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149 प्राथमिक स्कूलों में पेयजल का संकट
अमरउजाला ब्यूरो/अंबेडकरनगर
Updated Tue, 23 Jun 2015 09:57 PM IST
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जिले में परिषदीय विद्यालयों की संख्या में तो लगातार वृद्धि हो रही है, लेकिन उनमें अध्यनरत छात्र छात्राओं को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की सुध विभाग को नहीं है।
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अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिले में 1352 प्राथमिक व 520 उच्च प्राथमिक विद्यालय के सापेक्ष 587 प्राथमिक व 326 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बाउंड्रीवाल ही नहीं है। इतना ही नहीं 149 परिषदीय विद्यालयों में हैंडपंप ही नहीं लगा है।
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नतीजा यह है कि छात्र छात्राओं को शुद्ध पेयजल के लिए दूर दराज लगे हैंडपंपों तक जाना पड़ता है। जिले के 870 विद्यालयों में फर्नीचर ही नहीं है। ऐसे में छात्र छात्राओं को भूमि पर ही बैठकर पढ़ने को विवश होना पड़ता है। जिले के अधिकांश परिषदीय विद्यालय मौजूदा समय में न सिर्फ शिक्षकों की कमी, वरन कई मूलभूत सुविधाओं से वंचित चल रहे हैं।
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लगभग प्रत्येक शिक्षासत्र में नए परिषदीय विद्यालयों की स्थापना तो कर दी जाती है, लेकिन इन विद्यालयों में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने को लेकर विभागीय अधिकारी गंभीर नहीं हो पा रहे हैं।
आवश्यक सुविधाएं न उपलब्ध होने का ही नतीजा है परिषदीय विद्यालयों से लगातार छात्र छात्राओं व उनके अभिभावकों का लगातार मोहभंग होता जा रहा है।
वैसे तो इन विद्यालयों में अधिक से अधिक छात्र छात्राओं के प्रवेश के लिए न सिर्फ एमडीएम योजना का संचालन किया जा रहा है, वरन छात्र छात्राओं को निशुल्क ड्रेस व पुस्तक भी उपलब्ध कराई जा रही है। इसके बाद इन विद्यालयों में छात्र छात्राओं की संख्या में वृद्धि नहीं हो पा रही है। कारण मूलभूत सुविधाओं की कमीं का होना है।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार जिले में कुल 1872 परिषदीय विद्यालय हैं। इनमें 1352 प्राथमिक विद्यालय व 520 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं।
इनमें से 587 प्राथमिक व 326 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बाउंड्रीवाल नहीं है, जिससे इन विद्यालयों में अध्यनरत छात्र छात्राओं में असुरक्षा की भावना बनी रहती है।
पढ़ाई करते समय अक्सर छुट्टा जानवरों के विद्यालय परिसर में प्रवेश कर जाने से व्यवधान उत्पन्न होता रहता है। 46 प्राथमिक व 103 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में हैंडपंप की स्थापना नहीं की जा सकी है।
नतीजा यह है कि संबंधित विद्यालयों के छात्र छात्राओं को शुद्ध पेयजल के इधर उधर भटकने के लिए मजबूर होना पड़ता है। कई बार तो सड़क पार कर पेयजल के लिए जाने की स्थिति बनी रहती है।
इससे दुर्घटना होने का भी खतरा रहता है। 605 प्राथमिक व 265 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में फर्नीचर तक की सुविधा विभाग नहीं उपलब्ध करा सका है।
इसके चलते छात्र छात्राओं को जमीन पर ही बैठकर पढ़ाई करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। कई विद्यालयों में टाटपट्टी की सुविधा दी जाती है, लेकिन ज्यादातर में वह भी नहीं मिल पाती।
कहीं टाटपट्टी किसी कमरे में बंद रहती है, तो कहीं वह अध्यापकों के घर उपयोग में आ रही होती है। सवा छह बाइ साढ़े पांच मीटर के क्षेत्रफल में बनने वाले शिक्षण कक्षों में 30 से 35 छात्र छात्राओं के बैठने की व्यवस्था है, लेकिन कम ही विद्यालय ऐसे हैं, जहां एक एक कक्षा में छात्र छात्राओं की संख्या मानक के अनुरूप होती है।
यह बोले अधिकारी
बीएसए दलसिंगार यादव ने बताया कि जिन विद्यालयों में फर्नीचर, बाउंड्रीवाल व हैंडपंप नहीं हैं, वहां इन सुविधाओं को उपलब्ध कराने के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। धन उपलब्ध होते ही आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई दी जाएंगी।