जिले में सभी तरह के मरीजों को सात दिनों चौबीस घंटे चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाने में वे लगे रहते थे। प्रवासी मजदूरों के आगमन के दौरान 24 घंटे कोरोना की जांच चलती रही।
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डॉ. गौतम के जिम्मे कोविड हॉस्पिटल की भी जिम्मेदारी थी। वहां भर्ती संक्रमित मरीज के कमरे में राउंड के दौरान ही वे संक्रमित हो गए, लेकिन उनमें सेवा भाव ऐसा था कि साथी डॉक्टर भी यह नहीं जान पाए कि वह लगातार असहज हो रहे हैं। उनके अंग एक के बाद एक साथ देना छोड़ रहे। हम सभी रो रहे हैं पर हर कोई काम में लगा है।
उम्मीद तोड़ती खबर आने पर हम सब लखनऊ भागे। अंतिम विदाई, पूरा परिवार था, लेकिन मुंह देखना नहीं हो सका। शरीर बाड़ी बैग में शील्ड था। वहां मौजूद सभी के हाथ पांव मुंह सब थका था। वहां सबकी पहचान खो गई थी। परिवार एक दूसरे को पकड़कर विलाप कर रहा था। वह लिखते हैं कि रोते हुए उनकी बेटी बोली बहुत विजी रखा आप लोगों ने। कुछ कहने की बजाए मैंने सिर्फ हाथ जोड़ लिए। डीएम ने लिखा कि समय का यह दौर निकाल जाएगा एक दिन। भूल जाएगा सब कुछ, लेकिन डॉ गौतम का यूं जाना भूलने वाला नहीं। अब हम सब इस लड़ाई को आगे बढ़ाएंगे, जिसे डॉ गौतम ने जी जान से लड़ा। डीएम ने फेसबुक का समापन भावुक अंदाज में करते हुए लिखा कि अलविदा डॉ. संत प्रकाश गौतम। आपको हम भूल नहीं पाएंगे।
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दरअसल, सीएमएस डॉ. एसपी गौतम की तबियत बिगड़ने पर उन्हें लखनऊ एसजीपीजीआई में भर्ती कराया गया था। यहां कोरोना से लड़ते-लड़ते मंगलवार को उनकी सांसें थम गईं। कोरोना से लड़ रहे अपने सिपाही को खोने के बाद डीएम राकेश भी गमगीन दिखे और सीएमएस के साथ बिताए गए पलों को उन्होंने फेसबुक पर मार्मिक पोस्ट लिखकर साझा की।
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उन्होंने लिखा जाना एक बहादुर योद्धा का। ... कभी रात के दो बजे रहे हों या भोर के पांच बजे हों तो भी एक फोन पर वे तत्पर मिलते। मेरे पहुंचने से पहले ही वह हर बार उपस्थित मिलते। तीस लाख आबादी वाले जिले में सभी तरह के मरीजों को सात दिनों चौबीस घंटे चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाने में वे लगे रहते थे। प्रवासी मजदूरों के आगमन के दौरान 24 घंटे कोरोना की जांच चलती रही।
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डॉ. गौतम के जिम्मे कोविड हॉस्पिटल की भी जिम्मेदारी थी। वहां भर्ती संक्रमित मरीज के कमरे में राउंड के दौरान ही वे संक्रमित हो गए, लेकिन उनमें सेवा भाव ऐसा था कि साथी डॉक्टर भी यह नहीं जान पाए कि वह लगातार असहज हो रहे हैं। उनके अंग एक के बाद एक साथ देना छोड़ रहे। हम सभी रो रहे हैं पर हर कोई काम में लगा है।
उम्मीद तोड़ती खबर आने पर हम सब लखनऊ भागे। अंतिम विदाई, पूरा परिवार था, लेकिन मुंह देखना नहीं हो सका। शरीर बाड़ी बैग में शील्ड था। वहां मौजूद सभी के हाथ पांव मुंह सब थका था। वहां सबकी पहचान खो गई थी। परिवार एक दूसरे को पकड़कर विलाप कर रहा था। वह लिखते हैं कि रोते हुए उनकी बेटी बोली बहुत विजी रखा आप लोगों ने। कुछ कहने की बजाए मैंने सिर्फ हाथ जोड़ लिए। डीएम ने लिखा कि समय का यह दौर निकाल जाएगा एक दिन। भूल जाएगा सब कुछ, लेकिन डॉ गौतम का यूं जाना भूलने वाला नहीं। अब हम सब इस लड़ाई को आगे बढ़ाएंगे, जिसे डॉ गौतम ने जी जान से लड़ा। डीएम ने फेसबुक का समापन भावुक अंदाज में करते हुए लिखा कि अलविदा डॉ. संत प्रकाश गौतम। आपको हम भूल नहीं पाएंगे।