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सभी ग्राम पंचायतों तक नहीं पहुंच सके पल्स ऑक्सीमीटर व इन्फ्रारेड थर्मामीटर
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अंबेडकरनगर। कोरोना से बचाव को लेकर शासन की प्राथमिकता के बावजूद जिले की सभी ग्राम पंचायतों को पल्स ऑक्सीमीटर व इन्फ्रारेड थर्मामीटर नहीं मिल पाया है। जून में ही दोनों उपकरण हर ग्राम पंचायत में तैनात आशा बहू को उपलब्ध कराने का निर्देश था जबकि ढाई माह बाद भी करीब एक चौथाई ग्राम पंचायतों में ये उपकरण नहीं पहुंच पाए हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि कोरोना से बचाव को लेकर शासन की सख्ती के बावजूद स्थानीय स्तर पर किस तरह की बेफ्रिकी फैली हुई है।
शासन ने जून में तय किया था कि सभी ग्राम पंचायतों में एक-एक पल्स ऑक्सीमीटर व इन्फ्रारेड थर्मामीटर उपलब्ध कराया जाए। 23 जून को अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने सभी जिलों को भेजे निर्देश में कहा कि राज्य वित्त आयोग व केंद्रीय वित्त आयोग के तहत ग्राम पंचायतों में दोनों उपकरण प्राथमिकता के आधार पर खरीद लिए जाएं। डीएम राकेश कुमार मिश्र ने 23 जून को ही इस आशय के निर्देश भी जारी कर दिए कि इसका अनुपालन अविलंब सुनिश्चित हो। जिले के सभी नौ ब्लॉकों के अधिकारियों को शासन की मंशा से अवगत भी करा दिया गया।
बावजूद इसके कोई प्रगति नहीं हो पाई। नतीजा यह हुआ कि 10 जुलाई को जिला पंचायत राज अधिकारी ने सभी खंड विकास अधिकारी व सहायक विकास अधिकारी पंचायत को पत्र लिखकर कहा कि फिर यह अपेक्षा की जा रही कि दोनों उपकरण अविलंब खरीदकर आशा बहुओं को उपलब्ध करा दें। इस पत्र में खासतौर पर यह उल्लेख किया गया कि तीन दिन के भीतर न सिर्फ उपकरण खरीद लिए जाएं वरन इस आशय का प्रमाण पत्र भी उपलब्ध कराया जाए।
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लापरवाही व मनमानी की हद यह कि दोबारा निर्देश दिए जाने के बाद भी कोई प्रगति नहीं हुई। सभी 927 ग्राम पंचायतों में जो पल्स ऑक्सीमीटर व इन्फ्रारेड थर्मामीटर जून माह में ही उपलब्ध करा दिए जाने चाहिए थे, उनमें से करीब एक चौथाई गांवों में अब तक आशा बहुओं को ये दोनों उपकरण नहीं मिल सके हैं। जाहिर तौर पर ऐसे गांवों में कोरोना संक्रमण की पहचान का अभियान स्थानीय स्तर पर नहीं चल पा रहा है। इससे शासन की जो मंशा थी, वह यहां ग्राम पंचायतों के मामले में औधे मुंह गिरी है।
सभी नौ ब्लॉक की तमाम आशा बहुओं ने बताया कि उन्हें न तो पल्स ऑक्सीमीटर मिला है और न ही इन्फ्रारेड थर्मामीटर। आलापुर ब्लॉक के चहोड़ाशाहपुर की आशा बहू सुमन रानी ने बताया कि पल्स ऑक्सीमीटर नहीं मिल पाया है। जहांगीरगंज ब्लॉक के नरियाव की आशा बहू मालती देवी, कियामपुर में तैनात दो आशा बहुओं चिंतादेवी व रीता वर्मा को अब तक कोई उपकरण नहीं मिल पाया है। भीटी ब्लॉक के अढनपुर की आशा बहू शकुंतला तिवारी, चंदापुर गांव की सुमन तिवारी व पकड़ी नगऊपुर की पूनम तिवारी को उपकरण नहीं मिले हैं, लेकिन पकड़ी नगऊपुर गांव के दूसरी आशाबहू शंकुतला को उपकरण दिया गया है। जलालपुर, टांडा, बसखारी, रामनगर, भियांव आदि ब्लाक के कई ग्राम पंचायतों की आशा बहुओं को भी ऐसे उपकरण नहीं मिल पाए हैं।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि शासन का उद्देश्य अत्यन्त सकारात्मक था। सामाजिक कार्यकर्ता घनश्याम गुप्त ने कहा कि गांवों में इन्फ्रारेड थर्मामीटर व पल्स ऑक्सीमीटर के जरिए जून माह से ही जांच शुरू होती तो इसका सकारात्मक असर सामने आता। तेजी से पहचान होती। यह बड़ी लापरवाही है कि ढाई माह बाद भी दोनों उपकरण सभी ग्राम पंचायतों तक नहीं पहुंचाए जा सके हैं। सामाजिक कार्यकर्ता अंजनी वर्मा ने कहा कि शासन की प्राथमिकता के आधार पर दोनों उपकरण समय से उपलब्ध कराए जाने चाहिए थे। यह जवाबदेही तय की जाए कि ढाई माह का विलंब होने के लिए कौन-कौन से अधिकारी व कर्मचारी जिम्मेदार हैं। उन पर भी कार्रवाई तय हो।
ज्यादातर ग्राम पंचायतों में पल्स ऑक्सीमीटर व इन्फ्रारेड थर्मामीटर पहुंच चुके हैं। जिन जगहों पर उपकरण नहीं पहुंचे हैं, वहां उपलब्ध कराया जाएगा।
- शेषनाथ पाण्डेय, डीपीआरओ
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शासन ने जून में तय किया था कि सभी ग्राम पंचायतों में एक-एक पल्स ऑक्सीमीटर व इन्फ्रारेड थर्मामीटर उपलब्ध कराया जाए। 23 जून को अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने सभी जिलों को भेजे निर्देश में कहा कि राज्य वित्त आयोग व केंद्रीय वित्त आयोग के तहत ग्राम पंचायतों में दोनों उपकरण प्राथमिकता के आधार पर खरीद लिए जाएं। डीएम राकेश कुमार मिश्र ने 23 जून को ही इस आशय के निर्देश भी जारी कर दिए कि इसका अनुपालन अविलंब सुनिश्चित हो। जिले के सभी नौ ब्लॉकों के अधिकारियों को शासन की मंशा से अवगत भी करा दिया गया।
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बावजूद इसके कोई प्रगति नहीं हो पाई। नतीजा यह हुआ कि 10 जुलाई को जिला पंचायत राज अधिकारी ने सभी खंड विकास अधिकारी व सहायक विकास अधिकारी पंचायत को पत्र लिखकर कहा कि फिर यह अपेक्षा की जा रही कि दोनों उपकरण अविलंब खरीदकर आशा बहुओं को उपलब्ध करा दें। इस पत्र में खासतौर पर यह उल्लेख किया गया कि तीन दिन के भीतर न सिर्फ उपकरण खरीद लिए जाएं वरन इस आशय का प्रमाण पत्र भी उपलब्ध कराया जाए।
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लापरवाही व मनमानी की हद यह कि दोबारा निर्देश दिए जाने के बाद भी कोई प्रगति नहीं हुई। सभी 927 ग्राम पंचायतों में जो पल्स ऑक्सीमीटर व इन्फ्रारेड थर्मामीटर जून माह में ही उपलब्ध करा दिए जाने चाहिए थे, उनमें से करीब एक चौथाई गांवों में अब तक आशा बहुओं को ये दोनों उपकरण नहीं मिल सके हैं। जाहिर तौर पर ऐसे गांवों में कोरोना संक्रमण की पहचान का अभियान स्थानीय स्तर पर नहीं चल पा रहा है। इससे शासन की जो मंशा थी, वह यहां ग्राम पंचायतों के मामले में औधे मुंह गिरी है।
सभी नौ ब्लॉक की तमाम आशा बहुओं ने बताया कि उन्हें न तो पल्स ऑक्सीमीटर मिला है और न ही इन्फ्रारेड थर्मामीटर। आलापुर ब्लॉक के चहोड़ाशाहपुर की आशा बहू सुमन रानी ने बताया कि पल्स ऑक्सीमीटर नहीं मिल पाया है। जहांगीरगंज ब्लॉक के नरियाव की आशा बहू मालती देवी, कियामपुर में तैनात दो आशा बहुओं चिंतादेवी व रीता वर्मा को अब तक कोई उपकरण नहीं मिल पाया है। भीटी ब्लॉक के अढनपुर की आशा बहू शकुंतला तिवारी, चंदापुर गांव की सुमन तिवारी व पकड़ी नगऊपुर की पूनम तिवारी को उपकरण नहीं मिले हैं, लेकिन पकड़ी नगऊपुर गांव के दूसरी आशाबहू शंकुतला को उपकरण दिया गया है। जलालपुर, टांडा, बसखारी, रामनगर, भियांव आदि ब्लाक के कई ग्राम पंचायतों की आशा बहुओं को भी ऐसे उपकरण नहीं मिल पाए हैं।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि शासन का उद्देश्य अत्यन्त सकारात्मक था। सामाजिक कार्यकर्ता घनश्याम गुप्त ने कहा कि गांवों में इन्फ्रारेड थर्मामीटर व पल्स ऑक्सीमीटर के जरिए जून माह से ही जांच शुरू होती तो इसका सकारात्मक असर सामने आता। तेजी से पहचान होती। यह बड़ी लापरवाही है कि ढाई माह बाद भी दोनों उपकरण सभी ग्राम पंचायतों तक नहीं पहुंचाए जा सके हैं। सामाजिक कार्यकर्ता अंजनी वर्मा ने कहा कि शासन की प्राथमिकता के आधार पर दोनों उपकरण समय से उपलब्ध कराए जाने चाहिए थे। यह जवाबदेही तय की जाए कि ढाई माह का विलंब होने के लिए कौन-कौन से अधिकारी व कर्मचारी जिम्मेदार हैं। उन पर भी कार्रवाई तय हो।
ज्यादातर ग्राम पंचायतों में पल्स ऑक्सीमीटर व इन्फ्रारेड थर्मामीटर पहुंच चुके हैं। जिन जगहों पर उपकरण नहीं पहुंचे हैं, वहां उपलब्ध कराया जाएगा।
- शेषनाथ पाण्डेय, डीपीआरओ