{"_id":"11c4609b10a5d4eebf8124d221595262","slug":"compassionate-appointment-is-not-less-then-challenge-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अनुकंपा पर नियुक्ति पाना चुनौती से कम नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अनुकंपा पर नियुक्ति पाना चुनौती से कम नहीं
अबेडकरनगर/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 10 Dec 2015 09:50 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कई जगहों पर नियुक्ति के लिए बेटियों ने भी आवेदन किया है। यह अलग बात है कि आवेदन के सापेक्ष नौकरी पाने वाली बेटियों की संख्या काफी कम है।
विज्ञापन
सरकारी नौकरी में ड्यूटी के दौरान कर्मचारी के निधन के बाद उनके परिवार के एक सदस्य को नौकरी दिए जाने का प्रावधान है। नौकरी दिए जाने का लाभ महज इसलिए दिया जाता है ताकि शोकसंतप्त परिवार को वित्तीय संकट का सामना न करना पड़े। अनुकंपा के आधार पर रोजगार देना कोई सामान्य बात नहीं है।
विज्ञापन
अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के अनुरोध पर विचार करते समय मृतक के परिवार की न सिर्फ आर्थिक स्थिति देखी जाती है बल्कि आवेदक की शैक्षिक योग्यता पर भी ध्यान दिया जाता है। जिले के विभिन्न विभागों में अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के लिए मौजूदा समय में 50 से अधिक मामले विचाराधीन हैं।
विज्ञापन
नौकरी पाने के लिए आवेदक लंबे समय से संबंधित विभाग के अधिकारियों के कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं लेकिन उन्हें इसका लाभ नहीं मिल सका। शिक्षा, स्वास्थ्य समेत अन्य कई विभाग में लंबित चल रहे मामलों को निपटाने को लेकर विभागीय अधिकारी गंभीर नहीं हो रहे हैं।
बीते दिनों अनुकंपा पर नौकरी पाने वाले अंशुमान ने बताया कि उसके पिता का ड्यूटी के दौरान निधन हो गया था। इसके बाद नौकरी पाने के लिए डेढ़ वर्ष तक लगातार जिला प्रशासन से लेकर विभागीय अधिकारियों तक के चक्कर लगाता रहा। काफी भागदौड़ करने के बाद उसे नौकरी मिल सकी।
बताया कि उसके चार भाई बहनों में वह अकेला है। ऐसे में समूचे परिवार की जिम्मेदारी उसी पर है। इसी प्रकार शिक्षा विभाग में पिता के निधन के बाद अकबरपुर की रीतिका लगभग एक वर्ष से संबंधित विभाग का चक्कर लगा रही हैं लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका है।
रीतिका ने बताया कि पांच भाई-बहनों में वह सबसे बड़ी हैं। उसके दो भाई हैं जो काफी छोटे हैं। परिवार का खर्च बड़ी मुश्किल से चल रहा है। नौकरी मिलने की आस है।