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Ambedkar Nagar News: भक्ति में होती है भाव की प्रधानता
Mon, 15 Dec 2025 10:47 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Mon, 15 Dec 2025 10:47 PM IST
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आलापुर (अंबेडकरनगर)। क्षेत्र के मालपुर बसहिया स्थित ब्रह्मस्थान प्रांगण में श्रीराम कथा के छठवें दिन सोमवार को केवट प्रसंग, भरत चरित्र और अयोध्या विरह का वर्णन किया गया।
प्रवाचक रघुवीर दास ने बताया कि गंगा तट पर पहुंचने पर भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता ने केवट से नाव मांगी। केवट ने प्रभु को पहचानते हुए पहले प्रणाम नहीं किया, क्योंकि वह जानता था कि जिनके चरणों के स्पर्श से पत्थर नारी बन गया, उनके चरणों से उसकी नाव मुक्त हो सकती है। गंगा पार कराने के बाद केवट ने दंडवत प्रणाम किया। प्रभु श्रीराम ने उतराई देनी चाही, लेकिन केवट ने विनम्रता से उसे स्वीकार नहीं किया और कहा कि जिसके हाथ से त्रिलोकीनाथ ने याचना की हो, वह कभी दरिद्र नहीं रह सकता। केवट का संवाद निष्काम सेवा, आत्मसम्मान और समर्पण का प्रतीक है। भरत का जीवन त्याग, कर्तव्यनिष्ठा और आदर्श भाईचारे का उदाहरण है। इस दौरान राकेश, पवन, बिपिन व अन्य उपस्थित रहे।
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प्रवाचक रघुवीर दास ने बताया कि गंगा तट पर पहुंचने पर भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता ने केवट से नाव मांगी। केवट ने प्रभु को पहचानते हुए पहले प्रणाम नहीं किया, क्योंकि वह जानता था कि जिनके चरणों के स्पर्श से पत्थर नारी बन गया, उनके चरणों से उसकी नाव मुक्त हो सकती है। गंगा पार कराने के बाद केवट ने दंडवत प्रणाम किया। प्रभु श्रीराम ने उतराई देनी चाही, लेकिन केवट ने विनम्रता से उसे स्वीकार नहीं किया और कहा कि जिसके हाथ से त्रिलोकीनाथ ने याचना की हो, वह कभी दरिद्र नहीं रह सकता। केवट का संवाद निष्काम सेवा, आत्मसम्मान और समर्पण का प्रतीक है। भरत का जीवन त्याग, कर्तव्यनिष्ठा और आदर्श भाईचारे का उदाहरण है। इस दौरान राकेश, पवन, बिपिन व अन्य उपस्थित रहे।
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